📖 - एज़ेकिएल का ग्रन्थ (Ezekiel)

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अध्याय 39

1) "और मानवपुत्र! तुम गोा के विरुद्ध भवियवाणी करते हुए यह कहो- प्रभु-ईश्वर यह कहता है: गोग! मेशेक और तूबल के महाराजा! मैं तुम्हारे विरुद्ध हूँ।

2) मैं तुम्हें मोड़ कर आगे बढने की प्रेरित करूंगा और तुम्हें उत्तर के सुदूर भागों से ला कर इस्राएल के पर्वतों पर आक्रमण कराऊँगा।

3) तब मैं तुम्हारे बायें हाथ से तुम्हारा धनुष झटक कर गिरा दूँगा और तुम्हारें दाहिने हाथ से तुम्हारे तीरों को छूट कर गिरने दूँगा।

4) तुम, तुम्हारे सभी सैनिक और तुम्हारे साथ के राष्ट्र इस्राएल के पर्वतों पर मर कर गिर जायेंगे। मैं तुम को सब प्रकार के शिकारी पक्षियों और जंगली पशुओं का आहार बनाऊँगा।

5) तुम खुले मैदान में गिर जाओगे, क्योंकि यह मैंने कहा है। यह प्रभु-ईश्वर की वाणी है।

6) मैं मागोग और समुद्रतटवर्ती क्षेत्रों में सुरक्षित रहने वाले लोगों पर आग बरसाऊँगा। तब वे यह जान जायेंगे कि मैं ही प्रभु हूँ।

7) "मैं अपनी प्रजा इस्राएल के बीच अपना पवित्र नाम प्रकट करूँगा और फिर कभी अपने पवित्र नाम का अनादर नहीं होने दूँगा। तब राष्ट्र यह जान जायेंगे कि मैं ही प्रभु, इस्राएल में परमापवन ईश्वर हूँ।

8) देखो, यह होने वाला है और हो कर रहेगा- यह प्रभु-ईश्वर की वाणी है। यह वही दिन है, जिसकी चर्चा मैंने कि है।

9) "तब इस्राएल के नगर के निवासी बाहर निकल कर उनके अस्त्र-शस्त्रों में आग लगा देंगे, ढालो और फरियों, धनुषों और तीरों, गदाओं और बरछों को जला डालेंगे और सात वर्षों तक उनसे आग जलायेंगे।

10) जिससे उन्हें न तो मैदानों से लकडियाँ लानी होंगी और न कोई जंगल काटना पडेगा; क्योंकि वे अस्त्र-शस्त्रों से ही आग जलायेंगे। वे अपने लूटने वालों को लूटेंगे और अपने उजाडने वालों को उजाड़ेंगे। यह प्रभु-ईश्वर की वाणी है।

11) "उस दिन मैं गोग को दफन के लिए इस्राएल में एक स्थान, समुद्र के पूर्व में अवस्थित अबारीम की घाटी प्रदान करूँगा, यात्री उस से हो कर नहीं जा सकेंगे, क्योंकि वहाँ गोग और उसके सभी सैनिक दफन किये जायेंगे। वह ’हमोन-गोग की घाटी’ कहलायेगी।

12) देश को शुद्ध करने के लिए इस्राएल का घराना सात महीनों तक उन्हें दफन करता रहेगा।

13) देश के सभी लोग उन्हें दफन करेंगे। वह दिन उनका सम्मान बढायेगा, जब मैं अपनी महिमा प्रकट करूँगा। यह प्रभु-ईश्वर की वाणी है।

14) वे देश में निरंतर यात्रा करते रहने के लिए आदमियों को नियुक्ति करेंगे और वे देश को शुद्ध करने के के लिए उसके ऊपर पड़ी हुई लाशों को दफनायेंगे। वे सात महीनों तक उनकी खोज करेंगे।

15) जब उनके देश से गुजरने पर कोई व्यक्ति मनुष्य की हड्डियाँ देखेगा, तो वह उनके पास चिह्न गाड़ देगा, जब तक दफनाने वाले उन को हामोन-गोग की घाटी में दफना न दें।

