1ईसा, मन्दिर से निकल कर, चले जा रहे थे कि उनके शिष्य उनके पास आये और उन्होंने मन्दिर की इमारतों की ओर उनका ध्यान अकर्षित किया। 2ईसा ने उन से कहा, "तुम यह सब देख रहे हो न? मैं तुम लोगों से यह कहता हूँ, यहाँ एक पत्थर पर दूसरा पत्थर पड़ा नहीं रहेगा- सब ढ़ा दिया जायेगा।" 3जब ईसा जैतून पहाड़ पर पहुँच कर बैठ गये, तो शिष्य एकान्त में उनके पास आये और बोले, "हमें बताइए, यह कब होगा ? आपके आगमन और युग के अन्त का चिह्न क्या होगा?" 4ईसा ने उन्हें उत्तर दिया, "सावधान रहो। तुम्हें कोई नहीं बहकाये, 5क्योंकि बहुत-से लोग मेरा नाम ले कर आयेंगे और कहेंगे- मैं मसीह हूँ, और वे बहुतों को बहका देंगे। 6तुम युद्धों की चरचा सुनोगे और युद्धों के बारे में अफवाहें सुनोगे। इस से नहीं घबराओगे क्योंकि ऐसा हो जाना अनिवार्य है। परन्तु यही अन्त नहीं है 7राष्ट्र के विरुद्ध राष्ट्र उठ खड़ा होगा और राज्य के विरुद्ध राज्य। जहाँ-तहाँ अकाल, महामारियाँ और भूकम्प होते रहेंगे। 8यह सब विपत्तियों का आरम्भ मात्र होगा। 9"उस समय लोग तुम्हें पकड़वा कर घोर यन्त्रणा देंगे और मार डालेंगे। मेरे नाम के कारण सब राष्ट्र तुम से बैर करेंगे। 10"तब बहुत-से लोग विचलित हो जायेंगे। वे एक दूसरे को पकड़वायेंगे और एक दूस़रे से बैर करेंगे। 11बहुत-से झूठे नबी प्रकट होंगे और बहुतों कों बहकायेंगे। 12अधर्म बढ़ने से लोगों में प्रेम-भाव घट जायेगा, 13किन्तु जो अन्त तक धीर बना रहेगा, उसी को मुक्ति मिलेगी। 14सारे संसार में राज्य के इस सुसमाचार का प्रचार किया जायेगा, जिससे सब राष्ट्रों को इसका साक्ष्य मिले और तब अन्त आ जायेगा। 15"जब तुम लोग मन्दिर में उजाड़ का वह वीभत्स दृश्य देखोगे, जिसकी चरचा नबी दानिएल ने की- पढ़ने वाला समझ ले - 16तो, जो लोग यहूदिया में हों, वे पहाड़ों पर भाग जायें; 17जो छत पर हो, वह अपने घर का समान लेने नीचे न उतरे; 18जो खेत में हो, वह अपनी चादर ले आने के लिए न लौटे। 19उनके लिए शोक, जो उन दिनों गर्भवती या दूध पिलाती होंगी! 20प्रार्थना करो कि तुम लोगों को जाड़े के समय अथवा विश्राम के दिन को भागना न पडे; 21क्योंकि उन दिनों ऐसा घोर संकट होगा, जैसा संसार के आरंभ से अब तक न कभी हुआ है और न कभी होगा। 22यदि वे दिन घटाये न जाते, तो कोई प्राणी नहीं बचता; किन्तु चुने हुए लोगों के कारण वे दिन घटा दिये जायेंगे। 23"यदि उस समय कोई तुम लोगों से कहें, ’देखो! मसीह यहाँ हैं अथवा ’वह वहाँ हैं, तो विश्वास नहीं करोगे; 24क्योंकि झूठे मसीह तथा झूठे नबी प्रकट होंगे और ऐसे महान् चिह्न तथा चमत्कार दिखायेंगे कि यदि सम्भव होता, तो वे चुने हुए लोगों को भी बहकाते। 25देखो, मैने तुम्हें पहले ही सचेत किया है। 26"यदि वे तुम लोगों से कहें, ’देखो, वह निर्जन प्रदेश में है, तो वहाँ नहीं जाओगे; अथवा, ’वह यहाँ कोठरी में है,, तो विश्वास नहीं करोगे; क्योंकि 27जैसे बिजली पूर्व से निकल कर पश्चिम तक चमकती है, वैसे ही मानव पुत्र का आगमन होगा। 