1प्रभु ने मूसा को आज्ञा दी, 2''मुझे सब पहलौठे बच्चों को समर्पित कर देना। इस्राएली लोगों के सब पहलौठे बच्चे, चाहे वे मनुष्यों के हों या पशुओं के, मेरे ही हैं।'' 3मूसा ने लोगों से कहा, ''यह दिन स्मरण रखना। इसी दिन तुम अपनी दासता के घर, मिस्र से निकल कर बाहर आये हो, क्योंकि प्रभु ने अपने बाहुबल से तुम्हें उस स्थान से बाहर निकाला है। इसलिए तुम कोई ख़मीरी रोटी मत खाना। 4अबीब के महीने में आज के दिन तुम बाहर आये। 5प्रभु तुम्हें कनानियों, हित्तियों, अमोरियों, हिव्वियों और यबूसियों के देश ले जायेगा, जिसे प्रभु ने तुम्हारे पुरखों को देने के लिए शपथपूर्वक वचन दिया था उस देश में, जहाँ दूध और मधु की नदियाँ बहती है। वहाँ तुम इसी महीने में यह पर्व मनाओगे। 6तब सात दिन तक तुम बेखमीर रोटी ही खाओगे और सातवें दिन प्रभु के आदर में एक उत्सव मनाओगे। 7उन सातों दिनों में बेख़मीर रोटी ही खायी जायेगी। न तो तुम्हारे पास ख़मीरी रोटी होगी और न तुम्हारे सीमान्तों में ही। 8इस दिन तुम लोग अपने-अपने पुत्रों को इस प्रकार समझाओगे : जिस दिन मैं मिस्र से बाहर आया, प्रभु ने मेरे लिए जो कार्य किया, उसकी स्मृति के लिए यह पर्व मनाया जाता है। 9प्रभु बल प्रदर्शन द्वारा तुम को मिस्र से निकाल लाया। यह मानो तुम्हारे हाथ में एक चिह्न और तुम्हारी आँखों के बीच एक स्मारक होगा, जिससे तुम निरन्तर प्रभु की संहिता की चर्चा करो। 10इसलिए तुम प्रतिवर्ष निश्चित समय पर इस आदेश का पालन करते रहोगे। 11''फिर जब प्रभु तुम्हें कनानियों के देश पहुँचा दें और उसे तुम्हें दे दें जैसा उसने तुम्हें और तुम्हारे पुरखों को शपथ पूर्वक वचन दिया था, 12तब तुम अपने सब पहलौठे बच्चों को प्रभु को समर्पित करोगे। तुम्हारे पशुओं के सब पहलौठे बच्चे भी प्रभु के होंगे। 13तुम गधे के प्रत्येक पहलौठे बच्चे को मेमने से छुड़ाओगे। यदि तुम ऐसा नहीं करना चाहोगे, तो उसकी गर्दन तोड़ दोगे। तुम अपने, अर्थात् मनुष्यों के प्रत्येक पहलौठे पुत्र को छुड़ाओगे। 14जब भविष्य में तुम्हारा पुत्र तुमसे पूछे कि इसका क्या अर्थ है तो उसे यह बताना प्रभु ने अपने भुजबल से हमें दासता के घर, मिस्र से बाहर निकाला था। 15जब फिराउन हठपूर्वक हमें निकलने नहीं देता था, प्रभु ने मिस्र देश के प्रत्येक पहलौठे बच्चे को, चाहे मनुष्य का हो या पशु का, मार डाला था। इसलिए हम प्रभु को सब पहलौठे बच्चों को अर्पित करते है और उन्हें छुड़ा लेते है। 16प्रभु बल-प्रदर्शन द्वारा तुमको मिस्र से निकाल लाया था - यह मानो तुम्हारे हाथों में एक चिह्न और तुम्हारे मस्तक पर एक स्मारक होगा। 17जब फिराउन ने लोगों को जाने दिया, तब ईश्वर उन्हें फिलिस्तियों के देश के मार्ग से होकर नहीं ले गया, यद्यपि वही सीधा मार्ग था। ईश्वर ने सोचा कि कहीं ऐसा न हो कि लोग युद्ध के डर से पछताने लगें और फिर मिस्र लौट जाये। 18इसलिये ईश्वर उन लोगों को निर्जन भूमि के मार्ग से घुमाकर लाल समुद्र की ओर ले गया, इस्राएली मिस्र देश के बाहर अस्त्र-शस्त्र के साथ निकले। 19मूसा अपने साथ यूसुफ़ का शव भी ले गया क्योंकि यूसुफ़ ने इस्राएलियों को यह शपथ खिलायी थी कि जब ईश्वर तुम्हारी सहायता करने आएगा तब तुम यहाँ से मेरा शव साथ ले जाओगे। 20सुक्कोत से आगे जाकर उन्होनें निर्जन प्रदेश के किनारे के एताम में अपने तम्बू खडे किये। 21प्रभु दिन में उन्हें रास्ता दिखाने के लिए बादल के खम्भे के रूप में और रात को उन्हें प्रकाश देने के लिए अग्नि-स्तम्भ के रूप में आगे-आगे चलता था, जिससे वे दिन और रात में भी यात्रा कर सके। 22दिन में बादल का खम्भा और रात में अग्नि स्तम्भ लोगों के सामने बराबर बना रहा।