1प्रभु ने योशुआ से यह कहा, 2"इस्राएली लोगों से कहो कि वे अपने लिये उन शरण नगरों का निर्धारण करें जिनके विषय में मैंने मूसा द्वारा तुम लोगों से कहा था। 3वहाँ से व्यक्ति को रक्त के प्रतिशोधी से शरण मिलेगी, जिसने अनजाने संयोग से किसी की हत्या की है। 4वह उन नगरों में से किसी में भी भाग कर नगर के द्वार के पास उस नगर के नेताओं के सामने अपना मामला प्रस्तुत करेगा। वे उसे नगर के भीतर ले जा कर वहाँ शरण दें। तब वह उनके साथ रहेगा। 5यदि रक्त का प्रतिशोधी उसका पीछा करे, तो वे उस व्यक्ति को उसके हवाले नहीं करें, जिस पर हत्या का अभियोग लगाया है, क्योंकि उसने बैर से नहीं, बल्कि संयोग से अपने पड़ोसी का वध किया। 6वह उस नगर में तब तक रह सकता है, जब तक समुदाय के न्यायालय में उस पर मुकदमा न चलाया गया हो और तत्कालीन प्रधानयाजक की मृत्यु न हुई हो। इसके बाद वह अपने नगर और अपने घर लौट सकेगा, जहाँ से वह भाग कर आया था। 7इसलिए उन्होंने नफ़्ताली के गलीलिया के पहाड़ी प्रदेश में केदेश को, एफ्रईम के पहाड़ी प्रदेश में किर्यत-अरबा, अर्थात हेब्रोन को निश्चित किया। 8यर्दन के उस पर येरीख़ो के पूर्व रूबेन वंश के पठार पर उजाड़खण्ड के बेसेर को, गाद वंश में गिलआद के रामोत को और मनस्से वंश के बाशान में गोलान को निश्चित किया। 9ये वे निर्धारित नगर थे, जहाँ हर एक इस्राएली या उनके बीच रहने वाला परदेशी, जिसने संयोग से किसी का वध किया था, शरण ले सकता था और समुदाय के न्यायालय में उपस्थित होने तक रक्त के प्रतिशोधी द्वारा नहीं मारा जा सकता था।