1मिस्र देश से निकलने के ठीक तीन महीने बाद इस्राएली सीनई की मरुभूमि पहुँचे। 2वे रफीदीम से चले थे और उन्होंने सीनई की मरुभूमि पहुँच कर पहाड़ के सामने ही पड़ाव डाला। 3मूसा ईश्वर से मिलने के लिए पर्वत पर चढ़ा और ईश्वर ने वहाँ उससे कहा, ''तुम याकूब के घराने से यह कहोगे और इस्राएल के पुत्रों को यह बता दोगे- 4तुम लोगों ने स्वयं देखा है कि मैंने मिस्र के साथ क्या-क्या किया और मैं किस तरह तुम लोगों को गरुड़ के पंखों पर बैठा कर यहाँ अपने पास ले आया। 5यदि तुम मेरी बात मानोगे और मेरे विधान के अनुसार चलोगे, तो तुम सब राष्ट्रों में से मेरी अपनी प्रजा बन जाओगे; क्योंकि समस्त पृथ्वी मेरी है। 6तुम मेरे लिए याजकों का राजवंश तथा पवित्र राष्ट्र बन जाओगे। यही सन्देश इस्राएल के पुत्रों को सुनाओ।'' 7मूसा ने लौट कर प्रजा के नेताओं को बुलाया और जो कुछ प्रभु ने उस से कहा था, वह सब उनके सामने प्रस्तुत किया। 8सब लोगों ने एक स्वर से यह उत्तर दिया, ''ईश्वर जो कुछ कहता है, हम वह सब पूरा करेंगे।'' 9प्रभु ने मूसा से कहा, ''मैं एक काले बादल में तुम्हारे पास आ रहा हूँ, जिससे ये लोग मुझे तुम्हारे साथ बातें करता हुआ सुनें और तुम में सदैव अटल विश्वास करें।'' मूसा ने प्रभु को लोगों का उत्तर सुना दिया। 10प्रभु ने मूसा से कहा, ''तुम लोगों के पास जा कर आदेश दो कि वे आज और कल अपने को पवित्र करें और अपने वस्त्र धो लें। 11वे परसों के लिए अपने को तैयार करें, क्योंकि परसों प्रभु सभी लोगों के सामने सीनई पर्वत पर उतरेगा। 12तुम लोगों के लिए चारों तरफ एक सीमा निश्चित कर दोगे और उन से कहोगे, ''ध्यान रखो, पर्वत पर कोई नहीं चढ़े और न उसकी तलहटी तक पहुँचे। जो पर्वत का स्पर्ष करेगा, वह मारा जायेगा। 13कोई व्यक्ति दोशी का स्पर्ष नहीं करेगा। वह पत्थरों या तीरों से मारा जायेगा। चाहे वह पशु हो, चाहे मनुष्य, वह जीवित नहीं रह सकेगा। जब नरसिंगे का शब्द बहुत देर तक सुनाई देगा, तब वे पहाड़ पर चढ़ सकेंगे। 14इस पर मूसा पर्वत से उतर कर लोगों के पास आया और उन्हें पवित्र होने को कहा और उन्होंने अपने कपड़े धो लिये। 15तब उसने लोगों से कहा, ''तीसरे दिन तैयार रहोगे। स्त्री का स्पर्ष नहीं करोगे।'' 16तीसरे दिन प्रातःकाल बादल गरजे, बिजली चमकी, पर्वत पर काले बादल छा गये और तुरही का प्रचण्ड निनाद सुनाई पड़ा-शिविर में सभी लोग काँपने लगे। 17तब मूसा ईश्वर से भेंट करने के लिए लोगों को शिविर से बाहर ले गया और वे पहाड़ के नीचे खडे हो गये। सीनई पर्वत धुएँ से ढका हुआ था, क्योंकि ईश्वर अग्नि के रूप में उस पर उतरा था। 18धुआँ भट्ठी के धुएँ की तरह ऊपर उठ रहा था और सारा पहाड़ जोर से काँप रहा था। 19तुरही का निनाद बढ़ता जा रहा था। मूसा बोला और ईश्वर ने उसे मेघगर्जन में से उत्तर दिया। 20ईश्वर सीनई पर्वत की चोटी पर उतरा और उसने मूसा को पर्वत की चोटी पर बुलाया और मूसा ऊपर गया। 21प्रभु ने मूसा को आज्ञा दी, ''नीचे जाकर लोगों को चेतावनी दो कि वे प्रभु के दर्शन करने के लिए आगे नहीं बढ़े, नहीं तो उन में बहुतों की मृत्यु हो जायेगी। 22वे याजक भी, जो प्रभु के पास आया करते हैं, अपने को पवित्र कर लें, जिससे ईश्वर उन पर क्रोध न करे।'' 23मूसा ने प्रभु से कहा, ''लोग सीनई पर्वत पर नहीं आ सकते, क्योंकि तूने स्वयं हम लोगों को कड़ी चेतावनी दी कि पर्वत के चारों ओर एक सीमा बनाकर उसे पवित्र बनाये रखो।'' 24तब प्रभु ने उस से कहा, ''नीचे जाओ और हारून को ले कर फिर ऊपर आ जाओ। लेकिन याजक और लोग प्रभु के पास पहुँचने के लिए ऊपर नहीं आयें। कहीं वह उन पर क्रोध न करे।'' 25इस पर मूसा लागों के पास नीचे गया और उसने उन्हें यह बात समझायी।