1तीन वर्ष तक अराम और इस्राएल के बीच कोई युद्ध नहीं हुआ। 2जब तीसरे वर्ष यूदा का राजा यहोशाफाट इस्राएल के राजा के यहाँ आया, तो 3इस्राएल के राजा ने अपने सेवकों से कहा, "तुम जानते हो कि गिलआद का रामेात हमारा है और हम उसे अराम के राजा के हाथ से छीनने के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं"। 4उसने यहोशाफाट से पूछा, "क्या आप गिलआद के रामोत से लड़ने मेरे साथ चलेंगे?" यहोशाफाट ने इस्राएल के राजा को उत्तर दिया, "आपकी ही तरह मैं, आपकी प्रजा की ही तरह मेरी प्रजा और आपके घोड़ों की ही तरह मेरे घोड़े तेयार हैं"। 5यहोशाफाट ने इस्राएल के राजा से कहा, "पहले प्रभु की आज्ञा ले लीजिए"। 6इस पर इस्राएल के राजा ने नबियों को, जिनकी संख्या लगभग चार सौ थी, एकत्रित किया और उन से पूछा, "मैं गिलआद के रामेात से युद्ध करने जाऊँ या नहीं?" उन्होंने उत्तर दिया, "जाइए, प्रभु उसे राजा के हाथ दे देगा"। 7यहोशाफाट ने कहा, "क्या यहाँ प्रभु का और कोई नबी नहीं है, जिस से हम पूछ सकें?" 8इस्राएल के राजा ने यहोशाफाट को उत्तर दिया, "एक और भी है, जिसके द्वारा हम प्रभु से पूछ सकते हैं; लेकिन मैं उस से घृणा करता हूँ, क्योंकि वह मेरे सम्बन्ध में कभी कोई अच्छी बात नहीं कहता, हमेशा अशुभ बातें कहता है। वह यिमला का पुत्र मीकायाह है।" इस पर यहोशाफ़ाट ने कहा, "राजा को ऐसा नहीं कहना चाहिए"। 9तब इस्राएल के राजा ने किसी पदाधिकारी को यिमला के पुत्र मीकायाह को तुरन्त बुलाने का आदेश दिया। 10जब इस्राएल का राजा और यूदा का राजा यहोशाफाट अपने-अपने राजकीय वस्त्र पहने अपने-अपने आसनों पर समारिया के फाटक के पास खलिहान में बैठे थे और सब नबी उनके सामने भविष्यवाणी कर रहे थे, 11तब सिदकीया आया, जिसने अपने लिए लोहे के सींग बनवाये थे। उसने कहा, "प्रभु का कहना है कि ऐसे सींगों से ही आप अरामियों को तब तक मारते रहेंगे, जब तक वे नष्ट नहीं हो जायेंगे"। 12इसी प्रकार अन्य सब नबियों ने भविष्यवाणी करते हुए कहा, "गिलआद के रामोत पर आक्रमण कीजिए ?; आप विजयी होंगे। प्रभु उसे राजा के हाथ दे देगा।" 13उस दूत ने, जो मीकायाह को बुलाने गया था, उस से कहा, "देखिए, सभी नबी एक स्वर से राजा की विजय की भविष्य वाणी कर रहे हैं। आपकी भविष्यवाणी भी उनकी तरह शुभ हो।" 14परन्तु मीकायाह ने कहा, "प्रभु की शपथ! मैं तो केवल वही कहूँगा, जो प्रभु मुझ से कहेगा"। 15जैसे ही वह राजा के पास आया, राजा ने उस से पूछा, "मीकायाह! हम गिलआद के रामोत के विरुद्ध युद्ध लड़ले जायें या नहीं?" उसने उत्तर दिया, "जाइए! आप विजयी होंगे। प्रभु उसे राजा के हाथ दे देगा!" 16राजा ने उस से कहा, "और कितनी बार मुझे आप से कहना पड़ेगा कि प्रभु के नाम पर आप सत्य के सिवा मुझ से और कुछ न कहें?" 