हिन्दी बाइबिल व्याख्या

Hindi Bible Commentary

फादर शैलमोन आन्टनी

लूकस 16

अ. बेईमान कारिन्दा की कहानी।

1. (1-8) बेईमान कारिन्दा ने क्या किया।

क. उसने अपने शिष्यों से यह भी कहाः

यहाँ येसु मिश्रित समूह से बात कर रहे हैं (उनके शिष्य लूकस 16ः1 और फरीसी लूकस 16ः14)। पाठ को दो भागों में विभाजित किया जा सकता हैः दृष्टांत (पद 1-8) और अनुप्रयोग (पद 9-13)। येसु के अधिकांश दृष्टांतों में, मुख्य पात्र या तो ईश्वर, मसीह, या किसी अन्य सकारात्मक चरित्र का प्रतिनिधि होता है। इस दृष्टांत में सभी पात्र दुष्ट हैं। इससे हमें यह समझना चाहिए कि येसु हमें पात्रों के व्यवहार का अनुकरण करने के लिए प्रेरित नहीं कर रहे हैं, बल्कि एक व्यापक सिद्धांत को समझाने का प्रयास कर रहे हैं। विलियम बार्कले इस दृष्टांत को ’एक बुरे कारिन्दा का अच्छा उदाहरण’ शीर्षक देते हैं।

ख. एक धनी व्यक्ति के पास एक कारिन्दा थाः

कारिन्दा को मालिक के सभी संसाधनों, विशेषकर धन और संपत्ति पर अधिकार प्राप्त था, और वह मालिक के नाम पर लेन-देन कर सकता था। कारिन्दा से विश्वसनीय व्यक्ति होने की अपेक्षा की जाती थी, लेकिन वह मालिक की संपत्ति को फिजूलखर्ची कर रहा था। परिणामस्वरूप, मालिक ने उसे नौकरी से निकालने से पहले हिसाब-किताब प्रस्तुत करने को कहा।

“अपने कार्यों का हिसाब दो” ये शब्द सभी को सुनने पड़ेंगे, चाहे वे पापी हों या संत। हम सभी को अपने समय, अपनी प्रतिभा, अपनी संपत्ति और अपने प्रभाव के प्रबंधन का हिसाब देना होगा। इन चीजों को बर्बाद करना एक घोर अपराध है। एक और सच्चाई यह है कि हममें से प्रत्येक के लिए, एक दिन हमारे कार्यों का प्रबंधन समाप्त हो जाएगा।

ईश्वर प्रत्येक व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार प्रतिफल देगा (रोमियों 2ः6); प्रत्येक व्यक्ति ईश्वर के प्रति जवाबदेह है (रोमियों 14ः12); न्याय के दिन प्रत्येक व्यक्ति को शरीर में किए गए अच्छे या बुरे कार्यों का प्रतिफल मिलेगा (2 कुरिन्थियों 5ः10); “धोखा न खाओ; ईश्वर का उपहास नहीं किया जा सकता, क्योंकि तुम जो बोओगे वही काटोगे। यदि तुम अपने शरीर के लिए बोओगे, तो शरीर से विनाश काटोगे; परन्तु यदि तुम आत्मा के लिए बोओगे, तो आत्मा से अनन्त जीवन काटोगे” (गलतियों 6ः7-8); “और ईश्वर के सामने कोई प्राणी छिपा नहीं है, बल्कि सब नंगे और खुले हुए हैं, उस एक के सामने जिसे हमें हिसाब देना है” (इब्रानियों 4ः13)।

ग. मैं क्या करूँ? क्योंकि मेरा स्वामी मुझे कारिन्दगरी से हटा रहा है।ः

जब कारिन्दा को पता चला कि उससे हिसाब लिया जाएगा, तो उसे यह भी पता था कि उसका कुप्रबंधन उजागर हो जाएगा। उसे यह भी पता था कि अन्य विकल्प उसके लिए आकर्षक नहीं थे (मैं खुदाई नहीं कर सकता; भीख माँगने में मुझे शर्म आती है)। इसलिए चतुर कारिन्दा, यह जानते हुए कि उसे कारिन्दगरी पद से हटा दिया जाएगा, इस धरती पर अपना भविष्य सुरक्षित करना चाहता था।

घ. इसलिए उसने अपने स्वामी के सभी देनदारों को अपने पास बुलायाः

इस प्रकार, कारिन्दा ने अपने स्वामी के देनदारों से उनके वास्तविक बकाया से कम राशि में हिसाब निपटाकर मित्रता स्थापित की। इस प्रकार कारिन्दा, यह जानते हुए कि उससे हिसाब लिया जाएगा, अपने वर्तमान पद का उपयोग अपने जीवन के अगले चरण की तैयारी के लिए किया।

