1एलीशा ने उस स्त्री से, जिसके पुत्र को उसने जीवित कर दिया था, यह कहा था, "तुम परिवार-सहित कहीं जा कर प्रवासी के रूप में रहो; क्योंकि प्रभु के विधान से अकाल पड़ने वाला है, जो देश में सात वर्ष तक रहेगा"। 2उस स्त्री ने ईश्वर-भक्त के परामर्श के अनुसार किया था और वह चली गयी थी। वह परिवार-सहित जा कर फ़िलिस्तयों के देश में प्रवासी के रूप में सात वर्ष रही थी। 3सात वर्ष बीतने पर वह फ़िलिस्तयों के देश से लौटी और अपने घर तथा अपने खेत पुनः प्राप्त करने राजा के पास गयी। 4उस समय राजा ईश्वर-भक्त के सेवक गेहज़ी से बातें कर रहा था और उसने उस से कहा, "मुझे एलीशा के सब महान् कार्यो के बारे में बताओ"। 5जिस समय वह राजा को यह बात रहा था कि उसने किसी मृतक को जीवित कर दिया था, ठीक उसी समय वह स्त्री, जिसके पुत्र को उसने जीवित किया था, अपने घर और खेत पुनः प्राप्त करने, राजा के पास आ पहुँची। गेहज़ी ने कहा, "मेरे स्वामी और राजा! यह वही स्त्री है और यही है उसका पुत्र, जिसे एलीशा ने पुन:जीवित किया था"। 6राजा के पूछने पर स्त्री ने सब हाल बताया। इसके बाद राजा ने यह कहते हुए एक अधिकारी को उसका काम करने की आज्ञा दी, "इसे उसका घर-द्वार, धन-सम्पत्ति सब वापस दिला दो और उसके चले जाने के बाद से उसके खेत की आज तक की उपज भी वापस दिलाओ"। 7एक बार एलीशा दमिश्क आया। उस समय अराम का राजा बेन-हदद बीमार था। जैसे ही उसे यह समाचार मिला कि ईश्वर-भक्त यहाँ आया है, 8राजा ने हज़ाएल को आज्ञा दी, "एक भेंट ले कर उस ईश्वर-भक्त से मिलने जाओ और उसके द्वारा प्रभु से पूछो कि क्या मैं इस बीमारी से अच्छा हो जाऊँगा।" 9हज़ाएल चालीस ऊँटों पर दमिश्क की सर्वोत्तम चीज़ें लाद कर उन्हें भेंट स्वरूप एलीशा के पास ले गया। वह उसके पास आ कर बोला, "अराम के राजा, आपके पुत्र बेन-हदद आप से पूछते हैं कि क्या वह इस बीमारी से अच्छे हो जायेंगे।" 10एलीशा ने उसे उत्तर दिया, "जाओ और उस से कहो कि आप अच्छे तो अवश्य हो जायेंगे, परन्तु प्रभु ने मुझ पर प्रकट किया है कि उसकी मृत्यु हो जायेगी"। 11इसके बाद ईश्वर-भक्त निर्विकार भाव से उसे देखता रहा और रोने लगा। 12हज़ाएल ने पूछा, "मेरे स्वामी रो क्यों रहे हैं?" उसने उत्तर दिया, "मैं जानता हूँ कि तुम इस्राएलियों के साथ कितना बुरा व्यवहार करोगे। तुम उनके गढ़ भस्म कर दोगे, उनके युवकों को तलवार के घाट उतारोगे, उनके बच्चों को ज़मीन पर पटक दोगे और गर्भवती स्त्रियों के पेट फ़ाड़ डालोगे।" 13हज़ाएल ने कहा, "आपका यह दास, यह कुत्ता, क्या है कि वह यह सब कर पायेगा?" एलीशा ने उत्तर दिया, "प्रभु ने मुझ पर प्रकट किया है कि तुम अराम के राजा बनोगे"। 14इसके बाद वह एलीशा के यहाँ से अपने स्वामी के पास लौटा। उसने उस से पूछा, "एलीशा ने तुम से क्या कहा है?" उसने उत्तर दिया, "उसने कहा कि आप अवश्य अच्छे हो जायेंगे"। 15पर दूसरे दिन उसने चादर ली और उसे पानी में डुबा कर उसके सिर पर रखा। इसी से उसकी मृत्यु हो गयी। उसकी जगह स्वयं हज़ाएल राजा बन गया। 16इस्राएल के राजा अहाब के पुत्र यहोराम के पाँचवें वर्ष यहोशाफ़ाट का पुत्र यहोराम यूदा का राजा बना। 17जब वह शाासन करने लगा, उस समय उसकी अवस्था बत्तीस वर्ष थी। उसने येरूसालेम में आठ वर्ष तक राज्य किया। 18वह अहाब के घराने की तरह इस्राएल के राजाओं के मार्ग पर चलने लगा, क्योंकि अहाब की एक पुत्री उसकी पत्नी थी। उसने वही किया, जो प्रभु की दृष्टि में बुरा है। 19प्रभु ने अपने सेवक दाऊद के कारण यूदा को नष्ट नहीं किया; क्योंकि उसने प्रतिज्ञा की थी कि वह दाऊद और उसके वंशजों के लिए सदा एक दीपक जलाये रखेगा। 20उसके शासनकाल में एदोम ने यूदा के विरुद्ध विद्रोह कर अपने लिए एक अलग राजा नियुक्त किया। 21इसलिए यहोराम अपने सब रथों के साथ साईर गया। उसने और उसकी रथ-सेना के अध्यक्षों ने रात को उठ कर उन एदोमियों पर धावा बोल दिया, जो उन्हें घेरे हुए थे; परन्तु यहोराम के सैनिक अपने घर भाग निकले। 22इस प्रकार एदोम यूदा से पृथक हो गया और यही स्थिति आज तक चली आ रही है। उसी समय लिबना ने भी विद्रोह किया। 23यहोराम का शेष इतिहास और उसका कार्यकलाप यूदा के राजाओं के इतिहास-ग्रन्थ में लिखा है। 24यहोराम अपने पितरों से जा मिला और अपने पितरों के पास दाऊदनगर में दफ़नाया गया। उसका पुत्र अहज़्या उसकी जगह राजा बना। 25इस्राएल के राजा अहाब के पुत्र यहोराम के बारहवें वर्ष यहोराम का पुत्र अहज़्या यूदा का राजा बना। 26जब अहज़्या शासन करने लगा, उस सयम उसकी अवस्था बाईस वर्ष थी। उसने येरूसालेम में एक वर्ष शासन किया। उसकी माता का नाम अतल्या था। वह इस्राएल के राजा ओम्री की पौत्री थी। 27अहज़्या की अहाब के घराने के मार्ग पर चलता था, क्योंकि अहाब के घराने से उसका वैवाहिक सम्बन्ध था। उसने अहाब के घराने की तरह वही किया, जो ईश्वर की दृष्टि में बुरा है। 28अहज़्या अहाब के पुत्र यहोराम के साथ अराम के राजा हज़ाएल से लड़ने गिलआद के रामोत गया। वहाँ अरामियों ने यहोराम को घायल कर दिया। 29अराम के राजा हज़ाएल से लड़ते समय अरामियों ने उसे रामोत में घालय कर दिया और राजा यहोराम घावों का उपचार कराने यिज़एल लौट गया। यूदा के राजा यहोराम का पुत्र अहज़्या अहाब के पुत्र यहोराम को देखने यिज्ऱाएल गया, क्योंकि वह घायल था।