17तब उसने कहा, "मैंने सब इस्राएलियों को बिना चरवाहे की भेड़ों की तरह पर्वत पर इधर-उधर बिखरते देखा; और प्रभु ने कहा, ‘इनका कोई स्वामी नहीं। प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने घर शान्तिपूर्वक चला जाये’।" 18तब इस्राएल के राजा ने यहोशाफाट से कहा, "मैंने आप से कहा था न कि यह मेरे सम्बन्ध में कभी कोई अच्छी बात नहीं कहता, केवल अशुभ बातें बकता है"। 19मीकायाह ने कहा, "अब प्रभु की यह वाणी सुनिए: मैंने प्रभु को उसके सिंहासन पर विराजमान देखा। स्वर्ग के समस्त गण उसके दाहिने ओर बायें खड़े थे। 20तब प्रभु ने कहा, ‘अहाब को कौन बहकायेगा, जिससे वह गिलआद के रामोत तक जाये और वहाँ मार डाला जाये?’ किसी ने कुछ कहा, किसी ने कुछ। 21तब प्रभु के सामने एक आत्मा आया और बोला कि मैं ही उसे बहकाऊँगा। प्रभु ने उस से पूछा, ‘कैसे?’ 22उसने उत्तर दिया, ‘मैं जा कर उसके सब नबियों के मुँह में झूठ बोलने वालेा आत्मा बनूँगा’। प्रभु ने कहा, ‘तुम उसे बहका पाओगे, तुम्हें सफलता प्राप्त होगी। जा कर ऐसा ही करो।’ 23प्रभु ने आपके इन सब नबियों के मुँह में झूठ बोलने वाला आत्मा बिठा दिया है, क्योंकि प्रभु ने आपके विषय में अशुभ परिणाम निश्चित कर दिया है।" 24इस पर कनाना के पुत्र सिदकीया ने पास आकर मीकायाह को यह कहते हुए थप्पड़ मारा, "क्या? क्या प्रभु के आत्मा ने तुम से झूठ बोलने के लिए मुझे छोड़ दिया है?" 25मीकायाह ने उत्तर दिया, "तुम्हें उस दिन पता चलेगा, जिस दिन तुम स्वयं भीतरी कमरे में छिपने के लिए भाग जाओगे"। 26इस पर इस्राएल के राजा ने आदेश दिया, "मीकायाह को पकड़ कर नगर के प्रशासक आमोन और राजकुमार योआश के पास ले जाओ 27और कहो कि राजा का आदेश है कि उसे बन्दीगृह में डाल दिया जाये और जब तक मैं सकुशल न लौट आऊँ, तब तक इसे जीने भर के लिए रोटी-पानी दिया जाये"। 28लेकिन मीकायाह ने कहा, "यदि आप सकुशल लौट आये, तो समझ लीजिएगा कि मेरे द्वारा प्रभु नहीं बोला है" और उसने यह भी कहा, "तुम सब लोग मेरी यह बात सुन लो!" 29इसके बाद इस्राएल का राजा और यूदा का राजा यहोशाफाट गिलआद के रामोत गये। 30वहाँ इस्राएल के राजा ने यहोशाफाट से कहा, "मैं वेश बदल कर युद्ध में जा रहा हूँ, लेकिन आप अपने वस्त्र धारण किये रहिए"। इसलिए इस्राएल का राजा वेश बदल कर युद्ध में चला गया। 31अराम के राजा ने अपनी रथ-सेना के बत्तीस अध्यक्षों को यह आदेश दिया था: "इस्राएल के राजा के सिवा किसी दूसरे छोटे या बड़े योद्धा पर आक्रमण मत करो"। 32जब रथ-सेना के अध्यक्षों ने यहोशाफाट को देखा, तो उन्होंने उसे ही इस्राएल का राजा समझ लिया और वे उस पर टूट पड़े। 33जब यहोशाफाट चिल्लाने लगा, तो रथ-सेना के अध्यक्षों को पता चला कि वह इस्राएल का राजा नहीं है और उन्होंने उसका पीछा करना छोड़ दिया। 34एक सैनिक ने अपना धनुष उठा कर यों ही तीर चलाया और वह इस्राएल के राजाके कवच और कमरबन्द के बीच लग गया। राजा ने अपने सारथी को आदेश दिया, "रथ मोड़ कर मुझे युद्धक्षेत्र से बाहर ले चलो। मैं घायल हो गया हूँ।" 