पूण्य़ बृहस्पतिवार की पारिवारिक धर्मविधि

कुछ अनुदेशः

1. रात्रि का भोजन जल्दी तैयार कर लें ।

2. अंतिम ब्यालु की यादगार मनाने के लिए यदि हो सके तो एक बडे आकार का ब्रेड या रोटी रखें।

3. अच्छा होगा कि शाम 6:00 बजे के पहले परिवार के सभी सदस्य नहा धोकर प्रार्थना के लिए तैयार हो जाएँ।

4. शाम 6.00 बजे प्रार्थना शुरू करें या फिर अपनी सुविधानुसार

प्रार्थना विधीः

क्रूस का चिह्न....

अग्रस्तवः हमें अपने प्रभु येसु ख्रीस्त के क्रूस पर गौरव करना चाहिए। उन्हीं में हमारा कल्याण, जीवन और पुनरूत्थान हैं, उन्हीं के द्वारा हमारा उद्धार और मुक्ति हुई है।

(ख्रीस्त लहू का, आत्मादान की राह बताकर जैसा कोई उचित गीत गाया जा सकता है। )

हे पिता हमारे.....

प्रणाम मरिया.....

प्रेरितो का धर्मसार....

परिवार का मुखियाः आईये हम प्रार्थना करें

हे, ईश्वर हम उस ब्यालु की यादगार में इकट्ठे हुए हैं, जिसमें तेरे पुत्र अपने प्राण निछावर करने के पूर्व कलीसिया के लिए एक नया और शाश्वत बलिदान दे गए। हमारे शाश्वत पुरोहित प्रभु येसु ने हमारे लिए किसी बछडे अथवा मेमने को नहीं परन्तु स्वयं को एक बली बनाकर क्रूस की वेदी पर बलिदान किया। उन्होंने आज उसी बलिदान को हमें एक संस्कार के रूप में प्रदान किया और इस महान बलिदान के अनुष्ठान हेतु उन्होंने पुरोहिताई संस्कार की स्थापना की। येसु ने अपने शिष्यों के साथ भोजन करते समय अपने शिष्यों के पैर धोकर उन्हें यह कहते हुए प्रेम और सेवा का नया पाठ पढाया - जिस प्रकार से मैं ने तुम लोगों को प्यार किया, उसी प्रकार तुम भी एक दूसरे को प्यार करो।

हे परम पिता तेरे इन सभी अमूल्य दानों के लिए हम आज तेरा धन्यवाद करते हैं और तुझसे प्रार्थना करते हैं कि तू हमारे हृदयों में तेरे पुत्र के शरीर और रक्त के प्रति गहरी भक्ति, आस्था व विश्वास जाग्रत कर। तेरी कलीसिया और विशेष करके हमारा परिवार पवित्र यूखरिस्त में भाग लेने में कभी उदासिनता न बरतें। जब भी अवसर मिलें, हम पवित्र यूखरिस्तीय बलिदान में भाग लें व प्रभु येसु के शरीर से सदा संयुक्त रह सकें। तेरे इस दिव्य संस्कार में बारंबार भाग लेने से हम लोगों में प्रेम और जीवन उमडता रहे। साथ ही पवित्र यूखरिस्तीय बलिदान को सम्पन्न करने वाले सभी पुरोहितों के लिए हम प्रार्थना करते हैं। प्रभु, तूने उन्हें अपनी पुरोहिताई के भागिदार बनाया हैं, उन्हें सदा अपने जैसी पवित्रता और अपने वचन के प्र्रति उत्सुकता प्रदान कर ताकि वे तेरी ही तरह अपनी प्रजा की सारी आध्यात्मिक ज़रूरतों को पुरा करते रहें व हमें तुझसे जुडे रहने में मदद कर सकें। प्रभु जी! आज तूने अपने शिष्यों के पैर धोए व उन्हें प्रेम व सेवा का नया पाठ पढाया, तेरे शिष्य होने के नाते हमें दूसरों की मदद के लिए आगे आने की कृपा प्रदान कर ताकि हम हमारे आस-पास जितने भी ज़रूरतमंद लोग हैं उनकी हम मदद व सेवा कर सकें। हमारे परिवार में तेरा प्रेम सदा बना रहे। हम आपस में एक शरीर बनकर एक दूसरों की भलाई के लिए जिना सिखें। ऐसी कृपा प्रदान कर हमारे प्रभु येसु ख्रीस्त के द्वारा, आमेन।

सब : आमेन।

(अन्य प्रार्थनाएँ जोडी जा सकती हैं)

