हिन्दी बाइबिल व्याख्या

Hindi Bible Commentary

फादर शैलमोन आन्टनी

योहन 10

अ. अच्छे चरवाहे और इस्राएल के झूठे चरवाहों के बीच तुलना।

1. (1-2) येसु सच्चे और वैध चरवाहे हैं, जो उचित और तैयार किए गए मार्ग से प्रवेश करते हैं।

पिछले अध्याय में हमने देखा कि धार्मिक अगुवों ने माता-पिता और उस व्यक्ति के प्रति कितनी क्रूरता दिखाई जिसे येसु ने चंगा किया था। इसलिए येसु ने अपने हृदय और अपने समय के धार्मिक अगुवों के कार्य के बीच के अंतर के बारे में बात करना आवश्यक समझा।

क. सचमुच, मैं तुमसे कहता हूँः

“यह वाक्यांश चौथे सुसमाचार की विशेषता है, और यह सामान्यतः येसु या उनके मिशन के बारे में एक गंभीर घोषणा का परिचय देता है।” (टेनी)

ख. जो फाटक से भेड़शाला में प्रवेश नहीं करता, बल्कि दूसरे रास्ते से चढ़कर आता है, वही चोर और डाकू हैः

प्राचीन संसार में राजनीतिक और आत्मिक अगुवों को अक्सर चरवाहे कहा जाता था (इसायाह 56ः11, यिरमियाह 3ः15, एज़ेकिएल 34)। येसु ने समझाया कि भेड़ों के बीच हर कोई सच्चा चरवाहा नहीं होता; कुछ चोर और डाकू जैसे होते हैं। उनके चोर और डाकू होने का एक चिन्ह यह है कि वे भेड़ों के बीच कैसे प्रवेश प्राप्त करते हैं।

‘दूसरे रस्ते से चढ़कर आना’ उन लोगों को दर्शाता है जो हेरफेर, भ्रष्टाचार और व्यक्तिगत उद्देश्यों आदि के द्वारा चरवाहे बनते हैं।

ग. जो फाटक से प्रवेश करता है वही भेड़ों का चरवाहा हैः

सच्चा चरवाहा वैध और निर्धारित मार्ग से आता हैः प्रेम, बुलाहट, देखभाल और बलिदानी सेवा के द्वारा।

“इसलिए जो कोई येसु मसीह के द्वारा चरवाही की सेवा में प्रवेश नहीं करता, वह भेड़ों के बाड़े में चोर और डाकू के समान है। और वह येसु मसीह के द्वारा प्रवेश नहीं करता जो मसीह और उसके लोगों के हित के अलावा किसी अन्य उद्देश्य से प्रवेश करता है। महत्वाकांक्षा, लालच, आराम से प्रेम, जीवन की सुविधाओं का आनंद लेने की इच्छा, अपने परिवार के हितों को बढ़ावा देना, इसके लिए इससे बेहतर कोई नाम नहीं हो सकता।” (क्लार्क)

2. (3-6) भेड़ें और उनका चरवाहा।

क. द्वारपाल उसके लिए फाटक खोलता हैः

उन दिनों भेड़ों के बाड़े में द्वारपाल होते थे- एक व्यक्ति जो देखता था कि कौन अंदर आता है और कौन बाहर जाता है। द्वारपाल सच्चे चरवाहे को जानता है और उचित रूप से उसे प्रवेश देता है।

उस समय के नगरों में, कई झुंडों की भेड़ों को रात के लिए एक सामान्य भेड़शाला में रखा जाता था, जिसकी देखरेख एक द्वारपाल करता था जो यह नियंत्रित करता था कि कौन-से चरवाहे कौन-सी भेड़ों को लाते और ले जाते हैं।

ख. वह अपनी भेड़ों को नाम लेकर बुलाता है और उन्हें बाहर ले जाता हैः

चरवाहा भेड़ों को नाम लेकर बुलाता है, यह दिखाता है कि चरवाहे का भेड़ों के साथ व्यक्तिगत संबंध है।

‘उन्हें बाहर ले जाता है’ का अर्थ है कि चरवाहा आगे चलता है, भेड़ों को दिशा और नेतृत्व प्रदान करता है। इसका अर्थ यह भी है कि वही मार्ग दिखाता है और उसी मार्ग पर चलता है।

जैसे हम कुत्तों और गायों को नाम से बुलाते हैं, वैसे ही पूर्वी चरवाहे अपनी भेड़ों को नाम से बुलाते थे।

येसु, अच्छे चरवाहे ने पेत्रुस, थोमस, मरियम मगदलीनी, ज़क्केऊस, लाज़रुस आदि को नाम लेकर बुलाया।

