1जब हिज़कीया राजा बना, तो उसकी अवस्था पच्चीस वर्ष थी। उसने येरूसालेम में उनतीस वर्ष शासन किया। उसकी माता का नाम अबीया था। वह ज़कर्या की पुत्री थी। 2उसने अपने पुरखे दाऊद की तरह वही किया, जो प्रभु की दृष्टि में उचित है। 3उसने अपने शासनकाल के पहले महीने में प्रभु के मन्दिर के द्वार खोले और उनका जीर्णोद्धार किया। 4इसके बाद उसने याजकों और लेवियों को बुलवाया। उसने मन्दिर के पूर्व के मैदान में उन्हें एकत्रित कर उन से यह कहा, 5"लेवियों! मेरी बात सुनो। अपने को पवित्र करो और प्रभु, अपने पूर्वजों के ईश्वर के मन्दिर को पवित्र करो। पवित्र-स्थान में जो अशुद्धता हो, उसे दूर करा; 6क्योंकि हमारे पूर्वज हमारे ईश्वर के प्रति ईमानदार नहीं रहे और उन्होंने वही किया, जो प्रभु की दृष्टि में बुरा है। उन्होंने प्रभु को त्याग दिया, उसके निवास से मुँह मोड़ा और प्रभु से पीठ फेर ली। 7इसके अतिरिक्त उन्होंने सामने के द्वार बन्द किये, दीप बुझा दिये तथा इस्राएल के ईश्वर को पवित्र-स्थान में धूप और होम-बलि नहीं चढ़ायी। 8इसलिए यूदा और येरूसालेम पर प्रभु का क्रोध भड़क उठा। उसने उन्हें त्रास, घृणा और तिरस्कार का पात्र बना दिया, जैसा कि तुम अपनी आँखों से देखते हो। 9इतना ही नहीं, हमारे पिता तलवार के घाट उतार दिये गये और हमारे पुत्र-पुत्रियाँ और पत्नियाँ बन्दी बना कर ले जायी गयीं। 10इसलिए मैंने प्रभु, इस्राएल के ईश्वर के साथ सन्धि करने का निश्चय किया, जिससे उसका क्रोध हम पर से दूर हो जाये। 11मेरे पुत्रों! अब तत्पर रहो। प्रभु ने तुम्हें इसलिए चुना कि तुम उसके सामने खड़े हो कर उसकी सेवा करो और उसके याजक बन कर उसे धूप चढ़ाओ।" 12इसके बाद ये लेवी उठ खड़े हुए- कहातियों में से अमासय का पुत्र महत और अज़र्या का पुत्र योएल; मरारियों में से अबदी का पुत्र कीश और यहल्लेलएल का पुत्र अज़र्या ; गेरशोनियों में से जिम़्मा का पुत्र योआह और योआह का पुत्र एदेन; 13एलीसाफ़ान के वंशजों में से ज़कर्या और मत्तन्या; 14हेमान के वंशजों में से यहीएल और शिमई तथा यदूतून के वंशजों में से शमाया और उज़्ज़ीएल। 15उन्होंने अपने भाई-बन्धुओं को एकत्रित कर अपने को पवित्र किया। इसके बाद उन्होंने राजा की आज्ञा पा कर प्रभु के नियमों के अनुसार प्रभु के मन्दिर का शुद्धीकरण करना प्रारम्भ किया। 16याज़कों ने शुद्धीकरण करने के लिए प्रभु के मन्दिर में प्रवेश किया। उन्होंने प्रभु के मन्दिर में पायी गयी सब अशुद्ध वस्तुओं को निकाल कर आँगन में ला कर रखा। लेवियों ने उन्हें वहाँ से उठा कर केद्रोन के नाले में फेंक दिया। 17उन्होंने पहले महीने के पहले दिन शुद्धीकरण प्रारम्भ किया था। उसी महीने के आठवें दिन वे प्रभु के द्वारमण्डप तक आ गये और आठ दिन तक प्रभु के मन्दिर का पवित्रीकरण करते रहे। यह कार्य पहले महीने के सोलहवें दिन समाप्त हो गया था। 18इसके बाद उन्होंने राजा हिज़कीया के यहाँ जा कर उस से कहा, "हमने प्रभु का पूरा मन्दिर पवित्र कियाः होम- बलि की वेदी तथा उसके सब उपकरण और भेंट की रोटियों की वेदी तथा उसके सब उपकरण। 19हमने उन सब सामग्रियों को, जिन्हें विधर्मी राजा आहाज़ ने अपने शासनकाल में निकाल दिया था, फिर से रखा और पवित्र किया। वे अब प्रभु की वेदी के सामने रखी हुई है।" 