16) (वहाँ हमोना नामक नगर भी है।) इस प्रकार वे देश को शुद्ध करेंगे।

17) "और मानवपुत्र! प्रभु-ईश्वर तुम से यह कहता है: तुम सब प्रकार के पक्षियों और मैदान के सभी पशुओं से यह बोलो, एकत्र हो, आओ। उस बलि-भोज में सभी दिशाओं से इकट्ठे हो जाओ- इस्राएल के पर्वतों पर दिये गये भारी बलि-भोज में, जो मैं तुम्हारे लिए आयोजित कर रहा हूँ। तुम मांस खाओगे और रक्त पीओगे।

18) तुम बलवानों का मांस खाओगे और संसार के पदाधिकारियों का रक्त पियोगे; मेढों, मेमनों, बकरों और सांड़ो का, जो बाशान के हष्ट-पुष्ट पशु हैं।

19) मैं तुम्हारें लिए जो बलि-भोज आयोजित कर रहा हूँ, उस में चरबी खा-खा कर तुम तृप्त हो जाओगे और रक्त पी-पी कर उन्मत्त।

20) मेरी मेज़ पर घोड़़ों और घुडसवारों, बलवान लोगों और सभी प्रकार के योद्धाओं को खा कर तुम तृत्प हो जाओगे। यह प्रभु-ईश्वर की वाणी है।’

21) "मैं राष्ट्रों में अपनी महिमा स्थापित करूँगा और सभी राष्ट्र मेरे द्वारा दिये गये दण्ड और उन पर प्रहार करने वाली मेरी भुजा देखेंगे।

22) उस दिन से इस्राएल का घराना यह जान जायेगा कि मैं ही उनका प्रभु-ईश्वर हूँ।

23) राष्ट्र यह जान जायेंगे कि अपने अपराधों के कारण इस्राएली घराने के लोगों को बंदी बन कर निर्वासित होना पड़ा, क्योंकि उन्होंने मेरे साथ ऐसा विश्वासघात किया कि मैंने उन से अपना मुँह छिपा लिया, उन्हें उनके शत्रुओं के हाथ कर दिया और उन में सब-के-सब तलवार के घाट उतार दिये गये।

24) मैंने उनकी अपवित्रता और पापों के अनुसार उनका न्याय किया और उन से अपना मुँह छिपा लिया।

25) "इसलिए प्रभु-ईश्वर यह कहता है: अब मैं याकूब का भाग्य फेर दूँगा और इस्राएल के समस्त घराने पर दया दिखलाऊँगा। मैं अपने पवित्र नाम के लिए ईर्यालु रहूँगा।

26) तब वे लोग अपना अपमान और मरे विरुद्ध किये गये अपने समस्त विश्वसाघात भूल जायेंगे, जब वे अपने देश में, जहाँ उन्हें कोई आतंकित करने वाला नहीं होगा, सुरक्षित निवास करेंगे।

27) जब मैं उन्हें राष्ट्रों में से वापस ले आऊँगा और उनके शत्रुओं के देशों से उन्हें एकत्रित करूँगा, तो मैं अनेक राष्ट्रों के सामने अपनी महिमा प्रमाणित कर दूँगा।

28) इस प्रकार वे लोग यह जान जायेंगे कि मैं ही उनका प्रभु-ईश्वर हूँ; क्योंकि मैंने उन्हें राष्ट्रों में निर्वासित किया था और उसके बाद उन्हें उनके देश में एकत्रित किया। मैं उन में एक को भी फिर कभी दूसरे राष्ट्रों में रहने नहीं दूँगा।

29) जब मैं इस्राएल के घराने पर अपनी आत्मा उँढ़ेल दूँगा, तब मैं उन लोगों से फिर कभी अपना मुँह नहीं छिपाऊँगा। यह प्रभु-ईश्वर की वाणी है।"



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