ग. क्योंकि वे उसका स्वर पहचानती हैंः

“प्राचीन समय के सामान्य भेड़शालाओं में, चरवाहा केवल अपनी विशेष पुकार देता था और उसकी भेड़ें दूसरों में से निकलकर उसका अनुसरण करते हुए भेड़शाला से बाहर आ जाती थीं। भेड़ें अपने चरवाहे की आवाज़ पहचानने में विशेषज्ञ होती हैं।” (ड़ेविड़ गुज़िक)

घ. वह उनके आगे आगे चलता हैः

येसु ने क्रूस उठाया और हमसे भी क्रूस उठाने को कहा (मत्ती 16ः24)। संत पेत्रुस कहते हैं, “मसीह ने तुम्हारे लिए दुख सहा और तुम्हारे सामने एक उदाहरण रखा, ताकि तुम उनके नक्शेकदम पर चल सको“ (1 पेत्रुस 2ः21)। येसु ने हमसे उसी रास्ते पर चलने को कहा जिस पर वे खुद चले थे।

ड. वे किसी अजनबी के पीछे नहीं चलेंगी....क्योंकि वे अजनबियों की आवाज़ नहीं पहचानतींः

“एक स्कॉटिश यात्री की कहानी है जिसने येरूसालेम के एक चरवाहे के साथ कपड़े बदल लिए और भेड़ों को ले जाने का प्रयास किया; लेकिन भेड़ों ने उसके कपड़ों को नहीं बल्कि चरवाहे की आवाज़ को पहचाना और उसका अनुसरण किया।” (डोड्स)

ड. येसु ने यह दृष्टांत उनसे कहा, लेकिन वे नहीं समझेः

क्योंकि उन्होंने येसु का अनुसरण नहीं किया, इसलिए येसु तैयार थे और उनसे फिर से बात करने को इच्छुक थे। यह हम अगले पद में देखते हैं। यह येसु के द्वारा अपनी भेड़ों के बीच किए जाने वाले कार्य और उन लोगों के लिए जो येसु की भेड़ों की सेवा करना चाहते हैं, दोनों का चित्र है।

एडम क्लार्क ने योहन 10 के इन पहले छह पदों में ईश्वर के सच्चे और वैध सेवक की छह पहचान बताईंः

*उसके पास सेवकाई में उचित प्रवेश होता है।

*वह पवित्र आत्मा को ईश्वर की भेड़ों के लिए द्वारपाल के रूप में अपना मार्ग खोलते हुए देखता है।

*वह देखता है कि भेड़ें शिक्षा और नेतृत्व में उसकी आवाज़ का उत्तर देती हैं।

*वह अपने झुंड को अच्छी तरह जानता है।

*वह झुंड की अगुवाई करता है, उन्हें जबरदस्ती नहीं चलाता और न ही उन पर प्रभुता करता है।

*वह भेड़ों के आगे एक उदाहरण के रूप में चलता है।

3. (7-10) सच्चा चरवाहा जीवन की रक्षा और वृद्धि करता है; झूठे चरवाहे जीवन को छीन लेते हैं।

क. मैं भेड़ों का द्वार हूँः

येसु के समय में भेड़ों के चरागाहों को घेरा जाता था और उसमें केवल एक प्रवेश द्वार होता था। इस प्रकार चरवाहा भेड़ों को भेड़ियों से बचाता था। जैसे पहाड़ येरूसलेम को घेरे रहते हैं, वैसे ही प्रभु अपने लोगों को घेरे रहते हैं।“ (स्तोत्र 125ः2)। “क्योंकि प्रभु कहते हैं, ’मैं येरूसालेम के चारों ओर आग की दीवार बनूँगा और उसके भीतर उसकी महिमा बनूँगा’“ (जकर्याह 2ः5)।

ख. जितने मेरे से पहले आए वे सब चोर और डाकू हैंः

धोखे और चालाकी को दर्शाता है; डाकू हिंसा और विनाश को दर्शाता है। ये जीवन को छीन लेते हैं, लेकिन येसु जीवन देते हैं और बहुतायत से देते हैं।

कथन के द्वारा येसु वैध पुराने नियम के नबीयों या ईश्वर की विधान की निंदा नहीं कर रहे हैं। इसके बजाय, यह विशेष रूप से झूठे मसीहाओं और उनके समय के भ्रष्ट धार्मिक अगुवों को संदर्भित करता है।

“येसु यह नहीं कहते कि वे ‘थे’ बल्कि यह कहते हैं कि वे ‘हैं’ चोर और डाकू। जोर उनके अपने समय पर है।” (मॉरिस)

ग. परन्तु भेड़ों ने उनकी नहीं सुनीः

क्या हम झूठे चरवाहों का अनुसरण कर रहे हैं? क्या हम झूठे चरवाहों के द्वारा फँस गए हैं?

