1योशुआ ने बडे़ सबेरे सब इस्राएलियों के साथ षिट्टीम से प्रस्थान कर दिया। वे यर्दन के पास आये और पार करने के पूर्व वहीं पडाव डाला। 2सचिवों ने तीसरे दिन सारे शिविर में घूमकर 3लोगों को यह आदेश दिया, "जब तुम प्रभु अपने ईश्वर के विधान की मंजूषा को लेवीवंशी याजकों द्वारा ढोये जाते देखो तब अपना-अपना स्थान छोड़ कर उसके पीछे हो लो जिससे तुम्हें यह मालूम हो सके कि तुम्हें किस रास्ते पर चलना है क्योंकि तुम इस रास्ते पर पहले कभी नहीं आये। 4लेकिन तुम्हारे और उसके बीच दो हजार हाथ की दूरी होनी चाहिए। तुम उसके निकट नहीं जाओगे।" 5योशुआ ने लोगो से कहा, "अपने को पवित्र बनाये रखो क्योंकि कल प्रभु तुम्हारी आँखों के सामने चमत्कार करेगा"। 6योशुआ ने याजको से कहा, "विधान की मंजूषा उठाकर लोगों के आगे-आगे चलो"। तब उन्होंने विधान की मंजूषा उठायी और वे लागों के आगे-आगे चल पडे़। 7प्रभु ने योशुआ से यह कहा, "मैं आज से इस बात का ध्यान रखूँगा कि सभी इस्राएली तुम्हारा महत्व समझें और यह जान जायें कि जिस तरह मैं मूसा के साथ रहा उसी तरह तुम्हारे साथ भी रहूँगा। 8तुम विधान की मंजूषा ढोने वाले याजको को यह आदेश दोगे, ’जब तुम लोग यर्दन नदी के तट पर पहुँचो, तो नदी में ही खडे़ हो जाओ’।" 9इसके बाद योशुआ ने इस्राएलियों से कहा, "यहाँ आओ और अपने प्रभु ईश्वर का आदेश सुनों।" 10योशुआ ने कहा, "अब तुम जान जाओगे कि जीवन्त ईश्वर तुम्हारे बीच है और तुम लोगों के सामने से कनानियों को निष्चय ही भगा देगा। 11समस्त पृथ्वी के प्रभु के विधान की मंजूषा तुम लोगों से पहले यर्दन पार करेगी। 12बारह व्यक्तियों को चुन लो हर एक वंश से एक व्यक्ति को। 13ज्यों ही समस्त पृथ्वी के प्रभु के विधान की मंजूषा ढोने वाले याजक यर्दन नदी के पानी में पैर रखेंगे त्यों ही ऊपर से बहने वाला पानी थम जायेगा और ठोस पुंज जैसा हो जायेगा।" 14जब इस्राएली अपने तम्बू उखाड़ कर यर्दन पार करने निकले तो विधान की मंजूषा ढोने वाले याजक उनके आगे-आगे चलें। 15ज्यों ही मंजूषा ढोने वाले याजकों ने यर्दन के पास जा कर पानी में पैर रखा- कटने के समय यर्दन का पानी उमड़ कर तट पर फैल जाता है - 16त्यों ही ऊपर से बहने वाला पानी थम गया और सारतान के निकटवर्ती आदाम नगर तक ठोस पुंज- जैसा बन गया। अराबा के समुद्र अर्थात लवण समुद्र की ओर उतरने वाला पानी बह निकला और इस प्रकार इस्राएली येरीख़ो के सामने पार उतरे। 17जब इस्राएली सूखे पाँव उस पार जा रहे थे तो प्रभु के विधान की मंजूषा ढोने वाले याजक यर्दन के बीच के सूखे तल पर तब तक खडे़ रहे, जब तक सभी लोग यर्दन के उस पार नहीं पहुँचे।