1''मेरे याजक बनने के लिए उनका अभिषेक इस प्रकार हो। यह सामग्री तैयार करवाओ - एक बछड़ा, दो अदोष मेढ़े, 2गेहूँ के मैदे से बनी हुई बेखमीर रोटियाँ, तेल-मिश्रित बेखमीर पूरियाँ और तेल से चुपड़ी हुई चपातियाँ। 3उन्हें एक टोकरी में रखवाओ। बछड़े और मेढों के साथ वह टोकरी मेरे पास लाओ। 4इसके बाद हारून और उसके पुत्रों को दर्शन-कक्ष के द्वार पर पहुँचाओ और उन्हें जल से नहलाओ। 5फिर वस्त्र ले कर हारून को कुरता, अँगरखा, एफ़ोद और वक्षपेटिका पहनाओ। कलात्मक ढंग से बने कमरबन्द से एफ़ोद को हारून पर बाँधो। 6उसके सिर पर पगड़ी रखो और उस पर स्वर्ण-पुष्प लगाओ। 7अभ्यंजन का तेल ले कर उसे उसके सिर पर उँड़ेलते हुए उसका अभिषेक करो। 8उसके पुत्रों को अपने पास बुलाओ और उन्हें कुरते पहनाओ। 9हारून और उसके पुत्रों के शरीर पर कमरबन्द बाँधों और उन को पगड़ी पहनाओ। एक चिरस्थायी विधान द्वारा उन्हें याजक का पद प्राप्त होगा। तुम इस प्रकार हारून और उसके पुत्रों का अभिषेक करोगे। 10''तब बछड़ा दर्शन-कक्ष के सामने ले आओ हारून और उसके पुत्र बछड़े के सिर पर अपने हाथ रखेंगे; 11फिर दर्शन-कक्ष के द्वार पर प्रभु के सामने इस बछड़े की बलि चढ़ाओ। 12बछड़े के रक्त से थोड़ा ले कर अँगुली से उसे वेदी के सींगों पर लगाओं और शेष सब रक्त वेदी के निचले भाग पर उँड़ेलो। 13अँतड़ियों के आसपास की सारी चरबी, जिगर की झिल्ली, दोनों गुरदे और उन पर की चरबी - यह सब वेदी पर रख कर जलाओं।'' 14बछड़े का मांस, उसकी खाल और उसका गोबर शिविर के बाहर आग में जलाओ, क्योंकि यह प्रायश्चित का बलिदान है। 15''एक मेढ़ा ले आओ। हारून और उसके पुत्र मेढे के सिर पर अपने हाथ रखेंगे। 16इसके बाद मेढे की बलि चढ़ाओं और उसका रक्त वेदी के चारों ओर छिड़को। 17मेढे के टुकडे-टुकड़े कर दो। उसकी अँतड़ियाँ और उसके पैर धो कर उन्हें दूसरे टुकड़ों और सिर के साथ रखो। 18इसके बाद पूरा-का-पूरा मेढ़ा वेदी पर जला दो। यह प्रभु के लिए एक होम बलि एक सुगन्धयुक्त चढ़ावा है, जो उसे ग्राह्य है। 19''इसके बाद दूसरा मेढ़ा ले आओ। हारून और उसके पुत्र उस मेढ़े के सिर पर भी अपने हाथ रखेंगे। 20इसके बाद मेढ़े की बलि चढ़ाओ और उसके रक्त से थोड़ा लेकर हारून और उसके पुत्रों के दाहिने कान की लौ पर लगाओ। उसे उनके दाहिने हाथों के अँगूठों और दाहिने पाँवों के अँगूठों पर भी लगाओ। शेष रक्त वेदी के चारों ओर छिड़को। 21वेदी पर छिड़के हुए रक्त और अभ्यंजन तेल से कुछ ले कर हारून और उसके वस्त्रों तथा उसके पुत्रों और उसके पुत्रों के वस्त्रों पर छिड़को। इस प्रकार वह, उसके वस्त्र, उसके पुत्र और उनके वस्त्र पवित्र हो जायेंगे। 22''तब अभिषेक के मेढे की चरबी लो, अर्थात् उसकी पूँछ, अँतड़ियों के आसपास की चरबी, जिगर की झिल्ली, दोनों गुरदे और उन पर की चरबी तथा दाहिनी जाँघ। 23फिर प्रभु के सामने रखी टोकरी से, जिस में बेखमीर रोटियाँ हैं, एक रोटी, एक तेल-मिश्रित पूरी और एक चपाती निकालो। 