20दूसरे दिन प्रातःकाल राजा हिज़कीया ने नगर के पदाधिकारियों को एकत्रित किया और प्रभु के मन्दिर में गया। 21वे सात साँड, सात मेढ़े, सात मेमने और सात बकरे लाये, जिससे वे राजवंश, मन्दिर और यूदा के लिए प्रायश्चित- बलि के रूप में चढ़ाये जायें। राजा ने हारून के वंशज याजकों को आदेश दिया कि वे उन्हें प्रभु की वेदी पर चढ़ायें। 22ष्साँड़ों का वध किया गया और याजकों ने उनका रक्त एकत्र किया और वेदी पर छिड़का। मेढ़ों का वध किया गया और उनका रक्त वेदी पर छिड़का गया। फिर मेमनों का वध किया गया और उनका रक्त भी वेदी पर छिड़का गया। 23इसके बाद प्रायश्चित-बलि के लिए बकरे राजा और उपस्थित समुदाय के पास लाये गये, जिससे वे उन पर अपने हाथ रखें। 24इसके बाद याजकों ने उनका वध किया और उनका रक्त प्रायश्चित के लिए वेदी पर चढ़ाया, जिससे सारे इस्राएल के लिए प्रायश्चित-विधि सम्पन्न हो जाये; क्योंकि राजा ने सारे इस्राएल के लिए होम-बलि और प्रायश्चित्त-बलि का आदेश दिया था। 25इसके बाद उसने झाँझ, सारंगी और सितार के साथ लेवियों को प्रभु के मन्दिर में उस क्रम के अनुसार खड़ा कर दिया, जो दाऊद, राजा के दृष्टा गाद और नबी नातान ने निश्चित कर दिया था; क्योंकि प्रभु ने अपने नबियों द्वारा यह आदेश दिया था 26लेवी दाऊद द्वारा बनवाये वाद्यों के साथ और याजक तुरहियों के साथ खड़े हुए, 27तो हिज़कीया ने वेदी पर होम-बलि चढ़ाने की आज्ञा दी। जैसे ही होम-बलियाँ चढ़ायी जाने लगीं, तो प्रभु के सम्मान में गीत गाये जाने लगे, तुरहियाँ बजायी गयीं और इस्राएल के राजा दाऊद द्वारा बनवाये गये वाद्य बजाये जाने लगे। 28सारे समुदाय ने दण्डवत् किया। होम-बलि की समाप्ति तक गीत गाये जाते रहे और तुरहियाँ बजायी जाती रहीं। 29जब होम-बलि चढ़ायी जा चुकी, तब राजा और सब उपस्थित लोगों ने घुटने टेक कर उपासना की। 30राजा हिज़कीया और पदाधिकारियों ने लेवियों को प्रभु के आदर में दाऊद और दृष्टा आसाफ़ के गीत गाने का आदेश दिया। वे आनन्द के साथ स्तुतिगान करने लगे और उन्होंने सिर झुका कर उपासना की। 31हिज़कीया ने कहा, "देखो, तुम प्रभु की सेवा में नियुक्त हो। अब पास आ कर प्रभु के मन्दिर में शान्ति-बलियाँ चढ़ाओ।" समुदाय शान्ति-बलियाँ ले आया और जो लोग उदार थे, वे होम-बलियाँ ले आये। 32समुदाय जो होम-बलियाँ ले आया, उनकी संख्या इस प्रकार थी: सत्तर बछड़े, एक सौ मेढ़े और दो सौ मेमने। ये सब होम-बलि के रूप में प्रभु को चढ़ाये गये। 33इसके अतिरिक्त छः सौ बछड़े और तीन हजार भेड़ें अर्पित की गयीं। 34बलि-पशुओं की खाल उतारने के लिए याजकों की संख्या कम पड़ गयी। इसलिए उनके भाइयों ने, लेवियो ने तब तक उनकी सहायता की, जब तक काम पूरा न हो गया और याजकों ने अपने को पवित्र नहीं किया। वास्तव में लेवियों ने याजकों की अपेक्षा अपने को पवित्र करने के लिए अधिक उत्साह दिखाया था। 35बहुसंख्यक होम-बलियों के अतिरिक्त शान्ति-बलियों की चरबी और होम-बलियों के लिए निर्धारित अर्घों के कारण याजकों का काम भारी था। इस प्रकार प्रभु के मन्दिर की सेवा पुनः स्थापित की गयी। 36हिज़कीया और सब लोग इसलिए आनन्दित थे कि ईश्वर ने अपनी प्रजा का इतना बड़ा उपकार किया और कि यह कार्य इतनी शीघ्र सम्पन्न हो सका।