1आप लोगों के बीच हो रहे व्यभिचार की चरचा चारों ओर फैल गयी है- ऐसा व्यभिचार जो गैर-यहूदियों में भी नहीं होता। किसी ने अपने पिता की पत्नी को रख लिया है। 2तब भी आप घमण्ड में फूले हुए हैं! आप को शोक मनाना और जिसने यह काम किया, उसका बहिष्कार करना चाहिए था। 3मैं शरीर से अनुपस्थित होते हुए भी आत्मा से आप लोगों के बीच हूँ। जिसने यह काम किया है, मैं उसका न्याय कर चुका हूँ, मानों मैं वास्तव में वहाँ उपस्थित हूँ। 4और मेरा निर्णय यह है: प्रभु ईसा के नाम पर हम-अर्थात् आप लोग और मैं आत्मा से - एकत्र हो जायेंगे 5और अपने प्रभु ईसा के अधिकार से उस व्यक्ति को शैतान के हवाले कर देंगे, जिससे उसके शरीर का विनाश हो, किन्तु प्रभु के दिन उसकी आत्मा का उद्धार हो। 6आप लोगों का आत्मसन्तोष आप को शोभा नहीं देता। क्या आप यह नहीं जानते कि थोड़ा-सा ख़मीर सारे सने हुए आटे को ख़मीर बना देता है? 7आप पुराना ख़मीर निकाल कर शुद्ध हो जायें, जिससे आप नया सना हुआ आटा बन जायें। आप को बेख़मीर रोटी-जैसा बनना चाहिए क्योंकि हमारा पास्का का मेमना अर्थात् मसीह बलि चढ़ाये जा चुके हैं। 8इसलिए हमें न तो पुराने खमीर से और न बुराई और दुष्टता के खमीर से बल्कि शुद्धता और सच्चाई की बेख़मीर रोटी से पर्व मनाना चाहिए। 9मैंने आप लोगों को अपने पत्र में लिखा कि व्यभिचारियों से मेल-जोल न रखें। 10मेरा अभिप्राय यह नहीं था कि आप इस संसार के व्यभिचारियों, लोभियों, धोखेबाजों, या मूतिपूजकों से कोई भी सम्बन्ध नहीं रखें। ऐसा करने के लिए आप को संसार को ही छोड़ देना होता, 11बल्कि मैंने लिखा यदि ’भाई’ कहलाने वाला कोई व्यक्ति व्यभिचारी, लोभी, मूर्तिपूजक, निन्दक, शराबी या धोखेबाज हैं, तो उसके साथ भोजन तक नहीं करे। 12(12-13) बाहर वालों का न्याय करना मेरा काम नहीं। ईश्वर बाहर वालों का न्याय करेगा। घर वालों का न्याय करना आपका काम है - अपने बीच से दुष्ट को निकाल दो।