घ. जो कोई मेरे द्वारा प्रवेश करता है वह उद्धार पाएगाः

येसु स्वयं को उद्धार के एकमात्र मार्ग के रूप में पहचान कराते हैं। “किसी और के द्वारा उद्धार नहीं है, क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों के बीच कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया है जिसके द्वारा हमारा उद्धार हो सके।“ (प्रेरित चरित 4ः12)

ड. और भीतर बाहर आएगा और चरागाह पाएगाः

इसका अर्थ है कि येसु में हमें सच्ची स्वतंत्रता मिलेगी। येसु कहते हैं, “अगर मैं तुम्हें आज़ाद करता हूँ, तो तुम सचमुच आज़ाद हो जाओगे।“ (योहन 8ः36)।

“‘बाहर जाना और भीतर आना’ पुराने नियम की सामान्य अभिव्यक्ति है जो दैनिक जीवन की स्वतंत्र गतिविधि को दर्शाती है। यिरमियाह 37ः4, स्तोत्र 121ः8, विधि-विवरण 28ः6।” (डोड्स)

च. चोर सिर्फ़ चोरी करने, मारने और नाश करने आता हैः

झूठे चरवाहे भेड़ों को नहीं खिलाएंगे बल्कि खुद खाएंगे; वे मोटी भेड़ों का मांस खाएंगे और उनकी ऊन से कपड़े बनाएंगे, लेकिन भेड़ों को खाना नहीं देंगे। वे कमज़ोरों को मज़बूत नहीं करेंगे, बीमारों को ठीक नहीं करेंगे, घायल भेड़ों की मरहम-पट्टी नहीं करेंगे, भटकी हुई भेड़ों को वापस नहीं लाएंगे और खोई हुई भेड़ों को नहीं ढूंढेंगे, बल्कि ज़बरदस्ती और सख्ती से उन पर राज करेंगे। इसलिए भेड़ें बिखर जाती हैं और जंगली जानवरों का शिकार बन जाती हैं। (एज़ेकिएल 34ः2-6)

वहीं, अच्छे चरवाहे ईश्वर क्या करते हैंः “मैं खुद अपनी भेड़ों का चरवाहा बनूंगा और उन्हें आराम करने के लिए लिटाऊंगा... मैं खोई हुई भेड़ों को ढूंढूंगा, भटकी हुई भेड़ों को वापस लाऊंगा, घायल भेड़ों की मरहम-पट्टी करूंगा और कमज़ोर भेड़ों को मज़बूत बनाऊंगा; लेकिन जो मोटी और ताकतवर हैं (यानी वे झूठे चरवाहे जो भेड़ों को मारकर खुद मोटे हो जाते हैं), उन्हें मैं नष्ट कर दूंगा और उन्हें न्याय के साथ खिलाऊंगा“ (एज़ेकिएल 34ः15-16)।

मैं इसलिए आया हूँ कि वे जीवन पाएँ, और बहुतायत से पाएँः अविश्वासी और अवैध अगुवे चोरी करने, मारने और नष्ट करने आते हैं। येसु अपने लोगों को जीवन देने आते हैं।

“‘बहुतायत’ के लिए यूनानी शब्द, पेरिस्सोस, का गणितीय अर्थ है और सामान्यतः अतिरिक्तता को दर्शाता है... बहुतायत का जीवन सबसे पहले संतुष्ट जीवन है, जिसमें हमारी संतुष्टि इस तथ्य पर आधारित होती है कि ईश्वर हर परिस्थिति के लिए पर्याप्त है और मसीह येसु में अपनी महिमा के धन के अनुसार हमारी सभी आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम है।” (बोइस)

“तेरे पास भरपूर आनंद है; तेरे दाहिने हाथ में सदा के लिए सुख है“ (स्तोत्र 16ः11)

जिस प्रकार प्रकाश एक सीमा पर मौजूद होता है- हल्की, कोमल चमक से लेकर तेज, उच्च-वोल्टेज किरण तक- उसी प्रकार लोगों के जीवन में भी विभिन्न स्तर होते हैं। और जीवन तब सर्वोत्तम होता है जब वह येसु के द्वारा पोषित होता है।

4. (11-15) अच्छा चरवाहा झुंड के लिए अपना जीवन दे देगा।

क. मैं भला चरवाहा हूँः

येसु ने इसे इतनी स्पष्टता से कहा कि उनके अर्थ में कोई गलती नहीं हो सकती थी।

येसु कहते हैं कि केवल ईश्वर ही भला है (मत्ती 19ः17)। “ईश्वर भला है“ (स्तोत्र 107ः1; 136ः1)। “परखकर देखो कि प्रभु भला है“ ( स्तोत्र 34ः8)।

