अवतरणिकाएँ

आगमन ...ख्रीस्तजयंती ...प्रभु-प्रकाश ...चालीसा ...दु:खभोग ...पास्का ...स्वर्गारोहण ...साधारण रविवार ...पवित्र यूखारिस्त ...कुँवारी मरियम ...स्वर्गदूत ...संत योसेफ ...प्रेरित ...संत ...शहीद ...परिपालक ...कुँवारी ...सामन्य ...मृतक


Go to Eucharistic Prayers (यूखरिस्तीय प्रार्थना)

01.आगमन की अवतरणिका – 1

Theme: The First and Second Coming of Christ.
This preface is sadi: in the Masses of Sundays and ferial days of Advent, till December 16; - and in other Masses during this period, which do not have a proper preface.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र अपने प्रभु ख्रीस्त के द्वारा – तुझे धन्यवाद दें। अपने प्रथम आगमन में इन्होंने दीन मानव बनकर – तेरी आदि योजना पूरी की – तथा हमारे लिए अनंत मुक्ति का मार्ग फिर खोल दिया। जब ये अंतिम आगमन के समय – महिमा मंडित होकर पधारेंगे – तब हमें वह मुक्ति प्राप्त हो जाए, - जिसकी प्रतीक्षा हम उत्सुकता से कर रहे हैं। इसलिए हम स्वर्ग के समस्त दूतगण से मिलकर – तेरी स्तुति करते हुए निरंतर एक स्वर से गाते (कहते) हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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02. आगमन की अवतरणिका – 2

Theme: Awaiting the first and Second Coming of Christ.
This prefaceis sadi: - in the Masses of Sundays and ferial days of Advent, from December 17 till 24; - and in other Masses celebrated during this period which do not have a proper preface.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र अपने प्रभु ख्रीस्त के द्वारा – तुझे धन्यवाद दें। नबियों ने इनके आगमन की भविष्यवाणी की, - कुँवारी माता ने इन्हें अगाध अनुराग से वहन किया, - योहन ने इनकी पूर्वसूचना दी – और इन्हें उपस्थित देख इंगित भी किया; - यहीं प्रभु अपने जन्मोत्सव की उल्लासमय अगवानी करने का गौरव – हमें प्रदान करते हैं। ये हमें प्रार्थना में सजग – और मुदित मन इनकी प्रशंसा करते पाएँ। इसलिए हम स्वर्ग के समस्त दूतगण से मिलकर – तेरी स्तुति करते हुए निरंतर एक स्वर से गाते (कहते) हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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03. ख्रीस्तजयंती की अवतरणिका – 1

Theme: Christ the Light.
This preface is said: - in the Masses of Christmas, of January 1, and throughout the octave (except in honour of the Divine Persons, which have a proper preface); - and in all ferial Masses of this season, till the Saturday before the feast of the Lord’s Baptism.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र अपने प्रभु ख्रीस्त के द्वारा – तुझे धन्यवाद दें। क्योंकि जब इन्होंने शरीरधारण किया – तो हमारे सामने – तेरी महिमा की नयी ज्योति चमकने लगी, - कि अपने ईश्वर के – प्रत्यक्ष दर्शन से हमारा हृदय – अलौकिक वस्तुओं के प्रेम से प्रज्ज्वलित हो जाए। इसलिए हम स्वर्ग के समस्त दूतगण से मिलकर – तेरी स्तुति करते हुए निरंतर एक स्वर से गाते (कहते) हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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04. ख्रीस्तजयंती की अवतरणिका – 2

Theme: Restoring the Universe through the Lord Incarnate.
This preface is said: - in the Masses of Christmas, of January 1, and throughout the octave (except in honour of the Divine Persons, which have a proper preface); - and in all ferial Masses of this season, till the Saturday before the feast of the Lord’s Baptism.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र अपने प्रभु ख्रीस्त के द्वारा – तुझे धन्यवाद दें। ये अदृश्यमान ईश्वर होते हुए भी – अपने रहस्यपूर्ण जन्म के अवसर पर – हमारे मानव स्वभाव में प्रकट हुए – और जो सब युगों से पहले उत्पन्न हुए थे, - इनका मानव जन्म काल के अनुसार गिना जाने लगा। ऐसा हुआ कि ये पतित विश्व को उन्नत करें, - सृष्टि मात्र को फिर पुर्णता प्रदान करें – और पापी मानव के लिए स्वर्ग का द्वार खोल दें। इसलिए हम आनन्द की उमंग में – निरंतर एक निरंतर एक स्वर से गाते (कहते) हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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05. ख्रीस्तजयंती की अवतरणिका – 3

Theme: The Wonderful Exchange between God and man in the Lord Incarnate.
This preface is said: - in the Masses of Christmas, of January 1, and throughout the octave (except in honour of the Divine Persons, which have a proper preface); - and in all ferial Masses of this season, till the Saturday before the feast of the Lord’s Baptism.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र अपने प्रभु ख्रीस्त के द्वारा – तुझे धन्यवाद दें। इअनके द्वारा हमारे उध्दार की योजना आज प्रत्यक्ष हो गयी – क्योंकि जब तेरे अनादि शब्द ने – दुर्बल मानव स्वभाव धारण किया – तो इस नश्वर स्वभाव को ने केवल अनंत गौरव प्राप्त हुआ, - वरन्‍ हम ख्रीस्त के सहभागी – और अनन्त जीवन के प्रत्याशी बन गए। इसलिए हम समस्त स्वर्गदूतों से मिलकर – तेरी स्तुति करते हुए सहर्ष गाते (कहते) हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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06. प्रभु-प्रकाश की अवतरणिका – 1

Theme: Christ, the Light of the Gentiles.
This Preface is said on the Solemnity of the Epiphany. The priest may say it also instead of one of the Christmas prefaces, on the days that follow Epiphany, till the Saturday before the Lord’s Baptism.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र अपने प्रभु ख्रीस्त के द्वारा – तुझे धन्यवाद दें। तूने आज हमारी मुक्ति का रहस्य – ख्रीस्त के द्वारा गैरयहूदियों के बीच प्रकाशित किया – और जब ये हमारी नश्वर प्रकृति में प्रकट हुए, - तब तूने हमें इनकी अविनाशी महिमा के सहभागी बनाया। इसलिए हम समस्त स्वर्गदूतों से मिलकर – तेरी स्तुति करते हुए सहर्ष गाते (कहते) हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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07. चालीसे की अवतरणिका – 1