ङ. इसलिए स्वामी ने बेईमान कारिन्दा की प्रशंसा की क्योंकि उसने चतुराई से काम लिया थाः

हालाँकि स्वामी ने उसके आचरण को स्वीकार नहीं किया, लेकिन वास्तव में कारिन्दा की चतुराई को स्वीकार किया। येसु ने यह विचार जोड़ा कि इस संसार के पुत्र (अविश्वासी जो केवल सांसारिक मानसिकता वाले थे) ईश्वर के लोगों (विश्वासी जो स्वर्गीय मानसिकता वाले थे) की तुलना में अपने पास मौजूद चीजों के प्रबंधन में अधिक बुद्धिमान, साहसी और दूरदर्शी थे - अधिक चतुर थे।

येसु का आकलन आज भी सत्य हैः इस संसार के पुत्र प्रकाश के पुत्रों की तुलना में अपनी पीढ़ी में अधिक चतुर होते हैं। यदि हम ईश्वर के राज्य की उसी शक्ति और उत्साह से खोज करते जिस प्रकार इस संसार के पुत्र लाभ और सुख-सुविधाओं की खोज करते हैं, तो हम एक बिल्कुल भिन्न संसार में रहते। यह कहा जा सकता है कि यह कलीसिया के लिए शर्म की बात है कि कोका-कोला येसु मसीह के सुसमाचार से कहीं अधिक व्यापक रूप से वितरित है।

प्रकाश के पुत्रों को प्रेम, क्षमा, करुणा, अच्छे कर्मों का प्रदर्शन करके और अपने समय, प्रतिभा और संसाधनों का सही उपयोग करके स्वर्ग के उत्तराधिकारी बनने के लिए जीना चाहिए। उस चतुर कारिन्दा की तरह जिसने अपने स्वामी के ऋणियों से मित्रता की, ताकि नौकरी छूटने के बाद वे उसकी देखभाल करने के लिए बाध्य हों, प्रकाश के पुत्रों को अच्छे कर्म करने चाहिए ताकि मृत्यु के बाद उनका स्वर्ग में स्वागत हो।

2. (9) अनंत काल को ध्यान में रखते हुए वर्तमान में धन का उपयोग करना।

क. अधर्मी धन से अपने लिए मित्र बनाओः

येसु ने इस दृष्टांत के सिद्धांत को आगे बढ़ाते हुए हमें याद दिलाया कि हमें अपने वर्तमान संसाधनों का उपयोग अनंत काल के लिए योजना बनाने में करना चाहिए।

अधर्मी धनः “‘मैमन’ शब्द अरामी शब्द मैमन से आया है, जिसका मूल अर्थ था, ‘वह जिस पर कोई भरोसा करता है,’ अतः धन।” (पेट)

येसु ने इसे अधर्मी धन कहा क्योंकि “धन बहुत कुछ वादा करता है, पर कुछ नहीं करताः यह आशा और विश्वास जगाता है, पर धोखा देता हैः मनुष्य को सुख के लिए इस पर निर्भर बनाकर, यह उसे ईश्वर के उद्धार और अनन्त महिमा से वंचित कर देता है।” (क्लार्क)

बेईमान कारिन्दा कई मायनों में एक अच्छा उदाहरण था। पहला, वह जानता था कि उसे अपने जीवन का हिसाब देना होगा और उसने इसे गंभीरता से लिया। दूसरा, उसने अपने वर्तमान पद का लाभ उठाकर एक सुखमय भविष्य की व्यवस्था की। इसी प्रकार मसीहियों को भी अनन्त जीवन प्राप्त करने के लिए यह चतुराई दिखानी चाहिए।

ख. जिससे उसके समाप्त हो जाने पर वे परलोक में तुम्हारा स्वागत करेंः

दुनिया वित्तीय योजनाकारों और सलाहकारों से भरी पड़ी है; और मसीहियों के लिए यह अच्छा है कि वे अपने धन का बुद्धिमानी से उपयोग करना सीखें। लेकिन जब अधिकांश मसीही बुद्धिमान धन प्रबंधन की बात करते हैं, तो वे सबसे महत्वपूर्ण प्रकार के दीर्घकालिक निवेश का अभ्यास करना भूल जाते हैंः अनन्त जीवन, एक अनन्त घर को ध्यान में रखते हुए निवेश करना।

अंतिम क्षण की प्रतीक्षा करने के बजाय, अभी प्रभु के लिए अपने संसाधनों का निवेश करें।

दुनिया की दौलत, समय, संसाधन वगैरह आपके अपने नहीं हैं, बल्कि ये आपको दिए गए हैं। इन चीज़ों का सही इस्तेमाल करके आप स्वर्ग में ऐसी दौलत पा सकते हैं जो हमेशा के लिए आपकी होगी।