ख. भला चरवाहा भेड़ों के लिए अपना जीवन देता हैः

यहाँ येसु बताते हैं कि वह अच्छे चरवाहे क्यों हैं क्योंकि वह भेड़ों के लिए अपना जीवन देते हैं। दूसरों के लिए देने के लिए जीवन से बढ़कर कुछ नहीं है (योहन 15ः13)। येसु का प्रेम और भी महान है क्योंकि उन्होंने अपना जीवन हमारे लिए तब दिया जब हम ईश्वर के शत्रु थे (रोमियों 5ः6-10)।

ग. मजदूर भेड़िए को आते देखकर भेड़ों को छोड़कर भाग जाता है और भेड़िया उन्हें पकड़ लेता है और तितर-बितर कर देता हैः

मजदूर भाग जाता है क्योंकि भेड़ें उसकी अपनी नहीं होतीं, वह भेड़ों से प्रेम नहीं करता। वह केवल मजदूरी के लिए काम करता है और वास्तव में भेड़ों का स्वामी और देखभाल करने वाला नहीं होता।

भेड़िए का उद्देश्य वही है जो पद 10 में वर्णित चोर का उद्देश्य है।

घ. मजदूर भाग जाता है क्योंकि मजदूर भेड़ों की परवाह नहीं करताः

“अपनी सारी चिंता उसी (ईश्वर) पर डाल दो, क्योंकि उसे तुम्हारा ध्यान है” (1 पेत्रुस 5ः7)। हम ईश्वर के हैं क्योंकि उसने हमें बनाया है। “यदि मेरा पिता और मेरी माता मुझे छोड़ दें, तो भी यहोवा मुझे संभाल लेगा” (स्तोत्र 27ः10)।

बुरा चरवाहा (मजदूर) भेड़ों की रक्षा नहीं करेगा और सोचता है कि झुंड उसके लाभ के लिए है, लेकिन अच्छा चरवाहा भेड़ों की भलाई के लिए जीता और मरता है।

ड. मैं अपनी भेड़ों को जानता हूँ और मेरी भेड़ें मुझे जानती हैंः

यह अंश मसीह और विश्वासियों के बीच गहरे, घनिष्ठ संबंध को दर्शाता है।

“जानना” के लिए मूल यूनानी शब्द ”गिनोस्को” है, जिसका अर्थ है अनुभवात्मक, घनिष्ठ और संबंधपरक ज्ञान। इसका अर्थ है येसु आपको केवल तथ्यों या आँकड़ों से कहीं अधिक जानता है। वह आपके आंतरिक जीवन, संघर्षों और ईश्वर की संतान के रूप में आपके मूल्य को गहराई से समझता है।

सभी भेड़ें एक जैसी दिखती हैं, फिर भी चरवाहा उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानता है। इसी प्रकार येसु, अच्छा चरवाहा, हमें बहुत व्यक्तिगत रूप से जानता है।

“मेरी भेड़ें मुझे जानती हैं” का अर्थ है एक पारस्परिक संबंध। यह केवल बौद्धिक ज्ञान नहीं, बल्कि गहरी पहचान है। प्रार्थना, संस्कारों (विशेष रूप से यूखरिस्त), और धर्मग्रन्थ के माध्यम से, विश्वासी मसीह की आवाज़ को पहचानना और उसके मार्गदर्शन का पालन करना सीखते हैं।

च. जैसे पिता मुझे जानता है और मैं पिता को जानता हूँः

येसु और पिता के बीच साझा किया गया पारस्परिक ज्ञान पूर्ण, संपूर्ण और बिना किसी रहस्य के है। यह पवित्र त्रिएकता के भीतर साझा दिव्यता और अनन्त संबंध को दर्शाता है।

“मैं अपनी भेड़ों को जानता हूँ और मेरी भेड़ें मुझे जानती हैं, जैसे पिता मुझे जानता है और मैं पिता को जानता हूँ”ः यह पद दिव्य घनिष्ठता का सर्वोच्च आदर्श है, जो त्रिएकता और विश्वासियों के बीच संबंध की गहरी झलक प्रदान करता है।

5. (16) येसु अन्य भेड़ों के बारे में बोलता है।

क. मेरी और भी भेड़ें हैं जो इस बाड़े की नहीं हैं। मुझे उन्हें भी लाना आवश्यक हैः

यहाँ मूल “बाड़ा” उन यहूदी लोगों को दर्शाता है, जिनके लिए येसु ने सबसे पहले अपनी सांसारिक सेवा शुरू की। “अन्य भेड़ें” गैर-यहूदियों को दर्शाती हैं। अपना जीवन देकर और राष्ट्रों के बीच की बाधाओं को तोड़कर, येसु अपने परिवार का विस्तार करता है ताकि उद्धार पूरे संसार को दिया जा सके।

