1फ़िलिस्ती इस्राएल के विरुद्ध लड़ रहे थे। इस्राएली फ़िलिस्तयों के सामने से भाग खडे़ हुए। गिलबोआ के पर्वत पर मरे हुए लोग पड़े थे। 2फ़िलिस्तयों ने साऊल और उसके पुत्रों का पीछा कर साऊल के पुत्र योनातान, अबीनाबाद और मलकीषुआ को मार डाला। 3तब साऊल के निकट घमासान युद्ध हुआ और तीरन्दाज़ उसकी ओर बढे़। साऊल तीरन्दाजों को देखकर थरथरा कर काँपने लगा। 4साऊल ने अपने शस्त्रवाहक को आज्ञा दी, "अपनी तलवार खींच लो और मुझे मार डालो। ऐसा न हो कि वे बेख़तना लोग आ कर मुझे भोंकदें और मेरा अपमान करें।" लेकिन उसके शस्त्रवाहक ने अस्वीकार कर दिया, क्योंकि वह बहुत डर रहा था। इस पर साऊल ने अपनी तलवार खींच कर अपने को उस पर गिरा दिया। 5जब उसके शस्त्रवाहक ने देखा कि साऊल की मृत्यु हो गई है, तो उसने भी अपने को अपनी तलवार पर गिरा दिया और वह भी उसके साथ मर गया। 6इस प्रकार साऊल, उसके तीन पुत्र, उसका शस्त्रवाहक और उसके सब सैनिक उसी दिन मर गये। 7जब मैदान के और यर्दन के उस पार रहने वाले इस्राएलियों ने देखा कि इस्राएली सैनिक भाग गये हैं तथा साऊल और उसके पुत्र मरे पडे़ हैं, तो वे अपने नगर छोड़ कर भाग निकले। फ़िलिस्ती आ कर उन में बस गये। 8दूसरे दिन मरे हुए लोगों को लूटने के लिए फ़िलिस्ती आ पहुँचे। उन्होंने साऊल और उसके तीन पुत्रों को पा लिया, जो गिलबोआ के पर्वत पर मारे गये थे। 9उन्होंने साऊल का सिर काट लिया, उसका कवच उतार डाला और अपने देवताओं तथा लोगों को विजय की सूचना देने फ़िलिस्तियों के देश भर में दूत भेजे। 10उन्होंने उसके अस्त्र-षस्त्र अष्तारता-देवियों के मन्दिर में रख दिये और उसका शव बेत-षान की चारदीवारी पर लटका दिया। 11फ़िलिस्तयों ने साऊल के साथ जो किया था, जब गिलआद के याबेश के निवासियों ने वह सुना, 12तब सब युद्ध योग्य पुरुष प्रस्थान कर और सारी रात चल कर साऊल और उसके पुत्रों के शव बेत-षान की चारदीवारी से उतार कर यावेष ले आए और वहाँ उनको जला दिया।