3. (10-12) छोटी-छोटी बातों में ईमानदार है कि बड़ी बातों में ईमानदार रहा जाएगा।

क. पद 10 जो छोटी-छोटी बातों में ईमानदार है, वह बड़ी बातों में भी ईमानदार होगाः

यह इस विचार को उजागर करता है कि हम छोटी ज़िम्मेदारियों को कैसे निभाते हैं, यह बड़ी ज़िम्मेदारियों को निभाने की हमारी क्षमता का सूचक है। छोटे कार्यों में वफ़ादारी विश्वास और विश्वसनीयता का निर्माण करती है, जो बड़ी ज़िम्मेदारियों को सौंपे जाने के लिए आवश्यक हैं।

ख. पद 11 यदि तुम बेईमानी से अर्जित (सांसारिक) धन के प्रति ईमानदार नहीं रहे, तो सच्चा (स्वर्गीय) धन तुम्हें कौन सौंपेगा?

यह पद सांसारिक धन के प्रबंधन और आध्यात्मिक ज़िम्मेदारियों के लिए हमारी तत्परता के बीच संबंध को और भी स्पष्ट करता है। यह हमें यह विचार करने के लिए प्रेरित करता है कि क्या हम आध्यात्मिक विकास की तुलना में भौतिक लाभ को प्राथमिकता दे रहे हैं, और हमें याद दिलाता है कि सच्चा धन ईश्वर के साथ हमारे संबंध में पाया जाता है।

ग. पद 12 यदि तुम दूसरों की चीज़ों के प्रति वफ़ादार नहीं रहे, तो तुम्हें तुम्हारी अपनी चीज़ें कौन देगा?ः

हमारे पास जो कुछ भी है, वह ईश्वर का है; वह ईश्वर द्वारा दिया गया है। इसलिए यदि हम इनके प्रति वफ़ादार नहीं हैं, तो ईश्वर हमें सच्चा धन नहीं दे सकता जो अनन्त काल तक हमारा रहेगा। इस मामले में निष्ठावान रहने से हमें वह आशीष मिलेगी जो हमारी अपनी है (जो तुम्हें तुम्हारा हक देगा)।

4. (13) कोई भी एक से अधिक स्वामी के प्रति निष्ठावान नहीं रह सकता।

क. कोई भी सेवक दो स्वामियों की सेवा नहीं कर सकताः

दो स्वामियों का होना दो नौकरियाँ करने जैसा नहीं है। येसु स्वामी और दास के संबंध को ध्यान में रख रहे हैं। एक दास एक ही समय में दो स्वामियों का नहीं हो सकता।

किसी के पास धन और ईश्वर दोनों हो सकते हैं; लेकिन कोई धन और ईश्वर दोनों की सेवा नहीं कर सकता।

निःसंदेह, येसु यहाँ हृदय की बात कर रहे थे। क्या आपका हृदय ईश्वर पर है या धन पर? जहाँ आपका खजाना है, वहीं आपका हृदय भी होगा (मत्ती 6ः21)।

ख. आप ईश्वर और धन दोनों की सेवा नहीं कर सकतेः

कुछ लोग सोचते हैं कि केवल इसलिए कि वे धनी नहीं हैं, वे धन के दास नहीं हैं। लेकिन धन की सेवा करने के लिए धनी होना आवश्यक नहीं है; गरीबों में भी उतना ही लालच और लोभ की क्षमता होती है जितना कि अमीरों में। ईश्वर की सेवा केलिए धन का इस्तेमाल करना पाप नहीं है। शायद, येसु ने यह इसलिए कहा क्योंकि फरीसी धन के प्रेमी थे (लूकस16ः14)।

5. (14-15) येसु फरीसियों के उपहास का उत्तर देते हैं।

क. और उन्होंने येसु की हॅसी उड़ाते थेः

फरीसियों का उपहास उनके स्वार्थ पर आधारित था। वे धन के लोभी थे। अक्सर हम येसु के संदेश को इसलिए नकार देते हैं क्योंकि वह हमारे जीवन से बहुत मिलता-जुलता होता है।

“धनवान बनने की चाह रखने वाले प्रलोभन में पड़ जाते हैं और अनेक निरर्थक और हानिकारक इच्छाओं के जाल में फंस जाते हैं, जो लोगों को बर्बादी और विनाश की ओर ले जाती हैं। क्योंकि धन का लोभ हर प्रकार की बुराई की जड़ है, और धनवान बनने की लालसा में कुछ लोग विश्वास से भटक गए हैं और अपने आप को अनेक पीड़ाओं से घायल कर लिया है” (1तिमथी 6ः9-10)