Theme: The Spiritual Meaning of Lent.
This preface is said during Lent, especially on the Sundays, which do not have a proper preface.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र अपने प्रभु ख्रीस्त के द्वारा – तुझे धन्यवाद दें। तू प्रतिवर्ष अपने विश्वासियों पर यह अनुग्रह करता है – कि हम अपने हृदय शुध्द कर – सहर्ष पास्का समारोह की प्रतीक्षा करें। हम भक्तिपूर्ण प्रार्थनाओं तथा परोपकार में – अधिकाधिक प्रयत्नशील रहें, - कि मानव-मुक्ति के रहस्यों का समारोह मना सकें। इनके द्वारा हमारा नया जन्म हुआ है, - तथा तेरे पुत्रों के योग्य कृपा से – हम परिपूर्ण हो जाते हैं। इसलिए हम समस्त स्वर्गदूतों से मिलकर – तेरी स्तुति करते हुए निरंतर एक स्वर से गाते (कहते) हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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08. चालीसे की अवतरणिका – 2

Theme: Lent, a time of Conversion.
This preface is said during Lent, especially on the Sundays, which do not have a proper preface.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र तुझे धन्यवाद दें। तूने अपने पुत्र-पुत्रियों के लिए – विशेष रूप से यह हितकर अवधि ठहराई है – कि इस में वे मन की स्वच्छता फिर प्राप्त करें – और संसार की मोह-माया से मुक्त होकर – क्षणिक वस्तुओं का इस भाँति उपयोग करें कि अनंत वस्तुओं की खोज में लगे रहें। इसलिए हम सब संतों और स्वर्गदूतों से मिलकर – तेरा यश गाते और निरंतर कहते हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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09. चालीसे की अवतरणिका – 3

Theme: Motives of Penance.
This preface is said in ferial Masses of lent and on days of fast.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र तुझे धन्यवाद दें। तू चाहता है कि हम संयम के पालन से – तेरे प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करें – जिससे हम पापियों की धृष्टता कम हो – और दरिद्रों जैसा भोजन करने से – हम तेरी सहृदयता का अनुकरण करें। इसके लिए हम असंख्य स्वर्गदूतों के साथ – तेरा स्तुति-गान करते हुए (गाते) कहते हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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10. चालीसे की अवतरणिका – 4

Theme: The Fruits of the Lenten Penance.
This preface is said in ferial Masses of lent and on days of fast.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र तुझे धन्यवाद दें। तू शारीरिक तरस्या के प्रभाव से हमारे दुर्गुणों का दमन करता है, तथा हमारा मन अपनी ओर आकृष्ट कर मनोबल के साथ हमें पुण्य जीवन का पुरस्कार प्रदान करता है। इसलिए स्वर्ग के समस्त दूतों से मिलकर – तेरी स्तुति करते हुए निरंतर एक स्वर से गाते (कहते) हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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11. प्रभु के दु:खभोग की अवतरणिका – 1

Theme: the Power of the Cross.
This preface is said during the fifth week of Lent, and in Masses in which the mysteries of the Lord’s Cross and Passion are celebrated.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र तुझे धन्यवाद दें। तेरे पुत्र के मुक्तिप्रद दुख:भोग द्वारा – संसार तेरे प्रताप की धोषणा करने लगा। क्रूस की अपार शक्ति द्वारा संसार का न्याय हो गया – और क्रूसित प्रभु का सामर्थ्य तथा महिमा झलक उठी। इसलिए हम स्वर्गदूतों और सन्तों के साथ – तेरा स्तुति-गान करते हुए निरंतर एक स्वर से गते (कहते) हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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12. प्रभु के दु:खभोग की अवतरणिका – 2

Theme: The Lord is victorious through his Passion.
This preface is said on Monday, Tuesday and Wednesday of Holy Week.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र अपने प्रभु ख्रीस्त के द्वारा तुझे धन्यवाद दें। इन्हीं के मुक्तिप्रद दुख:भोग तथा प्रतापमय पुनरूत्थान के दिन – निकट आ रहे हैं; - इन दोनों घटनाओं में – पुराने शत्रु का सिर कुचला जाता – और हमारे उध्दार का कार्य संपन्न होता है। इन्हीं प्रभु येसु के द्वारा दूतगण – तेरे आधिपत्य की आराधना करते – और तेरे सम्मुख युगानुयुग उल्लसित रहते हैं। इन्हीं स्वर्गदूतों के स्वर में अपना स्वर मिला कर – हम तेरी स्तुति करते हुए निरंतर कहते हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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13. पास्का की अवतरणिका – 1

Theme: The Paschal Mystery.
This preface is said in the Masses of the Easter Vigil, of Easter Sunday, and throughout the octave of Easter.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम प्रतिदिन और विशेष करके इस अवसर पर – (ईस रात में – इस दिन) अधिक समारोह के साथ तेरा गुणगान करें – जब ख्रीस्त हमारे पास्का का मेमना – बलि चढाए गए हैं। यही सच्चा मेमना है – जिन्होंने संसार का पाप हर लिया है। इन्होंने स्वयं मृत्यु सह कर हमारी मृत्यु नष्ट कर दी – और अपने पुनरुत्थान से हमें नवजीवन प्रदान किया है। इसलिए हम स्वर्ग के समस्त दूतगणों से मिल कर – तेरी स्तुति करते हुए निरंतर एक स्वर स गाते (कहते) हैं:

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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14. पास्का की अवतरणिका – 2

