1प्रभु की वाणी मुझे यह कहते हुए सुनाई दी, 2“मानवपुत्र! इस्राएल के चरवाहों के विरुद्ध भवियवाणी करो। भवियवाणी करो और उन से कहोः चरवाहो! प्रभु-ईश्वर यह कहता है! धिक्कार इस्राएल के चरवाहों को! वे केवल अपनी देखभाल करते हैं। क्या चरवाहों को झुुण्ड की देखवाल नहीं करनी चाहिए। 3तुम भेड़ों का दूध पीते हो, उनका ऊन पहनते और मोटे पशुओं का वध करते हो, किन्तु तुम भेड़ों को नहीं चराते। 4तुमने कमजोर भेड़ों को पौष्टिक भोजन नहीं दिया, बीमारों को चंगा नहीं किया, घायलों के घावों पर पटटी नहीं बाँधी, भूली-भटकी हुई भेड़ों को नहीं लौटा लाये और जो खो गयी थीं, उनका पता नहीं लगाया। तुमने भेड़ों के साथ निर्दय और कठोर व्यवहार किया है। 5वे बिखर गयी, क्योंकि उन को चराने वाला कोई नहीं रहा और वे बनैले पशुओं को शिकार बन गयीं। 6मेरी भेड़ें सब पर्वतों और ऊँची पहाडियों पर भटकती फिरती हैं: वे समस्त देश में बिखर गयी हैं, और उनकी परवाह कोई नहीं करता, उनकी खोज में कोई नहीं निकलता। 7“इसलिए चरवाहो! प्रभु की वाणी सुनो। 8प्रभु-ईश्वर यह कहता है -अपने अस्तित्व की शपथ! मेरी भेड़ें, चराने वालों के अभाव में, बनैले पशुओं का शिकार और भक्य बन गयी हैं: मेरे चरवाहों ने भेडो़ं की परवाह नहीं की - उन्होंने भेडांे की नहीं, बल्कि अपनी देखभाल की है; 9इसलिए चरवाहो! प्रभु की वाणी सुनों। 10प्रभु यह कहता हैं; मै उन चरवाहों का विरोधी बन गया हूँ। मैं उन से अपनी भेड़ें वापस माँगूंगा। मैं उनकी चरवाही बन्द करूँगा। वे फिर अपनी ही देखभाल नहीं कर पायेंगे। मैं अपनी भेड़ों को उनके पँजे से छुडाऊँगा और वे फिर उनकी शिकार नहीं बनेंगी। 11“क्योंकि प्रभु-ईश्वर यह कहता है- मैं स्वयं अपनी भेड़ों को सुध लूँगा और उनकी देखभाल करूँगा। 12भेड़ों के भटक जाने पर जिस तरह गडे़रिया उनका पता लगाने जाता है, उसी तरह में अपनी भेडें खोजने जाऊँगा। कुहरे और अँधेरे में जहाँ कहीं वे तितर-बितर हो गयी हैं, मैं उन्हें वहाँ से छुडा लाऊँगा। 13मैं उन्हें राष्ट्रों में से निकाल कर और विदेशों से एकत्र कर उनके अपने देश में लौटा लाऊँगा। मैं उन्हें इस्राएल के पहाड़ों पर, घाटियों में और देश भर के बसे हुए स्थानों पर चाराऊँगा। 14मैं उन्हें अच्छे चरागाहों में ले चलूँगा। वे इस्राएल के पर्वतों पर चरेंगी। वहाँ वे अच्छे चरागाहों में विश्राम करेंगी और इस्राएल के पर्वतों की हरी-भरी भूमि में चरेगी। 15प्रभु कहता है - मैं स्वयं अपने भेड़ें चराऊँगा और उन्हें विश्राम करने की जगह दिखाऊँगा। 16जो भेड़ें खो गयी हैं, मैं उन्हें खोज निकालूँगा; जो भटक गयी हैं, मैं उन्हें लौटा लाऊँगा; घायल हो गयी हैं, उनके घावों पर पट्टी बाँधूगा; जो बीमार हैं, उन्हें चंगा करूँगा; जो मोटी और भली-चंगी हैं, उनकी देखरेख करूँगा। मैं उनका सच्चा चरवाहा होऊँगा। 17“मेरी भेड़ो! तुम्हारे विषय में प्रभु-ईश्वर यह कहता है- मैं एक-एक कर के भेड़ों, मेढो़ और बकरों का- सब का न्याय करूँगा। 18क्या तुम्हारे लिए यही काफ़ी नहीं कि तुम अच्छे चरागाहों में चरो और अपने चरागाहों का शेष भाग अपने पाँवों से रौंदो, स्वच्छ पानी पियो और शेष पानी अपने पाँवों से मथ दो? 19क्या मेरी भेड़ें तुम्हारे पैरों से रौंदे चरागाहों में चरे और तुम्हारे पाँवों से मथा पानी पिये? 20“इसलिए प्रभु-ईश्वर उन से यह कहता है- मोटी और दुबली भेड़ों का मैं ही न्याय करूँगा। 21तुम तब तक सभी कमज़ोर भेड़ों को अपनी बग़ल और कन्धे से धक्के देती और अपने सींगों से मारती जाती हो, जब तक तुम उन्हें बाहर नहीं भगा देतीं। 22इसलिए मैं अपनी भड़ों की रक्षा करूँगा और वे कभी दूसरों की शिकार नहीं होंगी और मैं भेड़ और भेड़ के बीच न्याय करूँगा। 23मैं उनके लिए एक चरवाहे, अपने सेवक दाऊद को नियुक्त करूँगा और वह उन को चरायेगा और उनका चरवाहा होगा। 24मैं, प्रभु, उनका ईश्वर होऊँगा और मेरा सेवक दाऊद उनका शासक होगा। यह मैं, प्रभु ने कहा है। 25“मैं उनके साथ शान्ति का विधान स्थापित करूँगा तथा देश से बनैले पशुओं का निकाल बाहर करूँगा, जिससे वे उजाड़खण्ड में सुरक्षित रह सकें और जंगलों में सो सकें। 26मैं उन को और अपनी पहाड़ी के चारों ओर के स्थानों को आशीर्वाद दूँगा; मैं समय पर वर्षा कराऊँगा; वह आशीर्वाद की वर्षा होगी। 27भूमि के वृक्ष अपने फल प्रदान करेंगे, पृथ्वी अपनी उपज देगी और वे अपने देश में सुरक्षित रहेंगी। जब मैं उनका जूआ तोड़ दूँगा और उनके हाथ से मुक्त कर दूँगा, जिन्होंने उन्हें दास बनाया था, तो वे यह समझेंगी कि मैं ही प्रभु हूँ। 28वे फिर कभी राष्ट्रों की शिकार नहीं बनेगी, न ही देश के पशु उन्हें अपना आहार बनायेंगे। वे सुरक्षित हो कर निवास करेंगी और कोई उन्हें डरा नहीं सकेगा। 29मैं उन्हें प्रसिद्ध उद्यान दूँगा, जिससे वे फिर कभी देश में भूखों नहीं मरेगी और न उन्हें राष्ट्रों के अपमान सहना पड़ेगा। 30तब वे यह समझ जायेंगी कि मैं, उनका प्रभु-ईश्वर, उनके साथ हूँ और कि वे, इस्राएल का घराना, मेरी प्रजा हैं। यह प्रभु-ईश्वर की वाणी है। 31तुम्हीं मेरे भेड़ें हो- मेरे चरागाह की भेड़ें और मैं तुम्हारा ईश्वर हूँ। यह प्रभु-ईश्वर की वाणी हं।“