35उस दिन घमासान युद्ध होता रहा। लोगों ने राजा को अरामियों के सामने रथ पर खड़ा सँभाला। शाम होते-होते उसकी मृत्यु हो गयी। उसके घाव का रक्त रथ के फर्श पर टपकता रहा। 36सूर्यास्त के समय शिविर में यह आवाज़ सुनाई पड़ी: "प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने नगर, प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने प्रान्त लौट जाये"। 37राजा समारिया लाया गया और वहीं दफनाया गया। 38जब समारिया के कुण्ड में रथ धोया जा रहा था, तो कुत्ते उसका रक्त चाट रहे थे, ठीक वैसे ही, जेसा प्रभु ने कहा था और उस में वेश्याओं ने स्नान किया। 39अहाब का शेष इतिहास, उसके कार्य-कलाप, उसके बनवाये हुए हाथीदाँत-लगे महल और उसके बसाये हुए सब नगरों का वर्णन इस्राएल के राजाओं के इतिहास-ग्रन्थ में लिखा है। 40अहाब अपने पितरों से जा मिला और उसका पुत्र अहज़्या उसकी जगह राजा बना। 41इस्राएल के राजा अहाब के चैथे वर्ष आसा का पुत्र यहोशाफाट यूदा का राजा बना। 42जब यहोशाफाट राजा बना, तो उस समय उसकी उम्र पैतींस वर्ष थी। उसने येरूसालेम में पच्चीस वर्ष तक शासन किया। उसकी माता का नाम अजूबा था, जो शिलही की पुत्री थी। 43वह अपने पिता आसा के मार्ग पर चलता था; वह कभी उस से विमुख नहीं हुआ। उसने वही किया, जो प्रभु की दृष्टि में उचित है, 44किन्तु उसने पहाड़ी पूजा-स्थलों को नहीं हटवाया। जब तक लोग पहाड़ी पूजास्थलों पर बलिदान चढ़ाते और घूप देते थे। 45यहोशाफाट का इस्राएली राजा से मेल रहा। 46यहोशाफाट का शेष इतिहास, उसकी वीरता और उसके युद्धों का वर्णन यूदा के राजाओं के इतिहास-ग्रन्थ में लिखा है। 47उसने पूजा की आड़ में पुरुषगमन करने वाले उन लोगों को देश से निकाल दिया था, जो उसके पिता आसा के दिनों के बाद शेष रह गये थे। 48एदोम में कोई राजा नहीं था। 49यहोशाफाट ने ओफिर से सोना लाने के लिए व्यापारी जहाज बनवाये; परन्तु वे वहाँ नहीं पहुँच सके, क्योंकि वे एस्योन-गेबेर के पास नष्ट हो गये। 50तब अहाब के पुत्र अहज़्या ने यहोशाफाट से कहा, "मेरे नाविक आपके नाविकों के साथ जहाजों पर यात्रा करें", लेकिन यहोशाफाट ने इसे पसन्द नहीं किया। 51यहोशाफाट अपने पितरों से जा मिला और अपने पितरों के पास अपने पुरखे दाऊद के नगर में दफनाया गया। उसका पुत्र यहोराम उसकी जगह राजा बना। 52यूदा के राजा यहोशाफाट के सत्रहवें वर्ष अहाब का पुत्र अहज़्या समारिया में इस्राएल का राजा बना। उसने इस्राएल पर दो वर्ष तक शासन किया। 53उसने वही किया, जो प्रभु की दृष्टि में बुरा है और वह अपने पिता के मार्ग पर, अपनी माँ के मार्ग पर और नबाट के पुत्र यरोबआम के मार्ग पर, जिसने इस्राएलियों से पाप कराया, चलता रहा। 54बाल-देव की पूजा द्वारा उसने प्रभु, इस्राएल के ईश्वर का क्रोध उसी प्रकार भड़काया, जिस प्रकार उसके पिता ने भड़काया था।