Theme: The new Life in Christ.
This preface is said throughout the Easter Season.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम प्रतिदिन और विशेष करके इस अवसर पर – अधिक समारोह के साथ तेरा गुणगान करें – जब ख्रीस्त हमारे पास्का का मेमना – बलि चढाए गए हैं। इन्हीं के द्वारा अनंत जीवन के लिए – तेरे ज्योति-पुत्र उत्पन्न होते और विश्वासियों के लिए – स्वर्गराज्य के प्रांगण खुल जाते हैं। क्योंकि इनकी मृत्यु द्वारा हम मृत्यु से मुक्त हुए हैं – और इनके पुनरुत्थान द्वारा हम सब जी उठे हैं। इसलिए पास्का के आनन्द से विभोंर होकर – विश्व का कोना-कोना उमंग से फूला नहीं समाता है – और स्वर्ग के समस्त दूतगण तेरी स्तुति करते हुए – निरंतर एक स्वर से गाते (कहते) हैं ।

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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15. पास्का की अवतरणिका – 3

Theme: Christ lives on for ever and intercedes for us with the Father.
This preface is said throughout the Easter season.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम प्रतिदिन और विशेष करके इस अवसर पर – अधिक समारोह के साथ तेरा गुणगान करें – जब ख्रीस्त हमारे पास्का का मेमना – बलि चढाए गए हैं। ये हमारे लिए अपने को सदा बलि चढाते हैं – और हमारे पक्ष में तेरे सम्मुख – निरंतर दुहाई देते हैं। ये एक बार बलि चढ़ चुके हैं, अब फिर कभी नहीं मरेंगे; - क्योंकि मर जाने पर भी ये सदा जीवित हैं। इसलिए पास्का के आनन्द से विभोंर होकर – विश्व का कोना-कोना उमंग से फूला नहीं समाता है – और स्वर्ग के समस्त दूतगण तेरी स्तुति करते हुए – निरंतर एक स्वर से गाते (कहते) हैं ।

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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16. पास्का की अवतरणिका – 4

Theme: The Universe restored by the Pasch of Christ.
This preface is said throughout the Easter season.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम प्रतिदिन और विशेष करके इस अवसर पर – अधिक समारोह के साथ तेरा गुणगान करें – जब ख्रीस्त हमारे पास्का का मेमना – बलि चढाए गए हैं। पुरानी पध्दति नष्ट करके – ख्रीस्त ने सबका नव-निर्माण किया – और हमें जीवन की पूर्णता प्रदान की है। इसलिए पास्का के आनन्द से विभोंर होकर – विश्व का कोना-कोना उमंग से फूला नहीं समाता है – और स्वर्ग के समस्त दूतगण तेरी स्तुति करते हुए – निरंतर एक स्वर से गाते (कहते) हैं ।

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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17. पास्का की अवतरणिका – 5

Theme: Christ, Priest and Victim.
This preface is said throughout the Easter season.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम प्रतिदिन और विशेष करके इस अवसर पर – अधिक समारोह के साथ तेरा गुणगान करें – जब ख्रीस्त हमारे पास्का का मेमना – बलि चढाए गए हैं। इन्होंने अपना शरीर अर्पित करके – प्राचीन बलिदानों को क्रूस के बलिदान में पूर्ण बनाया। ये स्वयं पुरोहित, वेदी और बलि बनकर – हमारी मुक्ति के लिए अपने को तुझे समर्पित करते हैं। इसलिए पास्का के आनन्द से विभोंर होकर – विश्व का कोना-कोना उमंग से फूला नहीं समाता है – और स्वर्ग के समस्त दूतगण तेरी स्तुति करते हुए – निरंतर एक स्वर से गाते (कहते) हैं ।

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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18. स्वर्गारोहण की अवतरणिका – 1

Theme: Christ, the Lord, abides with us.
This preface is said on the solemnity of the Ascension; and after the solemnity, in Masses which have no preface, till the Saturday before Pentecost.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र अपने प्रभु ख्रीस्त के द्वारा – तुझे धन्यवाद दें। क्योंकि परम प्रतापी राजा प्रभु येसु, - पाप और मृत्यु के विजेता, - विस्मय-विमुग्ध स्वर्गदूतों के समक्ष – उच्चतम स्वर्ग में (आज) आरोहण करते हैं। ये हैं ईश्वर तथा मानव के बीच मध्यस्थ, संसार के न्यायकर्त्ता और स्वर्गदूतों के सम्राट । अपने स्वर्गारोहण से – इन्होंने हमारा मानव स्वभाव नहीं त्यागा, - वरन्‍ अपने शरीर के अंग होने के कारण – हमें आश्वासन दिया – कि जहाँ ये, हमारे सिर तथा सब कुछ के स्रोत पहुँच गए हैं, - वहीं हम भी एक दिन पहुँचेंगे। इसलिए पास्का के आनन्द से विभोंर होकर – विश्व का कोना-कोना उमंग से फूला नहीं समाता है – और स्वर्ग के समस्त दूतगण तेरी स्तुति करते हुए – निरंतर एक स्वर से गाते (कहते) हैं ।

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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19. स्वर्गारोहण की अवतरणिका – 2

Theme: The Mystery of Ascension.
This preface is said on the solemnity of the Ascension; and after the solemnity, in Masses which have no proper preface, till the Saturday before Pentecost.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र अपने प्रभु ख्रीस्त के द्वारा – तुझे धन्यवाद दें। इन्होंने अपने पुनरुत्थान के बाद – सब शिष्यों को दर्शन दिए, - तथा उनके देखते-देखते स्वर्ग में चले गए – कि हम इनके ईश्वरीय जीवन के सहभागी बन सकें। इसलिए पास्का के आनन्द से विभोंर होकर – विश्व का कोना-कोना उमंग से फूला नहीं समाता है – और स्वर्ग के समस्त दूतगण तेरी स्तुति करते हुए – निरंतर एक स्वर से गाते (कहते) हैं ।

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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20. साधारण रविवार की अवतरणिका -1

