1राजा का हृदय प्रभु के हाथ में जल धारा की तरह है: वह जिधर चाहता, उसे मोड़ देता है। 2मनुष्य जो कुछ करता है, उसे ठीक समझता है; किन्तु प्रभु हृदय की थाह लेता है। 3बलिदान की अपेक्षा सदाचरण और न्याय प्रभु की दृष्टि में कहीं अधिक महत्व रखते हैं। 4तिरस्कारपूर्ण आँखें और धमण्ड से भरा हुआ हृदय: ये पापी मनुष्य के लक्षण हैं। 5जो परिश्रम करता है, उसकी योजनाएँ सफल हो जाती हैं। जो उतावली करता है, वह दरिद्र हो जाता है। 7दुष्टों की हिंसा उनका विनाश करती है; क्योंकि वे न्याय करना नहीं चाहते। 8अपराधी का मार्ग टेढ़ा है, किन्तु धर्मी का आचरण सच्चा है। 10दुष्ट बुराई की बातें सोचता रहता है, वह अपने पड़ोसी पर भी दया नहीं करता। 11अविश्वासी को दण्डित देख कर, अज्ञानी सावधान हो जाता है। जब बुद्धिमान् को शिक्षा दी जाती है, तो उसका ज्ञान बढ़ता है। 12न्यायप्रिय दुष्ट के घर पर दृष्टि रखता और कुकर्मियों का विनाश करता है। 13जो दरिद्र का निवेदन ठुकराता है, उसकी दुहाई पर कोई कान नहीं देगा। 14गुप्त रूप से दिया हुआ उपहार कोप को शान्त करता है। 15न्याय हो जाने पर धर्मी को आनन्द होता है, किन्तु कुकर्मी आतंकित हो जाते हैं। 16जो समझदारी के मार्ग से भटकता, वह प्रेतों की सभा में पहुँच जाता है। 17भोग-विलास का प्रेमी दरिद्र बनेगा; अंगूरी और दावत का शौकीन कभी धनी नहीं बन सकता। 18दुष्ट धर्मियों का रक्षाषुल्क बन जाते हैं और विश्वासघाती ईमानदारों का। 20बुद्धिमान् के घर बहुमूल्य निधि और तेल का भण्डार है, लेकिन मूर्ख अपनी सम्पत्ति उड़ा देता है। 21जो न्याय और ईमानदारी की खोज में लगा रहता, उसे जीवन, न्याय और सम्मान प्राप्त होगा। 22ज्ञानी किलाबन्द नगर जिता सकता है और जिस गढ़ पर नगर का भरोसा था, उसे ढा सकता है। 23जो अपने मुख और अपनी जिह्वा पर नियन्त्रण रखता, वह अपने को विपत्ति से बचाता है। 24अविश्वासी घमण्डी और ढीठ है, उसके पूरे आचरण में अहंकार बोलता है। 25आलसी का लालच उसे मारेगा; क्योंकि उसके हाथ काम करना नहीं चाहते। 26वह दिन भर लालच के जाल में फँसा रहता है। धर्मी उदारता से दान देता है। 27पापियों का बलिदान घृणित है। दुष्ट उद्देश्य से चढ़ाया बलिदान और भी घृणित है। 29दुष्ट चेहरे से कठोरता झलकती है, किन्तु धर्मी मनुष्य अपने आचरणों का ध्यान रखता है। 30प्रभु के सामने न तो प्रज्ञा; न अन्तर्दृष्टि और न चिन्तन टिक सकता है। 31घुड़सवार सेना युद्ध के दिन के लिए तैयार की जाती है, किन्तु विजय प्रभु के हाथ में है।