पहला पाठ - निर्गमन ग्रंथ 12:1 से 8 और 11 से 14 पढ़ें।

(मुक्ति दिलाए येसु नाम या कोई और उचित भजन गाएँ)

दूसरा पाठ - कुरिंथियों के नाम पहला पत्र 11: 23-26 पढ़ें।

जयघोष - प्रभु कहते हैं, मैं तुम लोगों को एक नयी आज्ञा देता हूँ । जैसे मैंने तुम्हें प्यार किया, वैसे ही तुम एक दूसरे को प्यार करो।

सुसमाचार- योहन 13:1-15 पढें।

(कुछ देर मौन प्रार्थना करें)

(जो उपदेश भेजा गया है उसे पढ़ें। अथवा जो ऑडियो अथवा विडियो डाउन-लोड किया है उसे सुनें।)

पैर धोने की विधि

परिवार में एक दूसरों के पैर धोना उचित होगा, (यद्यपि यह अनिवार्य नहीं है।) पैर धोने की विधी में परिवार के बड़े लोग छोटों के, और छोटे बड़ों के पैर धो सकते हैं।

मेल-मिलाप की विधिः

एक दूसरे को प्रेमभाव से क्षमा करें और यदि हो सके तो शब्दों में कह कर क्षमा माँगें। (माफी के लिए एक दूसरे को हाथ जोड़कर प्रणाम करें)।
क्रूस का चिह्न बनाकर प्रार्थना खत्म करें।
इसके बाद सब अपने भोजन कक्ष की ओर जायें।

अंतिम ब्यालु का भोज

भोजन के पहले की प्रार्थना

अगुआः बहुत समय पहले, इसी रात को ईश्वर की प्रजा, मिस्र की गुलामी से आजाद होकर प्रतिज्ञात देश की यात्रा पर निकल पड़ी थी। आज हम उस अतीत की याद करते हैं, जब इस्राएली लोगों ने अपनी दासता से आजाद होकर ईश्वर द्वारा प्रदत कनान देश में सुख-समृद्धी के जीवन में प्रवेश के लिए प्रस्थान किया था। उन्होंने जो अनुभव किया, उसकी वे हर साल यादगार मानते हैं, और अपने बच्चों को, साल दर साल इसके बारे में बताते हैं। पीढ़ी दर पीढ़ी से चली आ रही इस परंपरा का वहन करते हुए आज हम भी वही कहानी दुहराते हैं। और उससे बढ़कर हमारे प्रभु येसु ख्रीस्त ने हमारी मुक्ति हेतु अपने क्रूस, बलिदान के पहले आज के इस भोज में हमें अपना शरीर और रक्त प्रदान किया। पवित्र पुरोहिताई संस्कार की स्थापना की व हमें एक दूसरों की प्रेमपूर्ण सेवा करने का पाठ पढाया। आज का यह भोजन करते समय हम मुक्ति के लिए प्रार्थना करें कि मुक्तिदाता प्रभु हम सबों को सब प्रकार के पापों, रोगों, महामारियों, व शैतानी की सब प्रकार की ताकतों व बंधनों से छुटकारा व मुक्ति प्रदान करें।

(अपने दोनों हाथों को स्वर्ग की ओर उठा कर)

धन्य है तू विश्व के प्रभु ईश्वर, तेरी ही दया से हमें हमारे दैनिक जीवन का भोजन मिलता है। यह भोजन जो हम अभी तेरी दया से ग्रहण करने वाले हैं, यह पृथ्वी की उपज और मनुष्यों के परिश्रम का फल है। अन्न उपजाने वाले किसान, इस भोजन को बनाने वाले सब लोग और हम जो इसे ग्रहण करने जा रहे हैं सबों पर तेरी आशिष उतरे व सदा सर्वदा बनी रहे।

सब: आमेन।

(तब परिवार का मुख्या ब्रेड या रोटी तोडकर सब परिवार जन को उसका एक-एक टुकडा देवें।
उसके बाद परिवार के सभी सदस्य एक साथ मिलकर भोजन करें। सब भोजन खत्म करने के बाद, गेतसेमानी बारी में येसु का साथ देने के लिए रोजरी माला विनती करें
परिवार के मुखिया के द्वारा आशिष की प्रार्थना से प्रार्थना विधी का अंत करें।)

अंतिम आशिष

मुखिया : प्रभु येसु, जो हमारे लिए क्रूस पर मरण तक आज्ञाकारी बनें, हमें इस रात को और सदा सर्वदा संभाले व अपनी आशिष प्रदान करें।

सबः आमेन।

मुखिया : पिता पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम पर।

सब : आमेन।



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