ख. वे एक झुंड और एक चरवाहा होंगेः

“ताकि सही समय आने पर स्वर्ग और पृथ्वी की सभी चीज़ों को येसु में एक साथ इकट्ठा किया जा सके“ (इफिसियों 1ः10)।

कैथोलिक शिक्षा में, यह मुख्य रूप से यहूदियों और गैर-यहूदियों दोनों के कैथोलिक कलीसिया में एकीकरण को संदर्भित करता है। यह मसीह को कलीसिया के एकमात्र मुखिया के रूप में दर्शाता है, जो सभी विश्वासियों का मार्गदर्शन करता है। इसलिए पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन में हम सभी को इस स्वप्न को साकार करने का प्रयास करना चाहिए।

6. (17-18) येसु जीवन और मृत्यु पर अधिकार होने का दावा करता है।

क. इसलिए मेरा पिता मुझसे प्रेम करता हैः

यद्यपि येसु ने मानव स्वभाव धारण किया, फिर भी वह पिता के प्रेम का अनुभव करता रहा। क्या आप इस जागरूकता में जी रहे हैं कि ईश्वर आपसे प्रेम करता है?

ख. ताकि मैं मेरे जीवन को फिर से ले सकूँ... मुझे उसे फिर से लेने का अधिकार हैः

लोग अपना जीवन दे सकते हैं लेकिन उसे फिर से लेने में सक्षम नहीं होते; जबकि येसु के पास उसे फिर से लेने का अधिकार है। इस अर्थ में, हम कह सकते हैं कि येसु ईश्वर है और उसने स्वयं को मृतकों में से “जी उठाया”।

ग. यह आज्ञा मैंने अपने पिता से प्राप्त की हैः

“येसु की मृत्यु पूरी तरह स्वैच्छिक थी, लेकिन यह किसी भी अर्थ में अप्रत्यक्ष आत्महत्या नहीं थी। यह मृत्यु को स्वीकार करने और फिर उससे विजयी होकर जीवित निकलने की योजना का हिस्सा थी, उस आज्ञा के अनुसार... जो ईश्वर पिता से प्राप्त हुई थी।” (ड़ेविड़ गुज़िक)

7. (19-21) येसु पर दुष्टात्मा से ग्रस्त और पागल होने का आरोप लगाया जाता है।

क. इसलिए इन बातों के कारण यहूदियों में फिर से विभाजन हुआः

येसु को स्वीकार करने वालों और अस्वीकार करने वालों के बीच विभाजन उत्पन्न हुआ।

ख. उसमें दुष्टात्मा है और वह पागल हैः

येसु ने अपने बारे में जो दावा किया वह इतना असाधारण था कि लोगों में उसके कारण विभाजन हो गया। कुछ लोगों ने विश्वास किया कि वह वही है जो उसने कहा। दूसरों ने माना कि जो कोई येसु की तरह ईश्वर होने का दावा करता है, उसमें या तो दुष्टात्मा होनी चाहिए या वह पागल होना चाहिए।

ग. ये उस व्यक्ति के शब्द नहीं हैं जिसमें दुष्टात्मा हो। क्या कोई दुष्टात्मा अंधों की आँखें खोल सकती है?

ये लोग येसु के कार्यों और शब्दों दोनों को देखकर सही सोच रहे थे। येसु स्वयं यहूदियों से कहते हैं कि “कार्यों पर विश्वास करो और समझो कि पिता मुझ में है और मैं पिता में हूँ” (योहन 10ः38)।

आ. प्रतिष्ठान के पर्व पर येसु।

1. (22-23) सर्दियों में प्रतिष्ठान का पर्व।

क. प्रतिष्ठान का पर्वः

यह पर्व (जिसे हनुक्का भी कहा जाता है) सीरिया के राजा अन्तियोकस एपिफेनेस द्वारा तीन वर्षों तक मंदिर को अपवित्र किए जाने के बाद उसकी शुद्धि और पुनः समर्पण का उत्सव था (164 या 165 ईसा पूर्व)।

अन्तियोकस ने येरूसालेम में बहुत बुराई की। बार्कले ध्यान देते हैंः उसने मंदिर के खजाने से लाखों सोने और चाँदी चुरा लिए। व्यवस्था की प्रति रखना और किसी बच्चे का खतना करना मृत्यु दंड के योग्य अपराध था। मंदिर को वेश्यावृत्ति के घर में बदल दिया गया। होमबलि की महान वेदी को यूनानी देवता ज़्यूस की वेदी बना दिया गया। महान वेदी पर सूअरों की बलि दी गई और 80,000 यहूदियों को मार दिया गया तथा उतनी ही संख्या में लोगों को दास के रूप में बेच दिया गया। मकाबियों के उदय ने इन अत्याचारों का अंत किया।

