1इस्राएल के राजा यरोबआम के सत्तईसवें वर्ष अमस्या का पुत्र अज़र्या यूदा का राजा बना। 2जब वह शासन करने लगा, तो वह सोलह वर्ष का था। उसने येरूसालेम में बावन वर्ष तक शासन किया। उसकी माता का नाम यकोल्या था। वह येरूसालेम की थी। 3उसने अपने पिता अमस्या की तरह वही किया, जो प्रभु की दृष्टि में उचित है, 4किन्तु पहाड़ी पूजास्थान नहीं हटाये गये। लोग वहाँ बलिदान चढ़ाते और धूप देते रहे। 5प्रभु ने अज़र्या को कोढ़ी बना दिया। वह जीवन भर कोढ़ी रहा और उसे एक अलग मकान में रहना पड़ा। इस समय राजा का पुत्र योताम राजभवन का प्रबन्ध करता और देश के लोगों पर शासन करता था। 6अज़र्या का शेष इतिहास और उसका कार्यकलाप यूदा के राजाओं के इतिहास ग्रन्थ में लिखा है। 7अज़र्या अपने पूर्वजों से जा मिला और उनके साथ दाऊदनगर में दफ़नाया गया। उसका पुत्र योताम उसकी जगह राजा बना। 8यूदा के राजा अज़र्या के अड़तीसवें वर्ष यरोबआम का पुत्र ज़कर्या इस्राएल का राजा बना। उसने समारिया में छः महीने तक शासन किया। 9उसने अपने पूर्वजों की तरह वही किया, जो प्रभु की दृष्टि में बुरा है। नबाट के पुत्र यरोबअम ने इस्राएल से जो पाप करवाये थे, उन से ज़कर्या विमुख नहीं हुआ। 10याबेश के पुत्र शल्लूम ने उसके विरुद्ध षड्यन्त्र रचा। उसने लोगों के देखते-देखते उस पर आक्रमण कर उसका वध कर दिया और वह उसके स्थान पर स्वयं राजा बना। 11ज़कर्या का शेष इतिहास इस्राएल के राजाओं के इतिहास-ग्रन्थ में लिखा है। 12इस प्रकार येहू से कहा हुआ प्रभु का यह वचन पूरा हो गया। "तुम्हारे वंशज चैथी पीढ़ी तक इस्राएल पर शासन करेंगे"। 13यूदा के राजा उज़्ज़ीया के उनतालीसवें वर्ष याबेश का पुत्र शल्लूम राजा बना। उसने समारिया में एक महीने तक शासन किया। 14गादी का पुत्र मनहेम तिर्सा से समारिया आया और उसने याबेश के पुत्र शल्लूम को समारिया में मार डाला और वह उसके स्थान पर स्वयं राजा बना। 15शल्लूम का शेष इतिहास और उसके षड्यन्त्र का वर्णन इस्राएल के राजाओं के इतिहास-ग्रन्थ में लिखा है। 16उस समय मनहेम ने तप्पूअह, उसके सब निवासियों और तिर्सा से ले कर उसके सारे प्रदेश पर आक्रमण किया, क्योंकि लोगों ने उसके लिए नगर के फाटक नहीं खोले। उसने तप्पूअह को उजाड़ा और सभी गर्भवती स्त्रियों के पेट फाड़ डाले। 17यूदा के राजा अज़र्या के उनतालीसवें वर्ष गादी का पुत्र मनहेम इस्राएल का राजा बना। उसने समारिया में दस वर्ष तक शासन किया। 18उसने वहीे किया, जो प्रभु की दृष्टि में बुरा है। नबाट के पुत्र यरोबआम ने इस्राएलियों से जो पाप करवाये थे, उन से मनहेम जीवन भर विमुख नहीं हुआ। 19अस्सूर के राजा पूल ने देश पर आक्रमण किया। मनहेम ने पूल को एक हज़ार मन चाँदी दी, जिससे वह उसका समर्थन करे ओर राज्य पर उसका अधिकार सुदृढ़ बना दे। 