1स्वामियो! आप लोग यह जान कर अपने दासों के साथ न्यायपूर्ण और उचित व्यवहार करें कि स्वर्ग में आपका भी एक स्वामी है। 2आप लोग सजग हो कर प्रार्थना और धन्यवाद में लगे रहें। 3आप हमारे लिए भी प्रार्थना करें, जिससे ईश्वर हमें सुसमाचार सुनाने का तथा मसीह का रहस्य, जिसके लिए मैं अभी बेडि़यों से जकड़ा हुआ हूँ, घोषित करने का सुअवसर प्रदान करे। 4आप प्रार्थना करें, जिससे मैं वह रहस्य प्रकट कर सकूँ, जैसा कि मेरा कर्तव्य है। 5आप लोग बाहर वालों के साथ बुद्धिमानी से व्यवहार करें। वर्तमान समय से पूरा-पूरा लाभ उठायें। 6आपकी बातचीत सदा मनोहर और सुरूचिपूर्ण हो और आप लोग प्रत्येक को समुचित उत्तर देना सीखें। 7मेरे ईमानदार सहयोगी और मसीह की सेवा में मेरे साथी, हमारे प्रिय भाई तुखिकुस आप लोगों को मेरे विषय में बतायेंगे। 8मैं उन्हें आप लोगों के पास इसलिए भेज रहा हूँ कि आप मेरे विषय में पूरा समाचार जानें और इसलिए भी कि वह आप को ढारस बँधायें। 9इनके साथ आपके देशवासी, हमारे ईमानदार और प्रिय भाई ओनेसिमुस भी जा रहे हैं। ये दोनों आप लोगों को यहाँ का पूरा हाल बतायेंगे। 10आरिस्तार्खुस, जो मेरे साथ कैदी हैं, और बरनाबस के चचेरे भाई मारकुस आप लोगों को नमस्कार कहते हैं। मारकुस के विषय में आप को अनुदेश मिल चुके हैं। यदि वह आप लोगों के यहाँ आयें, तो उनका स्वागत करें। 11येसुस युस्तुस भी आप लोगों को नमस्कार करते हैं। यहूदियों में ये तीन ही ईश्वर के राज्य के विस्तार के लिए मेरे साथ काम करत रहें हैं। इनसे मुझे बड़ी सांत्वना मिली है। 12आपके देशवासी एपाफ्रास आप लोगों को नमस्कार कहते हैं। ईसा मसीह के यह सेवक बड़े मनोयोग से निरन्तर आप लोगों के लिए प्रार्थना करते हैं, जिससे आप लोग सब बातों में ईश्वर की इच्छा पूर्ण रूप से पूरी करने में सुदृढ़ बने रहें। 13मैं इनके विषय में यह साक्ष्य दे सकता हूँ कि यह आप लोगों के लिए और लौदीकिया तथा हियेरापोलिस के निवासियों के लिए बहुत कष्ट उठा रहे हैं। 14प्रिय वैद्य लूकस और देमास आप लोगों को नमस्कार कहते हैं। 15लौदीकिया के भाइयों को नुम्फा और उनके घर में एकत्र होने वाली कलीसिया को नमस्कार। 16जब यह पत्र आप लोगों के यहाँ पढ़ कर सुनाया जा चुकेगा, तो आप ऐसा प्रबन्ध करें कि यह लौदीकिया में भी पढ़ कर सुनाया जाये और लौदीकिया के नाम लिखा हुआ पत्र आप लोग भी पढ़ें। 17आप लोग अरखि़प्पुस से यह कहें, "आप को प्रभु के नाम पर जो धर्मसेवा सौंपी गयी है, उसे अच्छी तरह पूरा करने का ध्यान रखें"। 18यह नमस्कार पौलुस का है- यह मेरे अपने हाथ का लिखा हुआ है। मेरी बेडि़याँ याद रखें। आप लोगों पर कृपा बनी रहे!