यह सर्दी थीः “या तो मौसम तूफानी या वर्षा वाला था।” (क्लार्क) “उसका अर्थ अवश्य ही यह होना चाहिए, ‘मौसम तूफानी था,’ या ‘एक तूफान चल रहा था।’” (ट्रेंच)

ख. येसु मंदिर में टहल रहा थाः

यह मंदिर के आँगनों में येसु और धार्मिक नेताओं के बीच एक और टकराव है। हालाँकि, ऐसा प्रतीत नहीं होता कि जब यह टकराव शुरू हुआ तब येसु शिक्षा दे रहे थे।

सुलैमान का मण्डपः “सुलैमान का स्तंभयुक्त बरामदा उस पोर्टिको का नाम था जो हेरोदेस के मंदिर के बाहरी आँगन के पूर्वी भाग में चलता था।”

2. (24-25) येसु धार्मिक नेताओं के शत्रुतापूर्ण प्रश्न का उत्तर देता है।

क. तब यहूदियों ने उसे घेर लियाः

येसु शिक्षा नहीं दे रहे थे, बल्कि चल रहे थे। इसका अर्थ यह है कि यह एक शत्रुतापूर्ण घात था जब येसु बस चल रहे थे।

ख. तू कब तक हमें संदेह में रखेगा? यदि तू मसीह है, तो हमें स्पष्ट बताः

धार्मिक नेताओं (जिन्हें फिर से यहूदी कहा गया है) ने येसु की बात सुनने या उस पर विश्वास करने से इनकार किया। वे अपने अविश्वास का दोष येसु पर डालना चाहते थे (तू कब तक हमें संदेह में रखेगा?)। शायद यह प्रश्न इसलिए पूछा गया था कि वह स्वयं को यहूदियों का राजा घोषित करे, ताकि वे उसकी शिकायत रोमी राज्यपाल से कर सकें।

ग. मैंने तुमसे कहा, और तुम विश्वास नहीं करतेः

येसु ने यहूदियों के बीच स्वयं को अक्सर स्पष्ट रूप से मसीह या मसीहा नहीं कहा; क्योंकि मसीहा शब्द के राजनीतिक और यहाँ तक कि सैन्य अर्थ भी थे। इसलिए येसु इससे बचना चाहते थे। फिर भी येसु सही रूप से कह सकते थे कि कई तरीकों से, मैंने तुमसे कहा और तुम विश्वास नहीं करते।

मैंने तुमसे कहाः

मैं वह हूँ जो स्वर्ग से आया है (योहन 3ः13, 6ः38)। जो मुझ पर विश्वास करता है उसके पास अनन्त जीवन है (योहन 3ः15)। मैं ईश्वर का अद्वितीय पुत्र हूँ, मैं समस्त मानवता का न्याय करूँगा (योहन 5ः19-23)। सभी को मेरा सम्मान उसी प्रकार करना चाहिए जैसे वे ईश्वर पिता का सम्मान करते हैं (योहन 5ः23)। धर्मग्रन्थ मेरे बारे में बोलते हैं (योहन 5ः39)। अब्राहम के होने से पहले मैं हूँ (योहन 8ः58)। मैं स्वयं को मृतकों में से जिलाऊँगा (योहन 10ः17-18)। मैं जीवन की रोटी हूँ (योहन 6ः48)। मैं संसार की ज्योति हूँ (योहन 8ः12)। मैं द्वार हूँ (योहन 10ः9)। मैं अच्छा चरवाहा हूँ (योहन 10ः11)।

घ. जो काम मैं अपने पिता के नाम से करता हूँ, वे मेरे विषय में गवाही देते हैंः

केवल येसु के शब्द ही नहीं, बल्कि येसु के कार्य भी यह प्रमाणित करते थे कि वह ईश्वर की ओर से था। दूसरे शब्दों में, येसु उनसे कहते हैं कि मेरे फलों से मुझे समझो; क्योंकि येसु ने कहा था- “तुम उन्हें उनके फलों से पहचानोगे” (मत्ती 7ः20)।

3. (26-29) येसु धार्मिक नेताओं से उनकी स्थिति के बारे में स्पष्ट रूप से कहता है।

क. तुम विश्वास नहीं करते, क्योंकि तुम मेरी भेड़ें नहीं होः

धार्मिक अगुवे चाहते थे कि येसु स्पष्ट रूप से बोलें, और यहाँ उन्होंने उनसे भी अधिक स्पष्ट रूप से कहा जितना वे शायद चाहते थे। येसु ने पहले ही उन्हें बताया था कि वे सच्चे चरवाहे नहीं थे (योहन 10ः5, 10ः8, 10ः10, 10ः12-13)। यहाँ येसु ने उन्हें बताया कि वे सच्ची भेड़ें भी नहीं हैं, क्योंकि मसीहा की भेड़ें विश्वास करती हैं और उसकी आवाज़ सुनती हैं।