खः तुम वे हो जो मनुष्यों के सामने तो धर्मी होने का ढ़ोंग रचते हो, परन्तु ईश्वर तुम्हारा ह्रदय जानता है।ः

मनुष्यों के सामने अपने आप को धर्मी ठहराना एक बात है, क्योंकि मीठे शब्द और “प्यार भरी” मुस्कान मनुष्यों को धोखा दे सकती है। परन्तु ईश्वर को धोखा नहीं दिया जा सकता, क्योंकि वह तुम्हारे हृदयों को जानता है।

मनुष्य बाहरी रूप देखता है, परन्तु ईश्वर हृदय को परखता है (1 सामूएल 16ः7); मैं वह ईश्वर हूँ जो मन और हृदय की जाँच करता है (यिरमियाह 17ः10; प्रकाशना 2ः23)।

ग. जो बात मनुष्यों की दृष्टि में महत्व रखती है, वह ईश्वर की दृष्टि में घृणित हैः

ईश्वर हमारे हृदयों का न्याय स्वर्गीय मूल्यों के अनुसार करता है। मनुष्य धन-दौलत या आध्यात्मिकता के सार्वजनिक प्रदर्शन को देखकर लोगों का सम्मान करते हैं।

6. (16-18) ईश्वर के नियम का अपरिवर्तनीय स्वरूप।

क. योहन तक संहिता और नबीयों का समय थाः

यह आयत पुराने नियम से नए नियम में हुए महान ऐतिहासिक बदलाव के बारे में बताती है। येसु ने संकेत दिया कि योहन की सेवकाई ईश्वर के कार्य के एक महान पहलू के अंत का प्रतीक है। उस समय से (योहन की सेवकाई के साथ समाप्त होने वाले समय से) एक नई वाचा का सुसमाचार प्रस्तुत किया गया है, जिसका क्रम व्यवस्था से भिन्न है, फिर भी वह व्यवस्था को पूरा करता है।

ख. ईश्वर के राज्य की घोषणा की जाती है, और हर कोई बलपूर्वक उसमें प्रवेश करने का प्रयास करता हैः

यहाँ ‘बल’ के लिए प्रयुक्त यूनानी शब्द ‘बियाज़ो’ है, जिसका अर्थ हो सकता हैः (1) “हिंसा करना, प्रभुत्व जमाना, विवश करना,” (2) “बलपूर्वक कोई लक्ष्य प्राप्त करना, बल का प्रयोग करना,” (3) “उत्साह से किसी चीज़ का पीछा करना, लगन से खोजना, कड़ी मेहनत करना,” या (4) “दबाव डालना (जोरदार तरीके से)।” इसका मतलब है कि दुश्मन हमसे राज्य छीनने की हर मुमकिन कोशिश करेगा, लेकिन हम लोगों को सक्रिय रूप से, आक्रामक रूप से, बलपूर्वक राज्य में प्रवेश करने का प्रयास करना चाहिए।

आप पारिवारिक परंपरा से ईश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकते। राज्य के बारे में येसु की कई शिक्षाएँ राज्य को प्राप्त करने के क्रांतिकारी स्वरूप को दर्शाती हैं। उदाहरण के लिएः स्वर्ग के राज्य को पाने के लिए अपना हाथ काट देना और अपनी आँखें निकाल लेना (मरकुस 9ः47)। स्वर्ग के राज्य को पाने के लिए अपने परिवार से ”घृणा” करना (लूकस 14ः26); शांति नहीं, बल्कि तलवार लाना (मत्ती 10ः34) (इसका अर्थ है येसु का अनुसरण करने का परिणाम), स्वर्ग के राज्य को पाने के लिए अपनी सारी संपत्ति बेच देना (मत्ती 13ः44-46), ईश्वर से जन्म लेना (योहन 3ः5) आदि।

”येसु के समय में, सैकड़ों क्रांतिकारी थे जो ईश्वर के राज्य को लाने के लिए हिंसा का सहारा लेने को तैयार थे। यद्यपि हम उनकी हिंसा का अनुकरण नहीं करते, हम उनके समर्पण, बलिदान की तत्परता और मसीहा के राज्य को देखने के उनके जुनून का अनुकरण अवश्य करते हैं। एक अर्थ में, हम भी युद्ध में हैं।” (ड़ेविड़ गुज़िक)

ग. पद 17 स्वर्ग और पृथ्वी का टल जायें, तो टल जायें, परन्तु संहिता की एक मात्रा भी नहीं टल सकती।ः