20मनहेम ने यह द्रव्य इस्राएलियों से बसूल किया। प्रत्येक धनी को अस्सूर के राजा के लिए पचास शेकेल देने पड़े। इसलिए अस्सूर का राजा इस्राएल छोड़ कर अपने देश लौट गया। 21मनहेम का शेष इतिहास और उसका कार्यकलाप इस्राएल के राजाओं के इतिहास-ग्रन्थ में लिखा है। 22मनहेम अपने पूर्वजों से जा मिला और उसके स्थान पर उसका पुत्र पकह्या राजा बना। 23यूदा के राजा अज़र्या के पचावें वर्ष मनहेम का पुत्र पकह्या समारिया में इस्राएल का राजा बना। उसने दो वर्ष तक शासन किया। 24उसने वही किया, जो प्रभु की दृष्टि में बुरा है। नबाट के पुत्र यरोबआम ने इस्राएल से जो पाप करवाये थे, उन से पकह्या विमुख नहीं हुआ। 25रमल्या के पुत्र सेना-नायक पेकह ने पकह्या के विरुद्ध षड्यन्त्र रचा। उसने गिलआद के पचास आदमी अपने साथ ले कर समारिया के महल के क़िले में पकह्या का वध किया और उसकी जगह वह स्वयं राजा बना। 26पकह्या का शेष इतिहास और उसका कार्यकलाप इस्राएल के राजाओं के इतिहास ग्रन्थ में लिखा है। 27यूदा के राजा अज़र्या के बावनवें वर्ष रमल्या का पुत्र पेकह समारिया में इस्राएल का राजा बना। उसने बीस वर्ष तक शासन किया। 28उसने वही किया, जो प्रभु की दृष्टि में बुरा है। नबाट के पुत्र यरोबआम ने इस्राएल से जो पाप करवाये थे, उन से पेकह विमुख नहीं हुआ। 29इस्राएल के राजा पेकह के शासनकाल में अस्सूर के राजा तिगलत-पिलएसेर ने आ कर इय्योन, आबेल-बेत-माका, यानोअह, केदेश, हासोर, गिलआद, गलीलिया-नफ़्ताली का पूरा प्रान्त-अपने अधिकार में कर लिया और उनके निवासियों को बन्दी बना कर अस्सूर ले गया। 30जब एला के पुत्र होशेआ ने रमल्या के पुत्र पेकह के विरुद्ध षड्यन्त्र कर उसे मार डाला और उज़्ज़ीया के पुत्र योताम के तीसवें वर्ष वह उसके स्थान पर स्वयं राजा बना। 31पेकह का शेष इतिहास और उसका कार्यकलाप इस्राएल के राजाओं के इतिहास-ग्रन्थ में लिखा है। 32इस्राएल के राजा रमल्या के पुत्र पेकह के दूसरे वर्ष यूदा के राजा उज़्ज़ीया का पुत्र योताम शासन करने लगा। 33जब वह शासन करने लगा, तो उसकी अवस्था पच्चीस वर्ष थी। उसने येरूसालेम में सोलह वर्ष तक शासन किया। उसकी माता का नाम यरूशा था, जो सादोक की पुत्री थी। 34उसने अपने पिता उज़्ज़ीया की तरह वही किया जो प्रभु की दृष्टि में उचित है। 35परन्तु पहाड़ी पूजास्थान नहीं हटाये गये। लोग वहाँ बलियाँ चढ़ाते और धूप देते रहे। उसने प्रभु के मन्दिर का ऊपरी फाटक बनवाया। 36योताम का शेष इतिहास और उसका कार्यकलाप यूदा के राजाओं के इतिहास-ग्रन्थ में लिखा है। 37प्रभु उसके शासनकाल में अराम के राजा रसीन को और रमल्या के पुत्र पेकह को यूदा पर आक्रमण करने भेजने लगा। 38योताम अपने पितरों से जा मिला और अपने पूर्वज दाऊद के नगर में अपने पूर्वजों के पास दफ़नाया गया। उसका पुत्र आहाज़ उसकी जगह राजा बना।