1प्रभु ने बसलएल, ओहोलीआब और सब शिल्पकारों को कौशल और ज्ञान प्रदान किया है, जिससे वे पवित्र-स्थान का निर्माण कर सकते हैं। उन्हें प्रभु के आदेश के अनुसार सब कुछ बनाना है। 2तब मूसा ने बसलएल, ओहोलीआब और उन सब शिल्पकारों को बुलाया, जिन्हें प्रभु ने कौशल प्रदान किया था और जो आने और काम करने के लिए तैयार थे। 3मूसा ने उन्हें वह सब सौंपा, जो इस्राएली पवित्र-स्थान के निर्माण के लिए लाये थे। प्रतिदिन सबेरे लोग स्वेच्छा से चन्दा देने आते थे। 4यह देख कर पवित्र-स्थान के निर्माण में लगे सब शिल्पकार काम छोड़ कर मूसा के पास आ कर 5बोले, ''जो काम प्रभु ने सम्पन्न करने का आदेश दिया, उसके लिए लोग जरूरत से ज्यादा सामान ला रहे हैं।'' 6यह सुन कर मूसा ने शिविर भर में यह घोषणा करने का आदेश दिया : ''कोई पुरुष या स्त्री पवित्र-स्थान के लिए अब कोई चन्दा नहीं लाये।'' इसलिए लोग और सामान नहीं लाये, 7क्योंकि काम पूरा करने के लिए वे जरूरत से ज्यादा सामान ले आये थे। 8सब से निपुण शिल्पकारों ने बटी हुई छालटी और नीले, बैंगनी और लाल रंग के कपड़ों से निवास के दस परदे बनाये, जिन पर केरूबों के चित्र कढ़े थे। 9हर परदे की लम्बाई अट्ठाईस हाथ और चौड़ाई चार हाथ थी। हर परदा एक ही नाप का था। 10उन्होंने पाँच परदों को एक दूसरे से जोड़ा और इसी प्रकार दूसरे पाँच को भी। 11उन्होंने सामने वाले परदों के किनारे पर नीले रंग के फन्दे बनाये-एक परदे में पचास फन्दे और दूसरे में भी पचास फन्दे। 12ये फन्दे एक दूसरे के आमने-सामने थे। 13तब उन्होंने सोने के पचास अँकुड़े बनाये और उन अँकुड़ों से दोनों परदों को मिलाया, जिससे निवासस्थान एक इकाई बन गया। 14निवास को ढकने के लिए उन्होंने बकरी के बालों के ग्यारह परदे बनाये। 15हर परदे की लम्बाई तीस हाथ और चौड़ाई चार हाथ थी ग्यारहों परदे एक ही नाप के थे। 16उन्होंने उन परदों में पाँच को जोड़ कर एक परदा बनाया और शेश छह परदों को भी जोड़ कर एक दूसरा परदा बनाया। 17उन्होंने दोनों सामने वाले परदों के किनारे पर पचास फन्दे लगाये। 18फिर उन्होंने काँसे के पचास अँकुड़े बनाये और उन्हें इस प्रकार जोड़ा कि तम्बू एक इकाई बन गया। 19उन्होंने तम्बू के लिए मेढ़े के सीझे चमड़े का एक आवरण बनाया और फिर उसके ऊपर सूस के चमड़े का एक आवरण। 20निवास के लिए उन्होंने बबूल की लकड़ी की चौखटें बना कर उन्हें खड़ा किया। 21हर एक चौखट की लम्बाई दस हाथ और चौड़ाई डेढ़ हाथ थी। 22उन्हें जोड़ने के लिए प्रत्येक चौखट में दो चूलें थी। निवास की सब चौखटें इसी तरह बनायी गयीं। 23निवास के दक्षिण किनारे के लिए उन्होंने बीस चौखटें बनायीं 24और उनके नीचे चाँदी की चालीस कुर्सियाँ, अर्थात एक-एक चौखट के नीचे उसकी दोनों चूलों के लिए दो कुर्सियाँ। 25निवास की दूसरी ओर, अर्थात् उत्तरी किनारे के लिए भी उन्होनें बीस चौखटें बनायीं ; 26साथ-साथ चालीस चाँदी की कुर्सियाँ, प्रत्येक चौखट के नीचे दो कुर्सियाँ। 27निवास के पीछे, अर्थात् पश्चिमी ओर के लिए उन्होंने छः चौखटें बनायीं। 28उन्होंने निवास के पीछे के भाग के लिए दो चौखटें बनायीं। 29वे दुहरी थीं, नीचे की ओर कुछ अलग और ऊपर एक कड़े पर जुड़ी थीं। दोनों कोनों पर ऐसा ही किया गया। 30इस तरह आठ चौखटें थीं, जिनके नीचे चाँदी की सोलह कुर्सियाँ थी, प्रत्येक चौखट के नीचे दो कुर्सियाँ। 31उन्होंने बबूल की लकड़ी के छड़ भी बनाये - निवास की एक ओर की चौखटों के लिए पाँच छड़ और निवास की दूसरी ओर की चौखटों के लिए पाँच छड़; 32निवास के पिछले भाग, अर्थात् पश्चिमी किनारे के लिए पाँच छड़। 33बीच वाला छड़ चौखटों के बीचोंबीच एक सिरे से दूसरे सिरे तक पहुँचता था। 34उन्होंने चौखटों को सोने से मढ़ा। छड़ों के घरों के लिए उन्होंने सोने के कड़े बनाये और छड़ों को भी सोने से मढ़ा। 35उन्होंने नीले, बैंगनी और लाल रंग के कपड़ों से और बटी हुई छालटी से एक अन्तरपट बनाया, जिस में एक कुशल शिल्पकार ने केरूबों के चित्र काढ़े। 36उन्होंने उसे सोने से मढ़े बबूल की लकड़ी के चार खूँटों में लटकाया। वे खूँटें चाँदी की चार कुर्सियों पर खड़े थे और सोने के अँकुड़े में फँसे थे। 37निवास के द्वार के लिए उन्होंने नीले, बैंगनी और लाल कपड़े का तथा बटी हुई छालटी का एक परदा बनाया, जिस में बेलबूटे कढ़े थे। 38उसे लटकाने के लिए उन्होंने पाँच खूँटें और आवश्यक अँकुड़े बनाये। उन्होंने खूटों का ऊपरी भाग और उनके अँकुडे सोने से मढे और उनके लिए काँसे की पाँच कुर्सियाँ बनायीं।