1" आओ! हम प्रभु के पास लौटें। उसने हम को घायल किया, वही हमें चंगा करेगा; उसने हम को मारा है, वही हमारे घावों पर पट्टी बाँधेगा। 2वह हमें दो दिन बाद जिलायेगा; तीसरे दिन वह हमें उठोयेगा और हम उसके सामने जीवित रहेंगे। 3आओ! हम प्रभु का ज्ञान प्राप्त करने का प्रयत्न करें। उसका आगमन भोर की तरह निश्चित है। वह पृथ्वी को सींचने वाली हितकारी वर्षा की तरह हमारे पास आयेगा।" 4एफ्राईम! मैं तुम्हारे लिए क्या करूँ? यूदा! मैं तुम्हारे लिए क्या करूँ? तुम्हारा प्रेम भोर के कोहरे के समान है, ओस के समान, जो शीघ्र ही लुप्त हो जाती है। 5इसलिए मैंने नबियों द्वारा तुम्हें घायल किया। अपने मुख के शब्दों द्वारा तुम्हें मारा है; 6क्योंकि मैं बलिदान की अपेक्षा प्रेम और होम की अपेक्षा ईश्वर का ज्ञान चाहता हूँ। 7आदाम में उन्होंने मेरा व्यवस्थान भंग किया है, वहाँ उन्होंने मेरे साथ विश्वासघात किया है। 8गिलआद दुष्कर्मियों के लिए रक्त से सना हुआ नगर है। 9और याजक, जैसे डाकू मार्ग में घात लगा कर यात्रियों की प्रतीक्षा करते हैं, ये याजक वैसे ही दल बना कर सिखेम के मार्ग में हत्या करते हैं; कितने घृणास्पद हैं। उनके कार्य! 10इस्राएल के घराने में मैंने एक भयानक बात देखी है; वहाँ एफ्राईम वेश्यावृत्ति करता है और इस्राएल भी कलुशित हो गा है। 11यूदा! तुम्हारे लिए भी न्याय का समय नियत किया गया है।