1यूदा के राजा सिदकीया के दसवें वर्ष, अर्थात् नबूकदनेज़र के अठारहवें वर्ष यिरमियाह को प्रभु की यह वाणी सुनाई पड़ी। 2उस समय बाबुल के राजा की सेना येरूसालेम पर घेरा डाले पड़ी थी और नबी यिरमियाह यूदा के राजभवन के रक्षादल के प्रांगण में बन्दी था; 3क्योंकि यूदा के राजा सिदकीया ने यह कह कर उसे बन्दी बनाया था, “तुम यह भवियवाणी क्यों करते होः प्रभु कहता है- मैं यह नगर बाबुल के राजा के हाथ देता हूँ और वह इसे अधिकार में कर लेगा। 4यूदा का राजा सिदकीया खल्दैयियों के हाथ से नहीं बच सकेगा, बल्कि वह निश्चय ही बाबुल के राजा के अधीन हो जायेगा। वह उसके सामने लाया जोयेगा, उस से बातें करेगा और उसे अपनी आँखों से देखेगा 5और वह सिदकीया को बाबुल ले जायेगा और वह तब तक वहाँ रहेगा, जब तक मैं उसके पास नहीं आता। यह प्रभु की वाणी है। तुम खल्दैयियों से कितना ही युद्ध क्यों न करो, तुम्हें कोई सफलता नहीं मिलेगी।“ 6यिरमियाह ने कहा, “मुझे प्रभु की यह वाणी सुनाई पड़ी हैः 7तुम्हारे चाचा शल्लूम का पुत्र हनमएल तुम्हारे पास आ कर यह कहेगा- ’आप मेरी अनातोत वाली भूमि खरीद लें, क्योंकि उसे ख़रीदने का अधिकार आप को ही है’। 8तब, जैसा कि प्रभु ने कहा था, मेरा चचेरा भाई हनमएल रक्षादल के प्रांगण में मेरे पास आया और मुझ से यह बोला- ’बेनयामीन देश की अनातोत वाली भूमि खरीद लें, क्योंकि उसके स्वामित्व और ख़रीदारी का अधिकार आप को ही है। उसे अपने लिए ख़रीद लें।“ तब मैं यह जान गया कि वह वाणी प्रभु की ही थी 9और मैंने अपने चचेरे भाई हनमएल से अनातोत वाली भूमि मोल ले ली और उसे सत्रह शेकेल चाँदी तौल कर दी। 10मैने दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किये, उस पर मुहर लगायी, उसे साक्षी लोगों द्वारा प्रमाणित कराया और तराजू पर तौल कर दाम दे दिया। 11मैंने मुहरबन्द पट्टा-जिस पर स्वामित्य और शर्तों का उल्लेख था- और खुला पट्टा लिये और 12अपने चचेरे भाई हनमएल, जिन व्यक्तियों ने पट्टे पर हस्ताक्षर किये थे, उन साक्षियों, तथा जो रक्षा-दल के प्रांगण में बैठे थे, उन सभी यहूदियों के सामने वे पट्टे महसेया के पुत्र नेरीया के बेटे बारूक को दे दिये। 13मैंने उनके सामने बारूक को ये निर्देश दिये, 14“विश्वमण्डल का प्रभु, इस्राएल का ईश्वर यह कहता हैः ये दस्तावेज लो। मुहरबन्द और खुला, दोनों पट्टे लो और इन्हें मिट्टी के एक पात्र में रख दो, जिससे ये लम्बे समय तक सुरक्षित रहें; 15क्योंकि विश्वमण्डल का प्रभु, इस्राएल का ईश्वर यह कहता हैः इस देश में घरों, खेतों और दाखबारियों की खरीद-बिक्री फिर होगी।“ 16नेरीया के पुत्र बारूक को पट्टा देने के बाद मैंने यह कहते हुए प्रभु से प्रार्थना कीः 17“प्रभु-ईश्वर! तूने ही अपने महान् सामर्थ्य और बाहुबल से स्वर्ग और पृथ्वी की रचना की है। तेरे लिए कुछ भी कठिन नहीं है। 18तू असंख्य लोगों पर कृपा करता है, किन्तु पूर्वजों के पापों का बदला उनकी सन्तति से लेता है। महान् और शक्तिशाली ईश्वर! जिसका नाम विश्वमण्डल का प्रभु है, 19जिसकी योजनाएँ महान् और कार्य शक्तिशाली हैं; जिसकी आँखें मनुष्यों की सभी गतिविधियों को देखती रहती हैं और जो प्रत्येक मनुष्य को उसके आचरण और कर्मों के फल के अनुसार प्रतिदान देता है; 20जिसने मिस्र देश में चिह्न और चमत्कार दिखाये हैं और आज तक इस्राएल तथा समस्त मानवजाति में दिखाता रहा है और अपनी कीर्ति स्थापित की है, जो आज भी विद्यमान है ! 21तू अपनी प्रजा इस्राएल को चिन्हों और चमत्कारों के साथ, सुदृढ़ हाथ और बाहुबल से, भारी आतंक प्रदर्शित कर मिस्र देश से निकाल लाया था। 22तूने उन्हें यह देश दिया, जहाँ दूध और मधु की नदियाँ बहती हैं और जिसे देने का वचन उनके पूर्वजों को शपथपूर्वक दिया था और 23उन्होंने यहाँ आ कर इस पर अधिकार किया। किन्तु उन्होंने तेरी बात नहीं मानी और न तेरे विधान का अनुसरण किया। उन्होंने तेरे आदेशों का कुछ भी पालन नहीं किया। इसलिए तूने उन पर यह विपत्ति ढाही है। 