1तीरूस के राजा हीराम ने देवनगर की लकड़ी, शिल्पकारों और बढ़इयों के साथ दाऊद के पास दूत भेजे, जिससे वे उसके लिए महल बना दें। 2अब दाऊद जान गया कि प्रभु ने उसे इस्राएल का राजा बना दिया है और अपनी प्रजा इस्राएल के कारण उसका राज्य महान् बना दिया। 3दाऊद ने येरूसालेम में अन्य पत्नियों से विवाह किया और उसके और पुत्र-पुत्रियाँ उत्पन्न हुए। 4येरूसालेम में उत्पन्न उसके पुत्रों के नाम ये हैं: शम्मूआ, शोबाब, नातान, सुलेमान, 5यिभार, एलीशूआ, एल्पलेट, 6नोगह, नेफ़ेग, याफ़ीआ, 7एलीशामा, बएलयादा और एलीफ़े। 8जब फ़िलिस्तियों ने सुना कि दाऊद का सभी इस्राएलियों के राजा के रूप में अभिषेक हुआ है, तो वे सब दाऊद की खोज में निकले। यह सुन कर दाऊद उनका सामना करने निकला। 9फ़िलिस्तिनी आये और रफ़ाईम के मैदान में फैल गये। 10तब दाऊद ने ईश्वर से पूछा, "क्या मैं फ़िलिस्तियों पर आक्रमण करूँ? क्या तू उन्हें मेरे हाथ दे देगा?" प्रभु ने उसे उत्तर दिया, "हाँ, आक्रमण करो; मैं उन्हें तुम्हारे हाथ दे दूँगा"। 11दाऊद ने उन्हें बाल-परासीम जा कर पराजित किया। उस समय दाऊद ने कहा, "ईश्वर ने मेरे द्वारा मेरे शत्रुओं की पंक्ति इस प्रकार तोड़ डाली है, जैसे पानी बाँध का तोड़ डालता है"। इसलिए उस स्थान का नाम बाल-परसीम पड़ गया। 12फ़िलिस्ती वहाँ अपनी देवमूर्तियाँ छोड़ कर चले गये और वे दाऊद की आज्ञा से आग में जला दी गयीं। 13फ़िलिस्ती फिर आ कर उस मैदान में फैल गये। 14ईश्वर से पूछने पर दाऊद को उत्तर मिला, "उन पर सीधे आक्रमण मत करो, बल्कि चक्कर काट कर उनके पीछे पहुँचो और मोखा वृक्षों की ओर से चढ़ाई करो। 15तब यदि तुम मोखा वृक्षों के शिखरों में चलने की आवाज़ सुनोगे, तो आक्रमण करोगे; क्योंकि तब फ़िलिस्तियों की सेना पराजित करने के लिए ईश्वर तुम्हारे आगे-आगे जा रहा होगा।" 16दाऊद ने ईश्वर की आज्ञा का पालन किया और गिबओन से ले कर गेजे़र तक फ़िलिस्तियों को मार भगाया। 17दाऊद की कीर्ति देश-देशान्तरों में फैल गयी और प्रभु ने उसका आतंक सब राष्ट्रों पर फैला दिया।