Theme: The Paschal Mystery and the People of God.
This preface is said on Sundays during the year.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र अपने प्रभु ख्रीस्त के द्वारा – तुझे धन्यवाद दें। अपनी मृत्यु तथा पुनरुत्थान के द्वारा – इन्होंने हमें पाप और मृत्यु की दासता से मुक्त कर – ऐसा गौरव प्रदान किया – कि हम निर्वाचित जनता, राजकीय याजक वर्ग, - पवित्र जाति तथा प्रभु की निजी प्रजा कहलाएँ। हे पिता, हम समस्त विश्व में – तेरे सामर्थ्य की घोषणा करते हैं – क्योंकि तूने हमें अंधकार से – अपने अदभुत प्रकाश में बुलाया है। इसलिए हम समस्त दूतगण से मिलकर – तेरी स्तुति करते हुए निरंतर एक स्वर से गाते (कहते) हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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21. साधारण रविवार की अवतरणिका -2

Theme: The Mystery of Salvation in Christ.
This preface is said on Sundays during the year.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र अपने प्रभु ख्रीस्त के द्वारा – तुझे धन्यवाद दें। इन्होंने पतित मानव पर तरस खाकर – कुँवारी माता से जन्म लेने की कृपा की। इन्होंने क्रूस की यातना सहकर – हमें अनंत मृत्यु से विमुक्त किया – तथा पुनर्जीवित होकर – अनन्त जीवन प्रदान किया है। इसलिए हम समस्त दूतगण से मिलकर – तेरी स्तुति करते हुए निरंतर एक स्वर से गाते (कहते) हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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22. साधारण रविवार की अवतरणिका -3

Theme: Mankind saved through the sacred humanity of Christ.
This preface is said on Sundays during the year.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र तुझे धन्यवाद दें। यह तेरी अपार महिमा की विशेषता है – कि तू ईश्वर होकर भी – मनुष्य की सहायता करता है। तू ने हमारे मरणशील स्वभाव को ही – मुक्ति का साधन बनाया है – और जिस पाप के कारण मनुष्य का विनाश हुआ था – उस से तूने उसका उध्दार किया है। इन्हीं प्रभु येसु के द्वारा – दूतगण तेरे आधिपत्य की आराधना करते – और तेरे सम्मुख युगानुयुग उल्लसित रहते हैं। इन्हीं स्वर्गदूतों के स्वर में अपना स्वर मिलाकर – हम तेरी स्तुति करते हुए निरंतर कहते हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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23. साधारण रविवार की अवतरणिका -4

Theme: The History of Salvation.
This preface is said on Sundays during the year.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र अपने प्रभु ख्रीस्त के द्वारा – तुझे धन्यवाद दें। इन्होंने मानव-जन्म लेकर – पापी मनुष्य का नव-निर्माण किया, - अपने दुख:भोग से – हमारे पाप मिटा दिए, - अपने पुनरुत्थान से – हमें अनंत जीवन में प्रवेश करने की कृपा दी – और अपने स्वर्गारोहण से हमारे लिए स्वर्ग के द्वार खोल दिए। इसलिए हम समस्त दूतगण से मिलकर – तेरी स्तुति करते हुए निरंतर एक स्वर से गाते (कहते) हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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24. साधारण रविवार की अवतरणिका -5

Theme: God’s wonderful Creation.
This preface is said on Sundays during the year.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र तुझे धन्यवाद दें। तूने विश्व के सभी तत्वों का सृजन किया – और ऋतु-परिवर्तन की व्यवस्था की। तूने मनुष्य को अपना प्रतिरूप बनाया – और सृष्टि के सब रहस्य – उसके अधीन कर दिए, - कि तेरा प्रतिनिधि बनकर – वह सारी सृष्टि पर शासन करे, तथा तेरे महान कार्य देखकर – प्रभु येसु ख्रीस्त के द्वारा दिन-रात तेरा प्रशंसा-गान करता रहे। आकाश और पृथ्वी, दूत और महादूत – इन्हीम की प्रशंसा करते हुए दिन-रात गाते (कहते) हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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25. साधारण रविवार की अवतरणिका -6

Theme: the Promise of the eternal Pasch made to man.
This preface is said on Sundays during the year.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र तुझे धन्यवाद दें। तुझ में हम जीते, कार्य करते और बने रहते हैं। इस पृथ्वी पर निवास करते समय – हम न केवल प्रतिदिन तेरे प्रेम का अनुभव करते, - वरन्‍ अनंत जीवन की - प्रतिज्ञा की अधिकारी बन गए हैं। जिस पवित्र आत्मा ने प्रभु येसु को मृतकों में से जीवित कर दिया है, - उसी के प्रथम फल प्राप्त करने से – हमें यह आशा मिली है कि हम अनंत पास्का के भागी – सदा सर्वदा बने रहेंगे। इसलिए हम तुझे धन्यवाद देते – और स्वर्गदूतों के साथ तेरा गुणगान करते हुए (गाते) कहते हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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26. साधारण रविवार की अवतरणिका -7

Theme: We have been saved by the obedience of Jesus.
This preface is said on Sundays during the year.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र तुझे धन्यवाद दें। तूने दया से प्रेरित होकर - संसार को इतना प्यार किया, - कि हमारे लिए एक मुक्तिदाता भेजा – जो पाप को छोड़ हमारे सदृश मानव जीवन बिता सकें – और जिन बातों से वे तुझे प्रसन्न करते थे, - उन्हीं को तू हम लोगों में भी देखकर – प्रसन्न होता रहे। तेरे पुत्र की आज्ञाकारिता द्वारा हम ने उन वरदानों को फिर से पा लिया है, जिन्हें आज्ञा-भंग द्वारा पहले खो दिया था। इसलिए, हे प्रभु हम समस्त दूतों और संतों के साथ – तेरा गुणगान करते हुए आनंद विभोर होकर (गाते) कहते हैं

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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27. साधारण रविवार की अवतरणिका -8