28"जहाँ कहीं लाश होगी, वहाँ गीध इकट्ठे हो जायेंगे। 29"उन दिनों के संकट के तुरन्त बाद सूर्य अन्धकारमय हो जायेगा, चन्द्रमा प्रकाश नहीं देगा, तारे आकाश से गिर जायेंगे और आकाश की शक्तियाँ विचलित हो जायेंगी। 30तब आकाश में मानव पुत्र का चिह्न दिखाई देगा। पृथ्वी के समस्त राष्ट्र छाती पीटेंगे और मानव पुत्र को अपार सामर्थ्य और महिमा के साथ आकाश के बादलों पर आते हुए देखेंगे। 31वह तुरही की तुमुल ध्वनि के साथ अपने दूतों को भेजेगा और वे चारों दिशाओं से, आकाश के कोने-कोन से, उसके चुने हुए लोगों को एकत्र करेंगे। 32"अंजीर के पेड़ से शिक्षा लो। जब उसकी टहनियाँ बन जाती हैं और उन में अंकुर फूटने लगते हैं, तो तुम जान जाते हो कि गरमी आ रही है। 33इसी तरह जब तुम लोग यह सब देखोगे, तो जान लो कि वह निकट है, द्वार पर ही है। 34मैं तुम से यह कहता हूँ कि इस पीढ़ी का अंत हो जाने के पूर्व ही ये सब बातें घटित हो जायेंगी। 35आकाश और पृथ्वी टल जायें, तो टल जायें, परन्तु मेरे शब्द नहीं टल सकते। 36"उस दिन और उस घड़ी के विषय में कोई नहीं जानता- न तो स्वर्ग के दूत और न पुत्र। केवल पिता ही जानता है। 37"जो नूह के दिनों में हुआ था, वही मानव पुत्र के आगमन के समय होगा। 38जलप्रलय के पहले, नूह के जहाज़ पर चढ़ने के दिन तक, लोग खाते-पीते और शादी-ब्याह करते रहे। 39जब तक जलप्रलय नहीं आया और उसने सबको बहा नहीं दिया, तब तक किसी को इसका कुछ भी पता नहीं था। मानव पुत्र के आगमन के समय वैसा ही होगा। 40उस समय दो पुरुष खेत में होंगे- एक उठा लिया जायेगा और दूसरा छोड़ दिया जायेगा। 41दो स्त्रियाँ चक्की पीसती होंगी- एक उठा ली जायेगी और दूसरी छोड़ दी जायेगी। 42"इसलिए जागते रहो, क्योंकि तुम नहीं जानते कि तुम्हारे प्रभु किस दिन आयेंगे। 43यह अच्छी तरह समझ लो- यदि घर के स्वामी को मालूम होता कि चोर रात के किस पहर आयेगा, तो वह जागता रहता और अपने घर में सेंध लगने नहीं देता। 44इसलिए तुम लोग भी तैयार रहो, क्योंकि जिस घड़ी तुम उसके आने की नहीं सोचते, उसी घड़ी मानव पुत्र आयेगा। 45"कौन ऐसा ईमानदार और बुद्धिमान् सेवक है, जिसे उसके स्वामी ने अपने नौकर-चाकरों पर नियुक्त किया है, ताकि वह समय पर उन्हें रसद बाँटा करे? 46धन्य है वह सेवक, जिसका स्वामी आने पर उसे ऐसा करता हुआ पायेगा! 47मैं तुम लोगों से यह कहता हूँ - वह उसे अपनी सारी सम्पत्ति पर नियुक्त करेगा। 48"परन्तु यदि वह बेईमान सेवक अपने मन में कहे, मेरा स्वामी आने में देर करता है, 49और वह दूसरे नौकरों को पीटने और शराबियों के साथ खाने-पीने लगे, 50तो उस सेवक का स्वामी ऐसे दिन आयेगा, जब वह उसकी प्रतिक्षा नहीं कर रहा होगा और ऐसी घड़ी, जिसे वह नहीं जान पायेगा। 51तब वह स्वामी उसे कोड़े लगवायेगा और ढोंगियों का दण्ड देगा। वहाँ वे लोग रोयेंगे और दाँत पीसते रहेंगे।