1"कोई न तो अपने पिता की किसी पत्नी से विवाह कर सकता है और न वह अपने पिता की पत्नी का शील भंग कर सकता है। 2ऐसा कोई व्यक्ति प्रभु की धर्मसभा में सम्मिलित नहीं हो सकता है, जिसके अण्डकोष कुचले गये हैं या जिसका लिंग काटा गया है। 3कोई जारज और दसवीं पीढ़ी तक उसका कोई वंशज भी प्रभु की धर्मसभा में सम्मिलित नहीं हो सकता। 4कोई भी अम्मोनी, मोआबी या दसवीं पीढ़ी तक उनके वंशज प्रभु के समुदाय में सम्मिलित नहीं हो सकते। 5यह इसलिए कि उन्होंने मिस्र से तुम्हारे निकलते समय तुम्हें खाने-पीने के लिए कुछ नहीं दिया था और इसलिए भी कि उन्होंने मेसोपोतामिया से पतोर-निवासी बओर के पुत्र बिलआम को पैसा दे कर तुम्हें अभिशाप देने बुलाया था। 6किन्तु प्रभु, तुम्हारे ईश्वर ने बिलआम की इच्छा के अनुसार नहीं किया। प्रभु, तुम्हारे ईश्वर ने उसके अभिशाप को आशीर्वाद में बदल दिया था। प्रभु, तुम्हारे ईश्वर ने ऐसा इसलिए किया कि वह तुम को प्यार करता है। 7तुम जीवन भर उन लोगों के साथ शान्ति या अच्छा सम्बन्ध स्थापित करने का प्रयास मत करो। 8"तुम एदोमियों से घृणा नहीं करोगे, क्योंकि वे तुम्हारे भाई हैं। तुम मिस्रियों से घृणा नहीं करोगे, क्योंकि तुम उनके देश में प्रवासी के रूप में रह चुके हो। 9उनकी तीसरी पीढ़ी के वंशज प्रभु की धर्मसभा में सम्मिलित हो सकते हैं। 10"यदि तुम अपने शत्रुओं के विरुद्ध लड़ने जाओ और पड़ाव डालो, तो हर प्रकार की अशुद्धता से दूर रहो। 11तब यदि तुम्हारे साथ कोई ऐसा व्यक्ति हो जो रात में वीर्यपतन के कारण अशुद्ध हो गया हो, तो वह शिविर के बाहर जा कर वहाँ रहेगा। 12वह शाम को स्नान करेगा और सूर्यास्त के समय शिविर में लौटेगा। 13शिविर के बाहर ऐसा स्थान भी हो जहाँ तुम शौच के लिए जा सको। 14तुम अपने अस्त्र-षस्त्र के साथ एक खुरपी भी रखोगे जिस से तुम शौच के समय गड्ढा खोद कर मल ढक सको; 15क्योंकि प्रभु तुम्हारा ईश्वर तुम्हारी रक्षा करने और तुम्हारे शत्रुओं को तुम्हारे हाथ देने के लिए तुम्हारे शिविर में विचरता है। इसलिए तुम्हें शिविर को शुद्ध रखना चाहिए। ऐसा न हो कि वह तुम्हारे यहाँ कोई गन्दगी देख कर तुम से विमुख हो जाये। 16"यदि कोई दास तुम्हारे यहाँ शरण लें तो उसे स्वामी के हवाले मत करो। 17वह जहाँ चाहे अपनी पंसन्द के किसी नगर में निवास कर सकता है। तुम उस पर अत्याचार नहीं करोगे। 18"कोई इस्राएली पुरुष या स्त्री मन्दिर में होने वाले व्यभिचार के लिए अपने को अर्पित नहीं करेगी। 19अपनी मन्नत पूरी करने के उद्देश्य से कोई भी वेश्यावृत्ति या पुरुषगमन की कमाई प्रभु, अपने ईश्वर के मन्दिर में नहीं ला सकता; क्योंकि उसकी दृष्टि में दोनों घृणित है। 20तुम अपने भाइयों से सूद नहीं लोगे, न रूपये के लिए, न खाद्य पदार्थों के लिए और न किसी ऐसी चीज़ के लिए, जिसके लिए सूद लिया जाता है। 21तुम परदेशी से सूद ले सकते हो, परन्तु अपने भाई से तुम सूद नहीं ले सकते। ऐसा करने पर प्रभु, तुम्हारा ईश्वर उस देश में, जिसे तुम अपने अधिकार में करने जा रहे हो, तुम्हें अपने सब कार्यों में आशीर्वाद प्रदान करेगा। 22"यदि तुम प्रभु, अपने ईश्वर के लिए कोई मन्नत करते हो तो उसे पूर्ण करने में विलम्ब नहीं करोगे। नहीं तो प्रभु, तुम्हारा ईश्वर निस्सन्देह उसकी माँग करेगा और उसे पूरा नहीं करने पर तुम्हें दोष लगेगा। 23यदि तुम कोई मन्नत नहीं करते, तो इस में कोई दोष नहीं। 24तुम अपने मुँह से जो कहते हो, उसे अवश्य पूरा करो; क्योंकि तुमने स्वेच्छा से, अपने ही मुँह से प्रभु, अपने ईश्वर के लिए मन्नत की है। 25"तुम अपने पड़ोसी की दाखबारी जा कर वहाँ जितना चाहो, अंगूर खा सकते हो; किन्तु अपनी टोकरी में कुछ नहीं ले जा सकते हो। 26यदि तुम अपने पड़ोसी के अनाज के खेत से हो कर निकलो, तो हाथ से बालों को तोड़ कर खा सकते हो; किन्तु अपने पड़ोसी के खड़े खेत में हँसिया नहीं चला सकते।