ख. मैं उन्हें अनन्त जीवन देता हूँ, और वे कभी नाश न होंगीः

येसु ने अपनी भेड़ों को मिलने वाले लाभों और आशीषों का वर्णन किया। उनके पास अनन्त जीवन है, जो येसु द्वारा दिया गया है। यह अनन्त जीवन अभी से आरम्भ होता है, लेकिन यह शारीरिक जीवन से कहीं महान है।

ग. और कोई उन्हें मेरे हाथ से छीन न लेगाः

यह अपेक्षित है कि अच्छा चरवाहा अपनी भेड़ों की अच्छी देखभाल करेगा। भेड़ें अच्छे चरवाहे के हाथ में सुरक्षित और दृढ़ हैं। भेड़ों को छीनने के लिए चरवाहे को मारना पड़ेगा। येसु अमर चरवाहा है, इसलिए कोई भी उसकी भेड़ों को छीन नहीं सकता।

संत पौलुस कहते हैं, कौन हमें मसीह के प्रेम से अलग करेगा? (रोमियों 8ः35)।

घ. कोई उन्हें मेरे पिता के हाथ से छीन नहीं सकताः

ईश्वर की भेड़ें अच्छे चरवाहे के हाथ और ईश्वर पिता के हाथ, दोनों में सुरक्षा पाती हैं। यह जानना सांत्वना देता है कि जिन हाथों ने संसार की रचना की, वे विश्वास करने वाले को थामे रहते हैं। मेरा पिता सब से बड़ा हैः “मनुष्यों और दुष्टात्माओं की संयुक्त शक्तियों से भी अधिक सामर्थी। जो ईश्वर से प्रेम करता है उसे प्रसन्न होना चाहिए; और जो उससे डरता है उसे अनन्तता के इस पार किसी बात से डरने की आवश्यकता नहीं है।” (क्लार्क)

4. (30-33) येसु पिता के साथ अपनी एकता की घोषणा करते हैं।

क. मैं और मेरा पिता एक हैंः

यह येसु की दिव्यता और परमेश्वरत्व के स्वरूप के विषय में एक महत्वपूर्ण कथन है। ‘मैं और मेरा पिता’ का अर्थ है कि पिता और पुत्र एक ही व्यक्ति नहीं हैं और ‘एक हैं’ का अर्थ है कि पिता और पुत्र स्वभाव और सार में समान हैं।

येसु चाहते थे कि हम वैसे ही एक हों जैसे वह और पिता एक हैं (योहन 17ः11, 17ः21)। ऐसी एकता सार की समानता के बिना संभव नहीं हो सकती, और सभी विश्वासियों में यह समानता है (गलातियों 3ः26-28), जैसे पिता और पुत्र में यह समानता है। हम तभी एक हो सकते हैं जब हमारे बीच ईश्वर की उपस्थिति हो।

ख. यहूदियों ने उसे पत्थरवाह करने के लिए फिर पत्थर उठाएः

क्योंकि यहूदियों ने येसु को ईश्वर नहीं माना, इसलिए यह कथन उनके लिए ईशनिन्दा था। यद्यपि ईशनिन्दा की सजा पत्थरवाह करना थी (लेवि 24ः16), फिर भी ये लोग कानून की उचित प्रक्रिया को अपना कार्य करने नहीं दे रहे थे।

ग. मैंने अपने पिता की ओर से तुम्हें बहुत से अच्छे काम दिखाए हैंः

“उसके सभी काम पिता के निर्देश से किए गए थे (योहन 5ः19); वे ‘अच्छे काम’ (एर्गे कला, ‘सुन्दर काम’) थे।” (ब्रूस)। येसु ने इतने अधिक अच्छे काम किए कि यदि वे सभी लिखे जाते तो संसार में भी उनकी पुस्तकों के लिए स्थान न होता (योहन 21ः25)।

घ. किसी अच्छे काम के कारण हम तुम्हें पत्थरवाह नहीं करतेः

यहाँ यहूदियों ने अप्रत्यक्ष रूप से येसु के अच्छे कामों को स्वीकार किया।

ड. क्योंकि तू मनुष्य होकर अपने आप को ईश्वर बनाता हैः

येसु के समय के यहूदी स्पष्ट रूप से समझते थे कि येसु स्वयं को ईश्वर होने का दावा कर रहे थे। वास्तव में येसु को स्वयं को ईश्वर बनाने की आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि वह ईश्वर हैं।