Theme: The Church’s unity rooted in the Unity of the most Holy Trinity.
This preface is said on Sundays during the year.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र तुझे धन्यवाद दें, - क्योंकि जो पुत्र-पुत्रियाँ पाप के कारण – तुझ से बहुत दूर भटक गये थे, - उनको तूने अपने पुत्र के रक्त – और पवित्र आत्मा के सामर्थ्य से – अपने पास पुन: एकत्र करना चाहा। जैसे परम पावन त्रित्व एक है, - वैसे ही उसके प्रभाव से तेरी प्रजा भी एक बने – और कलीसिया ख्रीस्त के शरीर – तथा पवित्र आत्मा के मंदिर के रूप में प्रकट हो जाए। इसलिए तेरी प्रज्ञा के महिमार्थ – हम समस्त दूतगण से मिलकर – बड़े आनंद से तेरी स्तुति करते हुए (गाते) कहते हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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28. पवित्र यूखारिस्त की अवतरणिका -1

This preface is said in the Masses of the Lord’s Supper on Maundy Thursday. It may also be said on the Solemnity of the Lord’s Sacred Body and Blood, and in the votive Masses in honour of the most Holy Eucharist.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र अपने प्रभु ख्रीस्त के द्वारा - तुझे धन्यवाद दें। ये यथार्थ और शाश्वत पुरोहित हैं। इन्होंने चिरस्थायी बलिदान की स्थापना की – और पहली बार स्वयं अपने को – मुक्तिदायी बलि-स्वरूप तुझे चढ़ाया, - तथा आदेश दिया – कि हम इनकी स्मृति में इसे चढ़ाया करें। हमारे लिए अर्पित इनका शरीर ग्रहण कर – हम बल प्राप्त करते हैं – और हमारे लिए प्रवाहित इनका रक्त पान कर – हम पाप से विमुक्त होते हैं। इसलिए स्वर्ग के समस्त दूतगण से मिलकर – तेरी स्तुति करते हुए निरंतर एक स्वर से (गाते) कहते हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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29. पवित्र यूखारिस्त की अवतरणिका -2

This preface is said on the Solemnity of the Lord’s Body and Blood, and in the votive Masses of the most Holy Eucharist.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र अपने प्रभु ख्रीस्त के द्वारा - तुझे धन्यवाद दें। अंतिम ब्यालू में – अपने प्रेरितों के साथ भोजन करते समय – इन्होंने चाहा कि आगामी युगों में – क्रूस की मुक्तिदायी स्मृति बनाए रखें। इसलिए इन्होंने अपने को – निष्कलंक बलि के रूप में तुझे अर्पित कर दिया। यह अति सुग्राह्य उपहार – तुझे परम महिमा देता है। इस चिरवंदनीय संस्कार के द्वारा – तू अपने विश्वासियों का पोषण कर – उन्हें पवित्र करता है – कि जो मानव जाति – एक पृथ्वी पर निवास करती है, - वह एक विश्वास से आलोकित हो – और एक ही स्नेह-सूत्र में बंधी रहे; और हम परमप्रसाद के अदभुत संस्कार में – तेरी कृपा के आधुर्य का अनुभव कर – दिव्य जीवन के प्रतिरूप बनते जाएँ। इसी कारण स्वर्ग और पृथ्वी के समस्त चराचर – तेरे आराधन में नया गान गाते हैं – और हम भी समस्त स्वर्गदूतों के साथ – एक स्वर से निरंतर घोषित करते हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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30. धन्य कुँवारी मरियम के पर्वों की अवतरणिका -1

Theme: The Motherhood of the Blessed Virgin Mary.
This preface is said in Masses in honour of the Blessed Virgin Mary. The specific feast is mentioned in the following manner: “हम ईश्वर की माता मरियम के पर्व के दिन” (January 1); “हम एलिज़बेथ से माता मरियम की भेंट याद कर तेरी स्तुति...: (May 31); “हम धन्य कुँवारी मरियम का जन्मोत्सव मनाते हुए तेरी स्तुति... “ (September 8); “हम नित्य कुँवारी धन्य मरियम के इस पर्व के दिन... “ (Other feasts).

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र तुझे धन्यवाद दें। हम नित्य कुँवारी धन्य मरियम के इस (पर्व के) के दिन – तेरी स्तुति और गुण गाते हैं, - क्योंकि इन्होंने पवित्र आत्मा के प्रभाव से – तेरे एकलौते पुत्र को गर्भ में धारण किया – और अपना कुँवारापन अखंड रखते हुए – संसार की मुक्ति के लिए सनातन ज्योति, - हमारे प्रभु येसु ख्रीस्त को जन्म दिया। इसलिए हम समस्त्त दूतगण से मिलकर – तेरी स्तुति करते हुए निरंतर एक स्वर से गाते (कहते) हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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31. धन्य कुँवारी मरियम के पर्वों की अवतरणिका -2

Theme; The Church praises God in the words of the Virgin (Magnificat)
This preface is said in Masses in honour of the Blessed Virgin Mary.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: यह यथार्थ और उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सभी संतों के अदभुत जीवन में – तेरे चमत्कातों की घोषणा करें। और विशेष करके जब हम – धन्य कुँवारी मरियम का स्मरण करते हैं, - तो इन्हीं के समान कृतज्ञतापूर्ण हृदय से – तेरी दया की महिमा गाएँ। क्योंकि तूने सचमुच पृथ्वी के कोने-कोएने में – महान कार्य किये – और युग-युग में – अपनी उदार अनुकम्पा का विस्तार किया, - जब अपनी सेविका मरियम की दीनता देखकर – उनके द्वारा अपने पुत्र हमारे प्रभु येसु ख्रीस्त को – मानव जाति का मुक्तिदाता बनाया। इन्हीं के द्वारा समस्त दूतगण तेरे प्रताप की आराधना करते – और तेरे सम्मुख सदा-सर्वदा हर्ष मनाते हैं। इन्हीं स्वर्गदूतों से मिलकर हम तेरी स्तुति करते हुए – निरंतर एक स्वर से गाते (कहते) हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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32. स्वर्गदूतों के पर्वों की अवतरणिका

