1इस्राएली शिट्टीम में अपने पड़ाव डाले हुए थे। उस समय वे मोआबी स्त्रियों के साथ व्यभिचार करने लगे। 2उन स्त्रियों ने उन को अपने देवताओं की पूजा में आमन्त्रित किया। इस्राएलियों ने उनके देव प्रसाद खाये और उनके देवताओं को दण्डवत किया। 3इस प्रकार इस्राएली बाल-देवता की पूजा करने लगे और उनके विरुद्ध प्रभु का कोप भड़क उठा। 4प्रभु ने मूसा से कहा, ''उनके सब नेताओं को पकड़ कर प्रभु के सामने धूप में खूँटों पर लटका दो, जिससे प्रभु की क्रोधाग्नि इस्राएल पर से दूर हो।'' 5इस पर मूसा ने इस्राएलियों के न्यायाधीशों को यह आदेश दिया, ''तुम में प्रत्येक उन लोगों को मार डाले, जिन्होंने बाल-देवता, की पूजा की है।'' 6जब मूसा और इस्राएल का सारा समुदाय दर्शन-कक्ष के द्वार पर विलाप कर रहा था, तो लोगों के देखते ही एक इस्राएली पुरुष एक मिदयानी स्त्री को अपने घर ले गया। 7याजक हारून के पुत्र एलआजार के बेटे पीनहास ने उसे देखा। वह उठा और सभा छोड़ कर, हाथ में एक बल्लम लिये, उस इस्राएली पुरुष के पीछे-पीछे उसके घर के भीतरी भाग तक घुस आया। वहाँ उसने उन दोनों के - उस पुरुष और उस स्त्री के - शरीर में बल्लम भोंक दिया। 8इसके बाद इस्राएलियों के बीच फैली हुई महामारी दूर हो गयी। 9उस महामारी के कारण चौबीस हज़ार लोगों की मृत्यु हुई। 10प्रभु ने मूसा से कहा, 11''याजक हारून के पुत्र एलआज़र के पुत्र पीनहास ने इस्राएलियों पर से मेरा कोप दूर कर दिया, क्योंकि उसने इस्राएलियों के बीच मेरे लिए उत्साह का प्रदर्शन किया। इसलिए मैंने क्रुद्व होकर इस्राएलियों का सर्वनाश नहीं किया। 12उस से यह कहो कि मैं उसके साथ शान्ति-विधान निर्धारित करता हूँ। 13उस विधान के अनुसार उसे तथा उसके बाद उसके वंशजों को सदा याजक-पद प्राप्त होता रहेगा। उसने अपने ईश्वर के लिए उत्साह का प्रदर्शन किया और इस्राएलियों के लिए प्रायश्चित किया।'' 14मिदयानी स्त्री के साथ मारे गये इस्राएली पुरुष का नाम जिम्री था। वह सिमओन कुल के किसी घराने के मुखिया सालू का पुत्र था। 15मारी गयी मिदयानी स्त्री का नाम कोज़वी था। वह सूर की बेटी थी, जो मिदयानी के किसी कुल के एक घराने का मुखिया था। 16प्रभु ने मूसा से कहा, 17''मिदयानियों पर आक्रमण कर उन्हें मार दो, 18क्योंकि उन्होंने तुम्हारे साथ शत्रुओं का-सा व्यवहार किया, तुम्हारे विरुद्ध षड्यंत्र रचा और पओर की घटना और अपनी बहन कोज़बी के मामले में तुम को बहकाया। कोज़बी एक मिदयानी नेता की पुत्री थी, जिसका उस समय वध किया गया, जब पओर की घटना के कारण महामारी फैल गयी थी।''