5. (34-39) येसु स्तोत्र संहिता 82 और अपने कामों के आधार पर तर्क करते हैं।

क. येसु ने उन्हें उत्तर दियाः

धार्मिक अगुवों ने येसु को घेर लिया था (योहन 10ः24) और अब उन्हें मार डालने के लिए पत्थर पकड़े हुए थे (योहन 10ः31)। येसु ने घबराहट नहीं दिखाई और न भागे; उन्होंने अपने वचन की सामर्थ्य से उन्हें रोक दिया।

ख. क्या तुम्हारी व्यवस्था में यह नहीं लिखा है, “मैंने कहा, ‘तुम देवता हो’”ः

अब येसु उन्हें उस धर्मग्रन्थ से समझाने का प्रयास करते हैं जिससे वे स्वयं बहुत परिचित थे। स्तोत्र 82 के न्यायियों को “देवता” कहा गया था क्योंकि अपने पद में वे अन्य मनुष्यों के भाग्य का निर्णय करते थे। इसी प्रकार निर्गमन 21ः6 और 22ः8-9 में ईश्वर ने सांसारिक न्यायियों को “देवता” कहा।

ग. यदि उसने उन्हें देवता कहा, जिनके पास ईश्वर का वचन आया, तो तुम कैसे कहते हो कि जिसे पिता ने संसार में भेजा है वह ईशनिन्दा करता है क्योंकि मैंने कहा, “मैं ईश्वर का पुत्र हूँ?”ः

येसु ने तर्क दिया, “यदि ईश्वर ने इन अन्यायी न्यायियों को उनके पद के कारण ‘देवता’ की उपाधि दी, तो तुम मेरे विषय में ‘ईश्वर का पुत्र’ कहने को ईशनिन्दा क्यों मानते हो, जबकि मेरे और मेरे कामों की गवाही तुम्हारे सामने है?”

वे न्यायी थे जिनके पास ईश्वर का वचन आया था, जबकि येसु स्वयं ईश्वर द्वारा भेजे गए हैं, अर्थात ईश्वर का वही वचन जो देहधारी हुआ।

घ. और धर्मग्रन्थ रद्द नहीं किया जा सकताः

यह पूरे धर्मग्रन्थ के लिए एक सामान्य नियम है, लेकिन येसु ने इसे यहाँ एक अपेक्षाकृत अस्पष्ट अंश पर लागू किया जहाँ मुख्य बात एक ही शब्द पर आधारित थी, जिसका उपयोग ईश्वर ने मानव न्यायियों के लिए किया था।

ड. यदि मैं पिता के काम नहीं करता तो मेरा विश्वास न करो, परन्तु इसलिए विश्वास करो कि मैं पिता के काम करता हूँः

येसु की प्रमाणिकता यह है कि उनका भोजन पिता की इच्छा पूरी करना है (योहन 4ः32)।

च. ताकि तुम जानो कि पिता मुझ में है और मैं पिता में हूँः

येसु द्वारा पिता के काम करना इस बात का प्रमाण है कि पिता येसु में हैं और येसु पिता में हैं।

छ. इसलिए उन्होंने फिर उसे पकड़ने का प्रयास किया, परन्तु वह उनके हाथ से निकल गयाः

फिर एक बार येसु के शत्रु अपनी हिंसक योजना को पूरा करने में असमर्थ रहे, क्योंकि समय अभी नहीं आया था।

6. (40-42) येसु यरदन के पार जाते हैं और बहुत लोग विश्वास करते हैं।

क. वह फिर यरदन के पार चला गयाः

येसु शत्रुतापूर्ण धार्मिक अगुवों के बीच येरूसालेम में नहीं रहे। यह जानते हुए कि समय कम था लेकिन अभी उनकी गिरफ्तारी और क्रूस पर चढ़ाए जाने का समय नहीं आया था, येसु यरदन के पार चले गए।

ख. योहन ने कोई चिन्ह नहीं दिखायाः

योहन बपतिस्मा देने वाला बहुत लोकप्रिय था, यद्यपि उसने कोई चमत्कार नहीं किया। योहन का नैतिक पक्ष दृढ़ था और वह अधिकार के साथ सत्य बोलता था। येसु ने योहन की प्रशंसा की (मत्ती 11ः11)। ईश्वर के शक्तिशाली सेवक बनने के लिए चमत्कार करना बहुत आवश्यक नहीं है।

ग. तब बहुत लोग उसके पास आए... और वहाँ बहुतों ने उस पर विश्वास कियाः

मनुष्य के विरोध के बावजूद ईश्वर का कार्य चलता रहा।

“बुराई से हार मत मानो, बल्कि भलाई से बुराई को जीतो“ (रोमियों 12ः21)। “इसलिए सही काम करने में हिम्मत न हारें... जब भी मौका मिले, सबके भले के लिए काम करें...“ (गलातियों 6ः9-10; 2 थेसलनीकियों 3ः13)


Praise the Lord!