24देख, नगर पर विजय पाने के लिए उसकी मोरचाबन्दी की जा रही है। तलवार, अकाल और महामारी के कारण यह नगर खल्दैयियों के हाथ चला जा रहा है, जो इस पर आक्रमण कर रहे हैं। तूने जो कहा था, वही हो रहा है और तू उसे देख रहा है। 25यह नगर खल्दैयियों के हाथ चला जा रहा है, तब भी प्रभु-ईश्वर! तूने मुझे यह कहा है, ‘दाम दे कर यह भूमि खरीद लो और साक्षियों से हस्ताक्षर करा लो’।“ 26इस पर यिरमियाह को प्रभु की यह वाणी सुनाई पड़ीः 27“मैं, प्रभु, सब शरीरधारियों का ईश्वर हूँ। क्या मेरे लिए कुछ असम्भव है? 28इसलिए प्रभु यह कहता है-’मैं यह नगर खल्दैयियों और बाबुल के राजा नबूकदनेज़र के हाथ दे रहा हूँ, जो इस पर अधिकार करेगा। 29वे खल्दैयी लोग, जो इस नगर के विरुद्ध लड़ रहे हैं, यहाँ आ कर इस नगर में आग लगायेंगे और इसे उन घरों के साथ भस्म कर देंगे, जिनकी छतों पर बाल-देवता को धूप चढ़ायी गयी थी और अन्य देवताओं को अर्घ अर्पित किया गया था, जिससे मेरा क्रोध भड़क उठा था। 30इस्राएल और यूदा की प्रजा ने अपनी जवानी के दिनों से ही वही किया है, जो मेरी दृष्टि में बुरा है।’ प्रभु यह कहता है-“इस्राएल की प्रजा ने अपने कर्मों द्वारा मेरा क्रोध भड़काने के अतिरिक्त और कुछ नहीं किया है। 31अपने निर्माण के दिन से ले कर आज तक यह नगर मेरा क्रोध और कोप ही जगाता रहा है, जिसके कारण मैं इसे अपनी आँखों से दूर कर दूँगा। 32इस्राएल और यूदा की प्रजा, उसके राजाओं और राज्याधिकारियों, उसके याजकों और नबियों, यूदा के लागों और येरूसालेम के निवासियों ने अपने पापों से मुझे क्रुद्ध कर दिया है। 33उन्होंने मेरे सामने अपना मुँह नहीं, बल्कि अपनी पीठ कर दी है और यद्यपि मैंने उन्हें बारम्बार समझाया, किन्तु उन्होंने ध्यान नहीं दिया और शिक्षा ग्रहण नहीं की। 34उन्होंने मेरे नाम से प्रसिद्ध निवास में अपनी घृणित मूर्तियों की स्थापना कर उसे अपवित्र कर दिया है। 35उन्होंने अपने पुत्र-पुत्रियों की बलि मोलेक को देने के लिए बेन-हिन्नोम की घाटी में बाल-देवता के पहाड़ी पूजास्थान बनाये, यद्यपि मैंने उन को इसका आदेश नहीं दिया था और न ही मेरे मन में यह विचार आ सकता था कि वे ऐसा घृणित कर्म करें, जिससे यूदा पाप की ओर प्रेरित हो।' 36“इसलिए प्रभु, इस्राएल का ईश्वर इस नगर के विषय में यह कहता है, जिसके सम्बन्ध में तुम यह कहते हो, ‘यह तलवार, अकाल और महामारी के कारण बाबुल के राजा के हाथ जा रहा है’। 37मैं उन्हें उन सब देशों से एकत्रित करूँगा, जहाँ अपने क्रोध, आक्रोश और महाकोप में मैंने उन्हें भगा दिया था। मैं उन्हें पुनः इसी स्थान पर वापस ले आऊँगा और शान्तिपूर्वक रहने दूँगा। 38वे मेरी प्रजा होंगे और मैं उनका ईश्वर होऊँगा। 39मैं उन को एक ही मन और एक ही मार्ग प्रदान करूँगा, जिससे वे अपने और अपने बाद आने वाली सन्तान के कल्याण के लिए सदा मुझ से डरते रहें। 40मैं उनके साथ यह चिरस्थायी विधान निर्धारित करूँगा कि मैं उनकी भलाई करने से कभी विमुख नहीं होँऊँगा। मैं उनके हृदय में अपने प्रति ऐसा भय उत्पन्न करूँगा कि वे मुझ से फिर कभी विमुख नहीं होंगे। 41मुझे उनकी भलाई करने में प्रसन्नता होगी और मैं सच में सम्पूर्ण हृदय और मन से उन्हें इस देश में सुदृढ़ करूँगा। 42“इसलिए प्रभु, यह कहता हैः जिस तरह मैंने इन लोगों पर यह बड़ी विपत्ति ढाही है, उसी तरह मैं इन्हें वह समृद्धि प्रदान करूँगा, जिसका मैं इन्हें वचन दे रहा हूँ। 43इस देश में खेत फिर ख़रीदे जायेंगे, जिसके विषय में तुम यह कह रहे हो, ‘यह उजाड़, जनहीन और पशुरहित हो गया है। यह खल्दैयिायों के हाथ चला गया है।’ 44बेनयामीन के देश में, येरूसालेम के पड़ोस की जगहों और यूदा के नगरों में, पहाड़ी प्रदेश के नगरों, निम्न भूमी के नगरों और नेगेब के नगरों में मूल्य दे कर खेत ख़रीदे जायेंगे, पट्टों पर हस्ताक्षर होंगे, मुहर लगायी जायेगी और उन्हें साक्षियों द्वारा प्रमाणित कराया जायेगा।''