2(1-2) मैं प्रभु के उपकारों का गीत गाता रहूँगा। मैं पीढ़ी-दर-पीढ़ी तेरी सत्यप्रतिज्ञता घोषित करता रहूँगा। 3तेरी कृपा सदा बनी रहेगी। तेरी प्रतिज्ञा आकाश की तरह चिरस्थायी है। 4तूने कहा "मैं अपने कृपापात्र दाऊद से प्रतिज्ञा कर चुका हूँ। मैंने शपथ खा कर अपने सेवक दाऊद से कहाः 5’मैं तुम्हारा वंश सदा के लिए स्थापित करूँगा। तुम्हारा सिंहासन युग-युगों तक सुदृढ़ बनाये रखूँगा।" 6प्रभु! आकाश तेरे अपूर्व कार्य घोषित करता है। स्वर्गिकों की सभा तेरी सत्यप्रतिज्ञता का बखान करती है। 7आकाश में ऐसा कौन, जो प्रभु के समान हो? स्वर्गदूतों में प्रभु के सदृश कौन? 8ईश्वर स्वर्गिकों की सभा में महाप्रतापी है, अपने साथ रहने वालों में सर्वाधिक श्रद्धेय है! 9विश्मण्डल के प्रभु-ईश्वर! तेरे समान कौन? प्रभु! तू शक्तिशाली और सत्यप्रतिज्ञ है। 10तू महासागर का घमण्ड चूर करता और उसकी उद्यण्ड लहरों को शान्त करता है। 11तूने रहब पर घातक प्रहार किया और अपने बाहुबल से अपने शत्रुओं को तितर-बितर कर दिया। 12आकाश तेरा है, पृथ्वी भी तेरी है; तूने संसार और उसके वैभव की स्थापना की। 13तूने उत्तर और दक्षिण की सृष्टि की। ताबोर और हेरमोन तेरे नाम का जयकार करते हैं। 14तेरी भुजा शक्तिशाली है, तेरा हाथ सुदृढ़, तेरा दाहिना हाथ प्रतापी है। 15तेरा सिंहासन सत्य और न्याय पर आधारित है। प्रेम और सत्यप्रतिज्ञता तेरे आगे-आगे चलती है! 16प्रभु! धन्य है वह प्रजा, जो तेरा जयकार करती है और तेरे मुखमण्डल की ज्योति में चलती हैं! 17वह दिन भर तेरे नाम पर आनन्द मनाती और तेरे न्याय पर गौरव करती है; 18क्योंकि तू ही उसके बल की शोभा है। तेरी कृपा से हमारा सामर्थ्य बढ़ता है। 19प्रभु ही हमारी रक्षा करता है। इस्राएल का परमपावन ईश्वर हमारे राजा को संभालता है। 20तूने प्राचीनकाल में दर्शन दे कर अपने भक्तों से यह कहाः "मैंने एक शूरवीर की सहायता की है, जनता में एक नवयुवक को ऊपर उठाया है। 21मैंने अपने सेवक दाऊद को चुन कर अपने पवित्र तेल से उसका अभिषेक किया है। 22मेरा हाथ उसे संभालता रहेगा, मेरा बाहुबल उसे शक्ति प्रदान करेगा। 23कोई शत्रु धोखें से उस पर आक्रमण नहीं कर पायेगा, कोई विद्रोही उसे नीचा नहीं दिखा सकेगा। 24मैं उसके विरोधियों को उसके सामने मिटा दूँगा, मैं उसके बैरियों को परास्त करूँगा। 25मेरी सत्यप्रतिज्ञता और मेरी कृपा उसका साथ देती रहेगी। मेरे नाम के कारण उसका सामर्थ्य बढ़ेगा। 26मैं समुद्र पर उसका हाथ आरोपित करूँगा और नदियों पर उसका बाहुबल। 27वह मुझ से कहेगाः तू ही मेरा पिता है, मेरा ईश्वर, मेरी चट्टान और मेरा उद्धारक! 28मैं उसे अपना पहलौठा बनाऊँगा, पृथ्वी के राजाओं का अधिपति। 29मेरी कृपा उस पर बनी रहेगी, मेरी प्रतिज्ञा उसके लिए चिरस्थायी है। 30मैं उसका वंश सदा बनाये रखूँगा, उसका सिंहासन आकाश की तरह चिरस्थायी होगा। 31"यदि उसके पुत्र मेरी संहिता का तिरस्कार रहेंगे और मेरी शिक्षा पर नहीं चलेंगे; 32यदि वे मेरे नियमों का उल्लंघन करेंगे, 33तो मैं उनके अपराधों के कारण उन्हें मारूँगा, उन्हें कोड़े लगा कर अधर्म का दण्ड दूँगा। 34किन्तु दाऊद के लिए मेरा प्रेम चिरस्थायी है, मेरी प्रतिज्ञा सदा बनी रहेगी। 35मैं अपनी प्रतिज्ञा भंग नहीं करूँगा, अपने मुख से निकला वचन नहीं बदलूँगा। 36मैंने सदा के लिए अपनी पवित्रता की शपथ खायी, मैं दाऊद के सामने मिथ्यावादी नहीं बनूँगा। 37उसके वंश का कभी अन्त नहीं होगा, उसका सिंहासन मेरे सामने सूर्य की तरह बना रहेगा, 38आकाश में निष्ठावान् साक्षी, सदा बने रहने वाले चन्द्रमा की तरह।" 39फिर भी तूने अपने अभिषिक्त को त्यागा, और अपमानित होने दिया और उस पर अपना क्रोध प्रकट किया। 40तूने अपने सेवक के प्रति अपनी प्रतिज्ञा को भंग किया। तूने उसका मुकुट धूल में दूषित होने दिया। 41तूने उसकी चारदीवारी गिरा दी और उसके गढ़ खंडहर बना दिये। 42उधर से गुजरने वाले उस लूटते हैं। उसके पड़ोसी उस पर ताना मारते हैं। 43तूने उसके शत्रुओं का बाहुबल बढ़ा दिया। तूने उसके विरोधियों को आनन्द प्रदान किया। 44तूने उसकी तलवार की धार भोथरी कर दी। तूने उसे संग्राम में नहीं संभाला। 45तूने उसका वैभव छीन लिया और उसका सिंहासन भूमि पर उलट दिया। 46तूने उसके यौवन के दिन घटाये और उसे कलंकित होने दिया। 47प्रभु! कब तक? क्या तू सदा के लिए छिप गया? क्या तेरा क्रोध आग की तरह जलता रहेगा? 48याद कर कि कितना अल्प है मेरा जीवनकाल! कितने नश्वर हैं तेरे बनाये हुए मनुष्य! 49ऐसा कौन मनुष्य है, जो मृत्यु देखे बिना जीवित रहेगा? जो अधोलोक से अपने प्राण छुड़ा सकेगा? 50प्रभु! कहाँ हैं पूर्वकाल के तेरे उपकार? तूने दाऊद के लिए अपनी सत्यप्रतिज्ञता की शपथ खायी। 51प्रभु! अपने अपमानित सेवकों की सुधि ले; उस प्रजा की सुधि ले, जो मुझे सौंपी गयी है। 52प्रभु! तेरे शत्रुओं ने उनकी निन्दा की; उन्होंने तेरे अभिषिक्त का पग-पग पर अपमान किया। 53प्रभु सदा-सर्वदा धन्य है! आमेन! आमेन!