1''निवासस्थान को ऐसे दस परदों से बनवाओं, जो बटी हुई छालटी और नीले, बैंगनी और लाल रंग के कपड़ों से बने हों और जिन पर एक कुशल शिल्पकार द्वारा केरूबों के चित्र कढ़े हों। 2हर परदें की लम्बाई अट्ठाइस हाथ और चौड़ाई चार हाथ हो। हर परदा एक ही नाप का हो। 3पाँच परदे एक दूसरे से जुड़वाओं और इसी प्रकार दूसरे पाँच परदे भी। 4दोनों सामने वाले परदों के किनारे पर नीले रंग के फन्दे लगवाओं; 5एक परदे में पचास फन्दे और दूसरे में भी पचास फंदे। वे फन्दे एक दूसरे के आमने-सामने हों। 6फिर, सोने के पचास अँकुड़े बनवाओं और उन अँकुड़ों से दोनों परदों को मिलाओ, जिससे निवासस्थान एक इकाई बन जाये। 7''निवासस्थान को ढकने के लिए तुम बकरी के बालों के परदे बनवाओ; ग्यारह परदे बनवाओ। 8हर परदे की लम्बाई तीस हाथ और चौड़ाई चार हाथ हो। ग्यारह परदे एक ही नाप के हों। 9उन परदों में पाँच को जोड़ कर एक परदा बनवाओं और शेष छः परदों को भी जोड़ कर एक दूसरा परदा बनवाओ। छठे परदे को तम्बू के सामने मोड़ कर दुहरा कर दो। 10दोनों सामने वाले परदों के किनारे पर पचास फन्दे बनवाओं। 11फिर काँसे के पचास अँकुड़े बनवाओं। उन अँकुड़ों में फन्दे लगवाओं और तम्बू के दोनों भाग इस प्रकार जोड़ दो कि वह एक इकाई बन जाये। 12परदों का वह भाग जो बचा है, उसका आधा भाग निवास के पीछे लटकता रहने दो 13और परदों की लम्बाई में बचा हुआ भाग निवास के अगल-बगल ढकने के लिए, एक-एक हाथ लटकता छोड़ दो। 14तम्बू के लिए तुम मेढ़े के सीजे चमड़े का एक आवरण बनवाओ और फिर उसके ऊपर लगाने का सूस के चमड़े का एक और आवरण। 15निवास के लिए बबूल की लकड़ी से चौखटें बनवा कर खड़ा कर दो। 16हर एक की लम्बाई दस हाथ और चौड़ाई डेढ़ हाथ हो। 17जोड़ने के लिए प्रत्येक चौखट में दो चूलें हों। निवास की सब चौखटें उसी तरह बनवाओ। 18निवास के दक्षिणी किनारे के लिए बीस चौखटें बनवाओ और 19उनके नीचे चाँदी की चालीस कुर्सियाँ, अर्थात् एक-एक चौखट के नीचे उसकी दोनों चूलों के लिऐ दो कुर्सियाँ। 20निवास की दूसरी ओर, अर्थात् उत्तरी किनारे के लिए भी बीस चौखटें बनवाओ। 21साथ-साथ चाँदी की चालीस कुर्सियाँ, प्रत्येक चौखट के नीचे दो कुर्सियाँ, बनवाओ। 22निवास के पीछे, अर्थात् पश्चिमी ओर के लिए छह और चौखटें बनवाओ। 23निवास के पीछे के भाग के कोनों के लिए दो चौखटें बनवाओ। 24वे दुहरी हों, नीचे की ओर कुछ अलग हों और ऊपर एक कड़े पर जुड़ी हों दोनों कोनों पर ऐसा ही होगा। 25इस तरह आठ चौखटें होगी, जिनके नीचे चाँदी की सोलह कुर्सियाँ होंगी, प्रत्येक चौखट के नीचे दो कुर्सियाँ। 26''बबूल की लकड़ी के छड़ बनवाओ। निवास की एक ओर की चौखटों के लिए पाँच छड़ 27और निवास की दूसरी ओर की चौखटों के लिए पाँच छड़; निवास के पिछले भाग, अर्थात् पश्चिमी किनारे की चौखटों के लिए भी पाँव छड़। 28बीच वाला छड़ चौखटों के बीचों-बीच एक सिरे से दूसरे सिरे तक पहुँचता हो। 29चौखटों को सोने से मढ़वाओ। छड़ों के घरों के लिए सोने के कड़े बनवा कर छड़ों को भी सोने से मढ़वाओ। 30इस प्रकार निवास को ठीक उसी नमूने के अनुसार बनवाओ, जो तुम को पर्वत पर दिखाया गया है। 31''फिर नीले, बैंगनी और लाल रंग के कपड़ों से और बटी हुई छालटी से एक अन्तरपट बनवाओ, जिस में एक कुशल शिल्पकार द्वारा केरूबों के चित्र कढ़े हों। 32उसे सोने के मढ़े बबूल की लकड़ी के चार खूँटों में लटकाओ। वे चाँदी की चार कुर्सियों पर लगे हों तथा सोने के अँकुड़ों में फँसे हों। 33अन्तरपट को अँकुड़ों द्वारा लटकाओ और अन्तरपट के पीछे विधान की मंजूषा रखवाओ। वह अन्तरपट परम-पवित्र स्थान से पवित्र स्थान को अलग करेगा। 34परमपवित्र स्थान में विधान की मंजूषा पर छादन-फलक को रखवाओ। 35अन्तरपट के बाहर, निवासस्थान के उत्तरी भाग में मेज़ रखवाओं और मेज़ के सामने, निवास के दक्षिणी भाग में, दीपवृक्ष रखवाओ। 36निवास के द्वार के लिए नीले, बैंगनी और लाल रंग के कपड़ों का तथा बटी हुई छालटी का एक परदा बनवाओ, जिस में बेलबूटे कढ़े हों। 37इस परदे को लटकाने के लिए बबूल की लकड़ी के सोने से मढ़े पाँच खूँटे बनवाओं। उनके अँकुड़े सोने के हों और उनके लिए काँसे की पाँच कुर्सियाँ ढलवाओ।