Theme: The Angels glorify God.
This preface is said in Masses in honour of the Angels.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र तुझे धन्यवाद दें – और तेरे समस्त दूतगणों के बीच – तेरा यशगान करना न भूलें। क्योंकि जब हम तेरे स्वर्गदूतों की प्रशंसा करते हैं – तो इस से तेरी ही उत्तमता – एवं महिमा का विस्तार होता है। और यदि स्वर्गदूत ऐसे महान्‍ गुणों से विभूषित हैं; - तो प्रत्यक्ष हो जाता है – कि तू कितना सर्वगुण-संपन्न – और सभी सृष्ट जीवों के परे कितना वांछनीय है। हमारे प्रभु येसु ख्रीस्त के द्वारा समस्त दूतगण – तेरे प्रताप का बखान करते हैं – और हम भी इन दूतों के साथ – तेरी आराधना करते हुए – एक स्वर से तेरा यशगान करते हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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33. संत योसेफ के पर्वों की अवतरणिका

Theme: the Mission of Saint Joseph.
This preface is said in Masses in honour of Saint Joseph.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र तुझे धन्यवाद दें। हम संत योसेफ के इस (पर्व में) दिन – तेरी समुचित महिमा करते हैं। तूने इन धर्मात्मा को – जो तेरे विश्वस्त तथा विचारशील सेवक बने रहे, - ईश्वर की माता, नित्य कुँवारी मरियम का वर चुना। फिर उन्हें पवित्र परिवार का स्वामी नियुक्त किया, - कि ये तेरे एकलौते पुत्र – और हमारे प्रभु येसु ख्रीस्त के लिए – जिनका जन्म पवित्र आत्मा के सामर्थ्य से हुआ, - रक्षक तथा पिता का स्थान ग्रहण करें। इसलिए हम समस्त दूतगण से मिलकर – तेरी स्तुति करते हुए निरंतर एक स्वर से गाते (कहते) हैं।

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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34. प्रेरितों के पर्वों की अवतरणिका -1

Theme: The Apostles, shepherds of the People of God.
This preface is said in Masses in honour of the Apostles.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र तुझे धन्यवाद दें। हे शाश्वत गडेरिए, - तू अपने रेवड़ का सदा ध्यान रखता – और अपने धन्य प्रेरितों के द्वारा – उसकी निरंतर रक्षा करता है। जिनको तूने अपने पुत्र के स्थान पर गड़ेरिए नियुक्त किया है, - वे ही तेरे रेवड़ के अध्यक्ष बनकर – उसका समुचित प्रबन्ध करते हैं। इसलिए हम समस्त दूतगण से मिलकर – तेरी स्तुति करते हुए निरंतर एक स्वर से गाते (कहते) हैं।

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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35. प्रेरितों के पर्वों की अवतरणिका -2

Theme: the Apostles, founders of the Churches and witnesses of the Resurrection.
This preface is said in Masses in honour of the Apostles and Evangelists.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र अपने प्रभु ख्रीस्त के द्वारा तुझे धन्यवाद दें। तूने प्रेरितों की नींव पर – अपनी कलीसिया की स्थापना की है, - जिस से वह इस पृथ्वी पर – तेरी पवित्रता का नित्य स्मारक बनी रहे – और सब मनुष्यों को स्वर्ग का साक्ष्य दे। इस कारण अभी तथा युगानुयुग – सभी स्वर्गदूतों के साथ – हम भक्ति भावना से पूर्ण होकर – तेरा यशगान करते और कहते हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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36. संतों के पर्वों की अवतरणिका -1

Theme: God is glorified in his Saints.
This preface is said at Masses in honour of All the Saints, of Patrons and Titular Saints of churches, and when the solemnity of feast of a Saint is celebrated and there is no proper preface.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र तुझे धन्यवाद दें। संतों के समाज में तेरा कीर्त्तिमान होता है – और जब तू इनके पुण्यकर्मों का पुरस्कार देता है, - तो अपने ही दानों पर सफलता की मुहर लगाता है। तू संतों की जीवनचर्या से हम लोगों को उत्तम उदाहरण, - इनके साथ संबंध से दिव्य सहभागिता – और इनकी मध्यस्थता से – सहायता प्रदान करता है। हम इस असंख्य साक्षियों के विश्वास से दृढ़ होकर – जीवन संग्राम में विजयी होते जाएँगे – और इन्हीं के साथ हमारे प्रभु येसु ख्रीस्त के द्वारा – महिमा का चिरनवीन मुकुट प्राप्त करेंगे। इसलिए हम समस्त दूतगण – और विविध संत-समाजों के साथ निरंतर तेरा गुणगान करते और कहते हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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37. संतों के पर्वों की अवतरणिका -2

Theme: The Spiritual fecundity of a holy life.
This preface is said at Masses in honour of All the Saints, of Patrons and Titular Saints of churches, and when the solemnity of feast of a Saint is celebrated and there is no proper preface.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र अपने प्रभु ख्रीस्त के द्वारा तुझे धन्यवाद दें। तू अपने संतों के अद्भुत साक्ष्य द्वारा – अपनी कलीसिया को नित्य नई प्रेरणा – और शक्ति प्रदान करता – और हमें भी अपने प्रेम के – सुनिश्चित प्रमाण देता है। हे पिता, हम अपनी मुक्ति के कार्य पूरा करने में – इन संतों के अनुपम उदाहण से – प्रोत्साहन पाते रहते – और इनकी प्रेमपूर्ण मध्यस्थता से – निरंतर तेरे प्रिय बनते जाते हैं। इसलिए हम सब संतों और स्वर्गदूतों के साथ – तेरी स्तुति करते हुए निरंतर एक स्वर से गाते (कहते) हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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38. शहीदों के पर्वों की अवतरणिका -1

Theme: The Testimony and Example of Martyrdom.
This preface is said on solemnities and feast of Martyrs.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र तुझे धन्यवाद दें, - क्योंकि स्वनाम धन्य शहीद .... (नाम) ने प्रभुवर ख्रीस्त का अनुकरण करते हुए – तेरे नाम के साक्ष्य में रक्त बहाया है। यह रक्त घोषित करता है कि तेरे कार्य आश्चर्य से भरे हैं। ऐसे ही चमत्कार से - तू अपने प्रति साक्ष्य देने के लिए – हमारे प्रभु येसु ख्रीस्त के द्वारा – दुर्बल को बलवान्‍ बनाता है। इस कारण हम स्वर्गदूतों के साथ पृथ्वी पर – निरंतर तेरे प्रताप का गुणगान करते हुए कहते हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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39. शहीदों के पर्वों की अवतरणिका -2