इसका मतलब है कि जहाँ पुराने नियम के रस्म-रिवाज़ और कानूनी नियमों को मसीह ने पूरा किया और उनकी जगह ली, वहीं शाष्वत नैतिक नियम (जैसे दस आज्ञाएँ) हमेशा के लिए अनिवार्य बने हुए हैं। यह एक गहन कथन है जो ईश्वर की व्यवस्था के शाश्वत स्वरूप पर बल देता है (स्तोत्र 119ः89)।

जब येसु ने योहन बपतिस्ता की सेवकाई के बाद ईश्वर के कार्य के एक नए पहलू की बात की, तो वे नहीं चाहते थे कि कोई यह सोचे कि ईश्वर के कार्य का यह नया पहलू, व्यवस्था की उपेक्षा या अवहेलना करता है। यद्यपि अंतिम और भविष्यवक्ता कहानी का अंत नहीं थे, बल्कि ईश्वर की योजना में एक नए युग की शुरुआत का हिस्सा थे।

घ. पद 18 जो कोई अपनी पत्नी को तलाक देकर दूसरी स्त्री से विवाह करता है, वह व्यभिचार करता हैः

तलाक का मुद्दा विधि विवरण 24ः1 में अशुद्धता शब्द की सख्त या ढीली व्याख्या के इर्द-गिर्द घूमता था। जो लोग तलाक को आसान बनाना चाहते थे, उन्होंने ढीली व्याख्या की।

मत्ती में येसु को यौन अनैतिकता के लिए तलाक की अनुमति देते हुए दिखाया गया है (मत्ती 5ः32)। हालाँकि, यह अपवाद मरकुस 10ः11-12 और लूकस 16ः18 के समानांतर अंशों में नहीं मिलता। पहली शताब्दी के भूमध्यसागरीय क्षेत्र में, यहूदियों को छोड़कर, तलाक और पुनर्विवाह आम बात थी। इसलिए यह बात चौंकाने वाली है कि मरकुस और लूका, जो ग्रीको-रोमन जगत के लिए लिख रहे थे, तलाक के बाद पुनर्विवाह की अनुमति देने वाले इस स्पष्ट अपवाद को कैसे छोड़ सकते थे? रोमन संस्कृति में व्यभिचार और यौन पाप बेकाबू थे। मरकुस और लूकस को यह एहसास रहा होगा कि उनके श्रोताओं को इस अपवाद के बारे में यहूदी श्रोताओं की तुलना में कहीं अधिक जानने की आवश्यकता थी, जिनके लिए मत्ती ने लिखा था।

यह अपवाद पौलुस की तलाक और पुनर्विवाह पर चर्चा में भी नहीं मिलता (रोमियों 7ः2-3; 1 कुरिन्थियों 7ः10-11, 39)। पौलुस भी ग्रीको-रोमन श्रोताओं से बात कर रहा था, और वह भी बेवफाई या यौन पाप के लिए कोई अपवाद नहीं बनाता। (एकमात्र अपवाद जो वह करता है, वह गैर-धार्मिक विवाह के विघटन के लिए है जब एक जीवनसाथी ईसाई धर्म में परिवर्तित हो जाता है ( 1कुरिन्थियों 7ः12, 15) - जिसे हम आज पॉलीन विशेषाधिकार के रूप में जानते हैं - लेकिन यह एक अलग मामला है।)

मत्ती 19ः7-9 में येसु कहते हैं कि तलाक ईश्वर का आदेश नहीं है, बल्कि मूसा के द्वारा दी गई अनुमति है, क्योंकि मनुष्य के हृदय कठोर हैं। मत्ती 19ः4-6 में येसु कहते हैं कि आदि में ईश्वर ने नर और मादा को बनाया (उत्पत्ति 1ः27)। फिर येसु स्पष्ट करते हैं कि “ईश्वर का नियम यह नहीं था कि कोई पुरुष जब चाहे अपनी पत्नी को छोड़ दे, बल्कि यह था कि वह अपनी पत्नी की अपेक्षा अपने माता-पिता को छोड़े।” विवाह में वे एक शरीर हो जाते हैं और जिसे ईश्वर ने जोड़ा है, उसे मनुष्य अलग न करे (मत्ती 19ः5-6)।

ईश्वर तलाक से घृणा करते है (मलाकी 2ः16)। इसलिए हम कह सकते हैं कि येसु द्वारा अपवाद दिए जाने की संभावना कम है। इसके और भी कारण हैंः येसु पाप को जड़ से उखाड़ने आए थे। तलाक से व्यक्ति की बुरी इच्छा नहीं रुकती। इसलिए दूसरे साथी से अपेक्षा की जाती है कि वह बेवफा साथी के लिए प्रार्थना करे। इससे समाधान मिलता है। याद रखें, येसु के अनुसार वासना भरी निगाहों से देखना भी व्यभिचार है (मत्ती 5ः27)। अगर ऐसा हुआ तो फिर सिर्फ तलाक का ही समय बचेगा। येसु तलाक का समर्थन नहीं करते। येसु, जिन्होंने बिना शर्त क्षमा और दया का उपदेश दिया, उनसे यह अपेक्षा की जा सकती थी कि वे वैवाहिक जीवन में, यहाँ तक कि व्यभिचार के मामले में भी, इसे प्रदर्शित करें।