24यह सब हारून और उसके पुत्रों के हाथों में रखों और वे उसे प्रभु के सामने हिला-हिला कर अर्पित करेंगे। 25फिर उन सब चीजों को उनके हाथों से लेकर होम के साथ वेदी पर जलाओ। यह होम-बलि है, एक सुगन्धयुक्त चढ़ावा, जो प्रभु को ग्राह्य है। 26हारून के अभिषेक में प्रयुक्त मेढे का सीना ले कर उसे प्रभु के सामने हिला-हिला कर अर्पित करो। यह तुम्हारा भाग होगा। 27मेढ़े का सीना और उसकी जाँघ अलग करो। 28यह इस्राएलियों द्वारा प्रभु को अर्पित बलिदानों का वह भाग है, जिसे वे हारून और उसके पुत्रों को दिया करें। 29हारून के पवित्र वस्त्र बाद में उसके पुत्रों को मिलेंगे। उन्हें पहन कर उनका अभिषेक किया जायेगा और उन्हें यज्ञाधिकार प्रदान किया जायेगा। 30जब वह पुत्र, जो उसके स्थान पर याजक बनेगा, पवित्र स्थान में सेवा करने के लिए दर्शन-कक्ष में प्रवेश करेगा, तो उन्हें सात दिन तक धारण करेगा। 31तुम अभिषेक के मेढ़े के माँस को एक पवित्र स्थान में पकाओ। 32दर्शन-कक्ष के द्वार पर हारून और उसके पुत्र मेढ़े का मांस और टोकरी में रखी हुई रोटियाँ खायेंगे। 33वे अपने अभिषेक और अधिकार-प्रदान के लिए आयोजित प्रायश्चित-विधि में प्रयुक्त पदार्थों को खायें। वे पवित्र हैं, इसलिए अनधिकारी उन्हें नहीं खा सकता। 34यदि अभिषेक के मेढ़े मांस या रोटी में से सबेरे तक कुछ बच जाये तो वह बचा हुआ भाग आग में जला दिया जाये। वह पवित्र है उसे कोई नहीं खा सकता। 35मैंने तुम्हें जैसा आदेश दिया है, ठीक उसी तरह हारून और उसके पुत्रों के साथ करों। तुम सात दिन में उनके अभिषेक की क्रिया पूरी करो। 36(३६-३७) प्रत्येक दिन पाप के प्रायश्चित के लिए एक बछड़े की बलि चढाओ। वेदी को प्रतिष्ठित करने के लिए सात दिन तक प्रायश्चित की बलि चढाओ और सात बार वेदी का अभ्यंजन करो। इस प्रकार वह वेदी परमपवित्र बन जायेगी। जो कुछ वेदी का स्पर्श करेगा, वह पवित्र हो जायेगा। 38तुम नियमित रूप से वेदी पर यह बलिदान चढाओं - प्रति दिन दो मेमने, 39एक मेमना प्रातः और एक मेमना सन्ध्या को। 40पहले मेमने के साथ एक सेर जैतून के तेल से सना हुआ दो सेर मैदा चढाओं और अर्घ के रूप में एक सेर अंगूरी। 41दूसरा मेमना संध्या में चढाओ। उसके साथ प्रातःकाल के समान ही अन्न-बलि और अर्घ चढाओ। वह एक सुगन्धयुक्त होम बलि है, जो प्रभु को ग्राह्य है। 42दर्शन-कक्ष के द्वार पर, जहाँ मैं तुमसे मिला करता हूँ और जहाँ मैं तुम्हारे साथ बातें करता हूँ वहाँ प्रभु के सामने नित्य-प्रति, पीढ़ी-दर-पीढ़ी यह होम बलि चढ़ाई जाये। 43वहाँ मैं इस्राएलियों से मिलने आऊँगा और वह स्थान मेरी महिमा के कारण पवित्र होगा। 44मैं दर्शन-कक्ष और वेदी को पवित्र करूँगा। मैं हारून और उसके पुत्रों को भी पवित्र करूँगा। जिससे वे मेरे याजक हो सकें। 45मैं इस्राएलियों के बीच रहूँगा और मैं उनका ईश्वर होऊँगा। 46वे जान जायेंगे कि मैं ही प्रभु, उनका वह ईश्वर हूँ, जो उन्हें मिस्र देश से इसलिए निकाल लाया है, जिससे मैं प्रभु, उनका ईश्वर, उनके बीच निवास करूँ।