Theme: The Marvels of God in the Triumph of the Martyrs.
This preface is said on solemnities and feasts of Martyrs and on their memorials.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र तुझे धन्यवाद दें, - क्योंकि अपने संतों के गौरव से तू महिमान्वित होता है और उनके दुख:संकट में अपने सामर्थ्य के अद्भुत कार्य प्रदर्शित करता है। हमारे प्रभु ख्रीस्त के द्वारा तू उन्हें विश्वास में उत्साह, धैर्य में दृढ़ता तथा मरण-संघर्ष में विजय प्रदान करता है। इसलिए स्वर्ग और पृथ्वी के सब निवासी तेरा यशोगान करते तथा हम स्वर्गदूतों के साथ निरंतर गाते (कहते) हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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40. परिपालकों के पर्वों की अवतरणिका

Theme: The hallowing presence in the Church of holy Pastors.
This preface is said on solemnities or feasts of holy Pastors.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र अपने प्रभु ख्रीस्त के द्वारा तुझे धन्यवाद दें। तू संत ..... (नाम) के त्योहार में अपनी कलीसिया को – आनंद मनाने का अवसर देता है, - कि तू इन संत के भक्तिपूर्ण जीवन के उदाहरण से – अपनी कलीसिया को सबल बनाए, - इनके सदुपदेशों से उसको सुशिक्षित करे – और इनके निवेदनों पर ध्यान देकर उसकी देखभाल करता रहे। इसलिए हम सब संतों और स्वर्गदूतों के साथ – तेरी स्तुति करते हुए निरंतर एक स्वर से गाते (कहते) हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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41. कुँवारियों तथा धर्मसंघियों के पर्वों की अवतरणिका

Theme: The Testimony of a life consecrated to God.
This preface is said on the solemnities or feasts of holy Virgins or Religious.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र तुझे धन्यवाद दें। यह शोभन है कि हम उन संतों के जीवन में – तेरे अदभुत विधान का प्रशंसागान करें – जिन्होंने स्वर्गराज्य के लिए - ख्रीस्त के चरणों में आत्मसमर्पण कर दिया है। इस विधान के अनुसार तू सब मनुष्यों को – आदि-पवित्रता के लिए पुन: बुलाता है – और स्वर्ग में मिलनेवाले वरदानों का – उपभोग करने के लिए – हमें अपने लक्ष्य तक पहुँचाता है। इसलिए हम सब संतों और स्वर्गदूतों के साथ – तेरी स्तुति करते हुए निरंतर एक स्वर से गाते (कहते) हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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42. सामन्य अवतरणिका – 1

Theme: The Universe has been restored in Christ.
This preface may be said in Masses which have no proper preface, and when no preface of the Season (Christmas, Lent, Easter) is obligatory.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र अपने प्रभु ख्रीस्त के द्वारा तुझे धन्यवाद दें। इन में तूने ही सब का नव-निर्माण किया – और हमें इनके वैभव के सहभागी बनाया। स्वयं ईश्वर होते हुए भी – इन्होंने अपने को ईश्वरीय महिमा से वंचित किया – तथा क्रूस पर रक्त बहाकर – विश्व भर में शांति स्थापित की। इसी कारण ये समस्त सृष्टि में सर्वोच्च सिध्द हुए – कि जो कोई इनकी ओर विश्वास की दृष्टि से देखे – वह अनंत मुक्ति प्राप्त करे। इसलिए हम समस्त दूतगण से मिलकर – तेरी स्तुति करते हुए निरंतर एक स्वर से गाते (कहते) हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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43. सामन्य अवतरणिका – 2

Theme: We are saved in Christ.
This preface may be said in Masses which have no proper preface, and when no preface of the season is obligatory.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र तुझे धन्यवाद दें। तूने प्रेम से प्रेरित होकर मनुष्य की सृष्टि की, - न्याय के अनुसार उसे अपराधी ठहराया – और दया करके हमारे प्रभु येसु ख्रीस्त के द्वारा – उसका उध्दार किया। इसलिए हम सभी दूतों और संतों के साथ – तेरा गुणगान करते हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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44. सामन्य अवतरणिका – 3

Theme: Praised by God who created and redeemed man.
This preface may be said in Masses which have no proper preface, and when no preface of the season is obligatory.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र तुझे धन्यवाद दें। तूने अपने प्रियतम पुत्र के द्वारा – मानव का नवनिर्माण किया – और दया से द्रवित होकर – उसका पुन: उध्दार किया है। इसके फलस्वरूप यह परम उचित है – कि सारी सृष्टि तेरी सेवा करे – और तेरे संतजन एक साथ मिलकर – तेरी जयजयकार करें। इसलिए तेरे सभी स्वर्गदूतों के साथ – हम भी निरंतर तेरा गुणगान करते हुए कहते हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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45. सामन्य अवतरणिका – 4

Theme: God gives us the grace to praise him
This preface may be said in Masses which have no proper preface, and when no preface of the season is obligatory.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र तुझे धन्यवाद दें। हे पिता, तुझे हमारी प्रशंसा की कोई ज़रूरत नहीं। यह हमारे प्रति तेरा वरदान ही है – कि हम तुझे अपनी कृतज्ञता प्रकट करें। हमारे स्तुति-गान तेरी महिमा की वृध्दि नहीं करते, - बल्कि हमारे प्रभु येसु ख्रीस्त के द्वारा हमारी मुक्ति में सहायक अवश्य होते हैं। इन्हीं का गुणगान स्वर्ग और पृथ्वी – तथा समस्त दूतगण निरंतर एक स्वर से करते हुए कहते हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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46. सामन्य अवतरणिका – 5