तलाक विवाह का कुष्ठ रोग है। यह ईश्वर द्वारा बनाए गए परिवार को नष्ट कर देता है (एफेसियों 3ः14)। परिवार जीवन का पवित्र स्थान है। इसलिए तलाक बच्चों के सामान्य विकास को बाधित करता है। यह समाज में भयानक अराजकता लाता है।

हालांकि, यह यौन अनैतिकता, विशेषकर विवाह में, के घातक स्वभाव को कम नहीं करता। ईश्वर व्यभिचारियों को दंडित करेगा (इब्रानियों 13ः4)। बाइबल यौन अनैतिकता के विरुद्ध बहुत कठोर है; उन्हें स्वर्ग में प्रवेश नहीं मिलेगा (1 कुरिन्थियों 6ः9-10; एफेसियों 5ः5; गलातियों 5ः19-21; 1 थेसलनीकियों 4ः3-7)।

आ. लाज़रुस और धनी व्यक्ति की कहानी।

1. (19-21) पृथ्वी पर लाज़रुस और धनी व्यक्ति।

क. एक धनी व्यक्ति थाः

येसु ने इस कहानी को दृष्टांत के रूप में प्रस्तुत नहीं किया, और किसी अन्य दृष्टांत में येसु ने वास्तव में किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया (जैसा कि यहां गरीब व्यक्ति का नाम लिया गया है)। हमारे पास यह मानने के सभी कारण हैं कि येसु ने हमें एक वास्तविक घटना का वर्णन किया, जिसे वे अपने शाश्वत दृष्टिकोण से जानते थे।

ख. बैंगनी वस्त्र और मलमल पहनकर प्रतिदिन दावत उड़ाया करता थाः

धनी व्यक्ति की संपत्ति उसके उत्तम बैंगनी वस्त्रों और भोजन की अधिकता से स्पष्ट थी।

भव्य भोज कियाः “दावत के लिए प्रयुक्त शब्द वह शब्द है जो महंगे पकवानों का आनंद लेने वाले एक शौकीन व्यक्ति के लिए प्रयोग किया जाता है। वह ऐसा प्रतिदिन करता था। उस संस्कृति के अधिकांश लोग वर्ष में केवल कुछ ही बार भव्य भोज करते थे।

धनी व्यक्ति का नाम नहीं बताया गया है, लेकिन परंपरागत रूप से उसे डाइव्स नाम दिया गया था, जो लैटिन में धनी का अर्थ है।

ग. लाज़रुस नामक एक भिखारी, जो घावों से भरा हुआ था, उसके द्वार पर पड़ा था, और रोटी के टुकड़ों से भोजन की इच्छा कर रहा थाः

धनी व्यक्ति ने द्वार पर लाज़रुस के प्रति कुछ नहीं किया, सिवाय उसे उपेक्षित और अनदेखा करने के।

“यह नाम एलीज़र का लैटिन रूप है और इसका अर्थ है ईश्वर मेरी सहायता है।” (बार्कले)

लज़रुस अमीर की मेज़ की जूठन से अपनी भूख मिटाने के लिए तरसता थः “भोजन हाथों से खाया जाता था और बहुत धनी घरों में, हाथों को रोटी के टुकड़ों पर पोंछकर साफ किया जाता था, जिन्हें बाद में फेंक दिया जाता था। लाज़रुस इसी का इंतजार कर रहा था।” (बार्कले)

घ. कुत्ते आकर उसके फोड़े चाटा करते थेः

भिखारी में इतनी ताकत भी नहीं थी कि वह अपने घावों को चाट रहे कुत्तों को भगा सके। येसु ने भिखारी की दयनीय स्थिति का वर्णन इन विवरणों में किया।

अनुपस्थिति का पापः हम चार तरीकों से पाप करते हैं - अपने विचारों, शब्दों, कर्मों और अपने कर्तव्य का पालन न करने से। धनी व्यक्ति ने चौथा पाप किया - अपने कर्तव्य का पालन न करना।

