1जब समूएल बूढ़ा हो चला, तो उसने अपने पुत्रों को इस्राएल के न्यायकर्ता के पद पर नियुक्त किया। 2उसके जेठे पुत्र का नाम योएल था और दूसरे का नाम अबीया। वे बएर-षेबा में न्यायकर्ता का कार्य करते थे। 3परन्तु उसके पुत्र अपने पिता के मार्ग का अनुसरण नहीं करते थे। वे लोभ में पड़ कर घूस लेते और न्याय भ्रष्ट कर देते थे। 4इस्राएल के सब नेता इकट्ठे हो गये और रामा में समूएल के पास आये। 5उन्होंने उससे कहा, "आप बूढ़े हो गये हैं और आपके पुत्र आपके मार्ग का अनुसरण नहीं करते। इसलिए आप हमारे लिए एक राजा नियुक्त करें, जो हम पर शासन करें, जैसा कि सब राष्ट्रों में होता है।" 6उनका यह निवेदन कि आप हमारे लिए एक राजा नियुक्त करें, जो हम पर शासन करें, समूएल को अच्छा नहीं लगा और उसने प्रभु से प्रार्थना की। 7प्रभु ने समूएल से कहा, "लोगो की हर माँग पूरी करो, क्योंकि वे तुम को नहीं, बल्कि मुझ को अस्वीकार कर रहे हैं। वे नहीं चाहते कि मैं उनका राजा बना रहूँ। 8जिस दिन से मैं उन्हें मिस्र से निकाल लाया हॅूँ, उस दिन से आज तक उन्होंने मेरे साथ वैसा व्यवहार किया है, जैसा वे तुम्हारे साथ कर रहे है - वे मुझे त्याग कर अन्य देवताओं की सेवा करते रहे। 9उनकी प्रार्थना सुनो, परन्तु उन्हें यह चेतावनी दो और अच्छी तरह समझाओं कि उन पर शासन करने वाला राजा उनके साथ कैसा व्यवहार करेगा।" 10जिन लोगों ने समूएल से एक राजा की माँग की थी, समूएल ने उन्हें प्रभु की सारी बातें बता दीं। 11उसने कहा, "जो राजा तुम लोगो पर शासन करेंगे, वह ये अधिकार जतायेंगे: वह तुम्हारे पुत्रों को अपने रथों तथा घोड़ों की सेवा में लगायेंगे और अपने रथ के आगे-आगे दौड़ायेंगे। 12वह उन्हें अपनी सेना के सहस्रपति तथा पंचाशतपति के रूप में नियुक्त करेंगे, उन से अपने खेत जुतवायेंगे, अपनी फ़सल कटवायेंगे और हथियार तथा युद्ध-रथों का सामान बनवायेंगे। 13वह मरहम तैयार करने, भोजन पकाने और रोटियाँ सेंकने के लिए तुम्हारी पुत्रियों की माँग करेंगे। 14वह तुम्हारे सर्वोत्तम खेत, दाखबारियाँ और जैतून के बाग़ तुम से छीन कर अपने सेवकों को प्रदान करेंगे। 15वह तुम्हारी फ़सल और दाख़बारियों की उपज का दशमांश लेंगे और उसे अपने दरबारियों तथा सेवको को दे देंगे। 16वह तुम्हारे दास-दासियों को, तुम्हारे युवकों और तुम्हारे गधों को भी अपने ही काम में लगा देंगे। 17वह तुम्हारी भेड़-बकरियों का दशमांश लेंगे और तुम लोग भी उनके दास बनोगे। 18उस समय तुम अपने राजा के कारण, जिसे तुमने स्वयं चुना होगा, प्रभु की दुहाई दोगे, किन्तु उस दिन प्रभु तुम्हारी एक भी नहीं सुनेगा।" 19लोगों ने समूएल का अनुरोध अस्वीकार करते हुए कहा, "हमें एक राजा चाहिए! 20तब हम सब अन्य राष्ट्रों के सदृश होंगे। हमारे राजा हम पर शासन करेंगे और युद्ध के समय हमारा नेतृत्व करेंगे।" 21समूएल ने लोगों का निवेदन सुन कर प्रभु को सुनाया और 22उसने उत्तर दिया, "उनकी बात मान लो ओर उनके लिए एक राजा नियुक्त करो।" तब समूएल ने इस्राएलियों से कहा, "सब अपने-अपने नगर लौट जायें।"