Theme: Proclaiming the Mystery of Christ.
This preface may be said in Masses which have no proper preface, and when no preface of the season is obligatory.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र अपने प्रभु ख्रीस्त के द्वारा तुझे धन्यवाद दें। हम प्रेमपूर्ण हृदय से – इनकी मृत्यु का स्मरण करते है, - विश्वास के साथ – इनके पुनरुत्थान की घोषणा करते हैं – और अटल भरोसे के साथ – इनके महिमापूर्ण आगमन की बाट जोहते हैं। इसलिए हम सभी दूतों और संतों के साथ – तेरा गुण्गान करते हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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47. सामन्य अवतरणिका – 6

Theme: The Mystery of our Salvation in Christ.
This preface may be said in Masses which have no proper preface, and when no preface of the season is obligatory.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि तेरे परम प्रिय पुत्र येसु ख्रीस्त के द्वारा हम सदा और सर्वत्र तुझे धन्यवाद दें। यहीं है तेरा शब्द। इनके द्वारा तूने सकल विश्व की सृष्टि की है, - और इनको हमारी मुक्ति के लिए भेजा है। इन्होंने पवित्र आत्मा की शक्ति से शरीर धारण कर – कुँवारी मरियम से जन्म लिया। इन्होंने हमारे लिए क्रूस पर अपनी भुजाएँ पसारीं – कि मृत्यु का विनाश करके पुनर्जीवन प्रकट करें। इस भाँति इन्होंने तेरी इच्छा पूरी करके - तेरे लिए पवित्र प्रजा प्राप्त की है। इसलिए हम सभी दूतों और संतों के साथ – तेरा गुण्गान करते हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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48. मृतकों की स्मृति में अवतरणिका – 1

This preface is said in Masses for the Dead.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र अपने प्रभु ख्रीस्त के द्वारा तुझे धन्यवाद दें। तूने हमें इनके द्वारा – महिमामय पुनरुत्थान की आशा दी है, - जब हम अपनी मृत्यु के विचार से दुखी होते हैं – तो अमरता की प्रतीक्षा हमें दिलासा देती है। हे पिता, तेरे भक्तों के लिए मृत्यु – जीवन का विनाश नहीं, जीवन का विकास है; - क्योंकि जब मृत्यु के द्वारा – यहाँ का निवास समाप्त हो जाएगा – तो हमें स्वर्ग का नित्य निवास प्राप्त होगा। इसलिए हम स्वर्ग के समस्त दूतगण से मिलकर – तेरी स्तुति करते हुए निरंतर एक स्वर से गाते (कहते) हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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49. मृतकों की स्मृति में अवतरणिका – 2

This preface is said in Masses for the Dead.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र अपने प्रभु ख्रीस्त के द्वारा तुझे धन्यवाद दें। इन्होंने स्वयं मरना स्वीकार किया – कि हम सबको मरना नहीं पड़े; इतना ही नहीं, तरस खाकर – सब की जगह अकेले मरना स्वीकार किया – कि सब के सब तेरे सम्मुख – सदा सर्वदा जीते रहें। इसलिए असंख्य स्वर्गदूतों से मिलकर – बड़े आनन्द से तेरा गुणगान करते हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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50. मृतकों की स्मृति में अवतरणिका – 3

This preface is said in Masses for the Dead.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र अपने प्रभु ख्रीस्त के द्वारा तुझे धन्यवाद दें। यहीं है संसार के मुक्तिदाता, - मानव जाति का जीवन – और मृतकों का पुनरुत्थान। इन्हीं के द्वारा समस्त दूतगण – तेरे प्रताप की आराधना करते – और तेरे सम्मुख युगानुयुग आनन्द मनाते हैं। इन्हीं स्वर्गदूतों से मिलकर – हम तेरा स्तुतिगान करते हुए निरंतर (गाते) कहते हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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51. मृतकों की स्मृति में अवतरणिका – 4

This preface is said in Masses for the Dead.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र तुझे धन्यवाद दें। हे पिता, तेरे विधान के अनुसार हम जन्म लेते – और उसके अनुसार हम जीते हैं। जिस धरती की मिट्टी से हम बने हैं – उसी धरती पर हम तेरी आज्ञाओं का पालन कर – पाप-मुक्त हो जाते हैं। और हम, जिनका त्राण तेरे पुत्र की मृत्यु द्वारा हुआ है, - तेरा संकेत पाकर – उनके पुनरुत्थान की महिमा के लिए – जी उठते हैं। इसलिए हम सब संतों और दूतों से मिलकर – तेरा गुणगान करते हुए निरंतर कहते हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !




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52. मृतकों की स्मृति में अवतरणिका – 5

This preface is said in Masses for the Dead.

पुरोहित: प्रभु आप लोगों के साथ हो।

सब: और आपके साथ भी।

पुरोहित: प्रभु में मन लगाइए।

सब: हम प्रभु में मन लगाए हुए हैं।

पुरोहित: हम अपने प्रभु ईश्वर को धन्यवाद दें।

सब: यह उचित और आवश्यक है।

पुरोहित: हे पूज्य पिता, यह परम उचित है, - हमारा कर्त्तव्य तथा कल्याण है – कि हम सदा और सर्वत्र अपने प्रभु ख्रीस्त के द्वारा तुझे धन्यवाद दें। हम अपने कुकर्मों से ही नष्ट होते हैं – और पाप के कारण ही मृत्यु का शिकार बन गए हैं। फिर भी तेरे वात्सल्य और कृपा के वरदानों से – ख्रीस्त की विजय द्वारा हमारा उध्दार हुआ – और इन्हीं के साथ हमें अनन्त जीवन का आमंत्रण मिला है। इसलिए हम स्वर्ग के दूतगण के साथ – पृथ्वी पर दिन-रात तेरी स्तुति गाते – और तेरे प्रताप की निरंतर घोषणा करते हैं :

सब: पवित्र, पवित्र, पवित्र ! प्रभु विश्वमण्डल के ईश्वर! स्वर्ग और पृथ्वी तेरी महिमा से परिपूर्ण है! स्वर्ग में प्रभु की जय ! धन्य हैं वे जो प्रभु के नाम पर आते हैं ! स्वर्ग में प्रभु की जय !


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