हमें यह नहीं बताया गया है कि धनी व्यक्ति ने लाज़रुस को कोई हानि पहुँचाई। हमें यह भी नहीं बताया गया है कि धनी व्यक्ति ने अपनी संपत्ति छल या अत्याचार से प्राप्त की थी; बल्कि हमें यह बताया गया है कि धनी व्यक्ति ने भिखारी की दयनीय स्थिति देखी और उसका नाम भी जानता था (पद 24), फिर भी उसने उसकी सहायता नहीं की। यह दृष्टांत हमें चेतावनी देता है कि धनी व्यक्ति जैसे लोग जो केवल अपने लिए ही सोचते हैं और अपने आस-पास के गरीबों और जरूरतमंदों की परवाह नहीं करते, वे अंततः नरक में जाएँगे।

2. (22-23) लाज़रुस और धनी व्यक्ति पाताल लोक में।

क. इस प्रकार भिखारी की मृत्यु हो गई....धनी व्यक्ति की भी मृत्यु हो गई और उसे दफना दिया गयाः

लाज़रुस को इस जीवन में दफनाने का सम्मान भी नहीं मिला, फिर भी स्वर्ग ने उसे सम्मानित किया और स्वर्गदूतों द्वारा इब्राहीम की गोद में ले जाया गया। धनी व्यक्ति को दफनाने का सम्मान तो मिला, पर स्वर्गदूतों का साथ या सुखद गंतव्य नहीं मिला।

हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि लाज़रुस अपनी गरीबी के कारण बच गया, ठीक वैसे ही जैसे हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि धनी व्यक्ति अपने धन के कारण नरक में गया। लाज़रुस का सच्चे ईश्वर के साथ आस्था का सच्चा संबंध अवश्य रहा होगा, जबकि धनी व्यक्ति का नहीं। हम लाज़रुस को ईश्वर और मनुष्य को कोसते हुए नहीं देखते।

ख. और पाताल लोक में पीड़ा भोगते हुए, उसने अपनी आँखें ऊपर उठाईं और दूर इब्राहीम को और लाज़रुस को उसकी गोद में देखाः

धनी व्यक्ति लाज़रुस से दूर नहीं था; फिर भी वह एक अलग ही दुनिया में था। उसका स्थान पीड़ा और कष्ट से भरा था, जबकि लाज़रुस इब्राहीम के आराम और देखभाल का आनंद ले रहा था।

ग. पाताल लोक में पीड़ा भोगते हुएः

येसु यहाँ सिखाते हैं कि स्वर्ग और नरक दोनों वास्तविक, शाब्दिक स्थान हैं। दुख की बात है कि कई उपदेशक नरक जैसे असहज विषयों से कतराते हैं। कुछ तो “सार्वभौमिकता“ का भी प्रचार करते हैं - यह विश्वास कि हर कोई स्वर्ग जाता है। बाइबल में येसु ने ही सबसे अधिक बार नरक के बारे में बात की है। पौलुस, पेत्रुस, योहन, युदस और इब्रानियों के लेखक भी इसका उल्लेख करते हैं।

3. (24-26) धनी व्यक्ति की दलील

क. हे पिता इब्राहीम, मुझ पर दया करोः

धनी व्यक्ति निश्चित रूप से इब्राहीम का वंशज था, और विश्वास के महान पिता ने उसे त्यागा नहीं था। फिर भी, इब्राहीम का पिता होना ही उसे आने वाले जीवन में पीड़ा से बचाने के लिए पर्याप्त नहीं था। अब धनी व्यक्ति एक भिखारी की तरह इब्राहीम से विनती कर रहा था।

ख. लाज़रुस को भेजो ताकि वह अपनी उंगली का सिरा पानी में डुबोकर मेरी जीभ को ठंडा करेः

यह पीड़ा की गंभीरता को दर्शाता है। यह कथन इस बात का प्रमाण है कि धनी व्यक्ति लाज़रुस का नाम और उसकी पीड़ा जानता था।

ग. हे पुत्र, याद रखो कि अपने जीवनकाल में तुमने अपनी अच्छी चीजें प्राप्त कींः

अपने सांसारिक जीवन में धनी व्यक्ति ने जीवन की अच्छी चीजों का आनंद लिया; फिर भी उसने उन्हें आने वाले जीवन की तैयारी के लिए साझा नहीं किया या उनका उपयोग नहीं किया।

इसलिए धनी व्यक्ति अन्यायपूर्ण कारिन्दा के पिछले दृष्टांत (लूकस 16ः1-12) के विपरीत है। अन्यायपूर्ण कारिन्दा ने अपने वर्तमान पद का उपयोग अपने अगले पद की तैयारी के लिए किया; धनी व्यक्ति ने ऐसा नहीं किया।

घ. हमारे और तुम्हारे बीच एक गहरी खाई है, जिससे यहाँ से तुम्हारे पास जाने की इच्छा रखने वाले लोग नहीं जा सकते।

