1जब योताम राजा बना, तो उसकी अवस्था पच्चीस वर्ष थी। उसने येरूसालेम में सोलह वर्ष शासन किया। उसकी माता का नाम यरूषा था, जो सादोक की पुत्री थी। 2उसने अपने पिता उज़्ज़ीया की तरह ही वही किया, जो प्रभु की दृष्टि में उचित है; किन्तु उसने प्रभु के मन्दिर में प्रवेश नहीं किया। जनता भ्रष्ट आचरण करती रही। 3उसने प्रभु के मन्दिर का ऊपरी फाटक बनवाया और ओफ़ेन की दीवार पर भी बहुत-सा निर्माण-कार्य करवाया। 4उसने यूदा के पहाड़ी प्रान्त में नगर और वनों में क़िले और बुर्ज बनवाये। 5उसने अम्मोनियों से युद्ध किया और उन्हें पराजित किया। उस वर्ष अम्मोनियों को उसे एक सौ मन चाँदी, साढ़े चार लाख लिटर गेहूँ और साढ़े चार लाख लिटर जौ देना पड़ा। दूसरे और तीसरे वर्ष भी अम्मोनियों को उतना ही देना पड़ा। 6इस प्रकार योताम शक्तिशाली होता गया; क्योंकि वह दृढ़तापूर्वक प्रभु, अपने ईश्वर के मार्ग पर चलता था। 7योताम का शेष इतिहास, उसके सभी युद्व और कार्यकलाप-यह सब इस्राएल और यूदा के राजाओं के इतिहास-ग्रन्थ में लिखा है। 8जब वह राजा बना, तो उसकी अवस्था पच्चीस वर्ष थी और उसने येरूसालेम में सोलह वर्ष शासन किया। 9योताम अपने पितरों से जा मिला और उसे दाऊदनगर में दफ़ना दिया गया। उसका पुत्र आहाज़ उसकी जगह राजा बना।