हालाँकि धनी व्यक्ति इब्राहीम को देख और उससे बात कर सकता था, फिर भी वह उसके बिल्कुल करीब नहीं था। उनके बीच एक गहरी खाई थी, और उनका भाग्य सदा के लिए तय हो चुका था।

4. (27-31) धनी व्यक्ति अपने भाइयों के बारे में सोचता है।

क. इसलिए, हे पिता, मैं आपसे विनती करता हूँः

यहाँ फिर से ज़ोर दिया गया है कि अब धनी व्यक्ति भिखारी है, लाज़रुस नहीं।

ख. उसे मेरे पिता के घर भेज दीजिए, क्योंकि मेरे पाँच भाई हैं, ताकि वह उनके सामने गवाही दे सकेः

उसने इब्राहीम से लाज़रुस को भेजने का अनुरोध किया (शायद सपने या दर्शन में), इस बार अपने पाँच भाइयों के हित के लिए।

स्पष्ट है कि धनी व्यक्ति ने पृथ्वी से परलोक जाने के बाद भी अपने रिश्तेदारों को याद रखा और उनकी परवाह की। उसकी स्मृति न तो मिटाई गई और न ही उसे नई चेतना दी गई।

ग. कहीं वे भी इस यातना के स्थान पर न आ जाएँः

अब धनी व्यक्ति दूसरों के यातना में न जाने की चिंता करने लगा। उसने अपना जीवन इस बात से पूरी तरह बेपरवाह होकर बिताया, न अपने लिए और न ही दूसरों के लिए। दुर्भाग्य से, दूसरों के लिए उसकी चिंता तब जागी जब बहुत देर हो चुकी थी।

घ. उनके पास मूसा और नबी हैं, उन्हें उनकी बात सुननी चाहिएः

इब्राहीम ने बताया कि धनी व्यक्ति के भाइयों के पास नरक की यातना से बचने के लिए सभी आवश्यक जानकारी थी। यह हमें बाइबल का महत्व बताता है। नरक की यातना से बचने के लिए हमें बाइबल को पढ़ना और उसके अनुसार जीवन जीना चाहिए।

ड. नहीं, हे पिता इब्राहीम; परन्तु यदि कोई मरे हुओं में से उनके पास आए, तो वे पश्चात्ताप करेंगे।

धनी व्यक्ति ने तुरंत आपत्ति जताई, क्योंकि वह जानता था कि उसका परिवार मूसा और नबीयों को गंभीरता से नहीं लेता था। उसे पूरी उम्मीद थी कि यदि कोई मरे हुओं में से जी उठे, तो वह ईश्वर के वचन से भी अधिक विश्वास दिलाने वाला होगा। परन्तु ऐसा नहीं होगा, क्योंकि यदि वे ईश्वर के वचन के कारण विश्वास नहीं करते, तो मरे हुओं में से जी उठने पर भी वे विश्वास नहीं करेंगे।

येसु मरे हुओं में से जी उठे; फिर भी बहुतों ने विश्वास नहीं किया। इसके अतिरिक्त, बेथानी का लाज़रुस भी मरे हुओं में से जी उठा (योहन 11ः38-44) और धार्मिक नेताओं ने उस पर विश्वास नहीं किया; उन्होंने उसे मार डालने का प्रयास किया (योहन 12ः9-10)।

धनी व्यक्ति इसलिए नहीं खोया कि वह धनी था। वह इसलिए खोया कि उसने धर्मग्रन्थ को नहीं सुना।

एक मायने में धनी व्यक्ति धार्मिक नेताओं से बहुत अलग था। वह विलासितापूर्ण और भोग-विलास से भरा जीवन जीता था, जबकि फरीसी कठोर, अनुशासित और आत्म-संयमित थे। फिर भी, उनमें और धनी व्यक्ति में एक समानता थीः उन्हें अपने आस-पास के जरूरतमंदों की कोई परवाह नहीं थी और वे उन्हें उपेक्षा से तुच्छ समझते थे। इसीलिए जब येसु ने नाकेदारों और पापियों को शिक्षा दी और उनकी देखभाल की, तो उन्हें बहुत बुरा लगा (लूकस 15ः1-2)।

येसु ने इसे अधर्मी धन कहा क्योंकि “धन बहुत कुछ वादा करता है, पर कुछ नहीं करताः यह आशा और विश्वास जगाता है, पर धोखा देता हैः मनुष्य को सुख के लिए इस पर निर्भर बनाकर, यह उसे ईश्वर के उद्धार और अनन्त महिमा से वंचित कर देता है।” (क्लार्क)


Praise the Lord!