रविसोममंगलबुधगुरुशुक्रशनि
1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
3031

विवरण: 13 मई

 Jayesu Hindi Catholic Website

मई 13

फातिमा की महारानी

मई 13, 1917 में पुर्तगाल के छोटे से गांव फातिमा में तीन चरवाहों के बच्चों के लिए माता मरियम के दिव्यदर्शन की सालगिरह है। नौ वर्षीय लूसिया, उनके चचेरे भाई आठ साल के फ्रांसिस्को, और उनकी छह वर्शीय बहन जसिन्ता को 13 मई, 1917 और 13 अक्टूबर, 1917 के बीच छह बार माँ मरियम दिखाई दिए।

फातिमा की कहानी 1916 में शुरू होती है, जब, प्रथम विश्व युद्ध की पृष्ठभूमि में, जिसने यूरोप को अभी तक देखे गए युद्ध के सबसे भयानक और शक्तिशाली रूपों से परिचित कराया था, और साम्यवादी क्रांति के एक साल पहले जो रूस और बाद में पूर्वी यूरोप को उग्रवादी नास्तिक सरकारों के तहत छह दशकों के उत्पीड़न में डुबो देगी, तीन बच्चों को एक प्रकाशमान व्यक्ति दिखाई दिया जो अपने परिवार की भेड़ों को चरा रहे थे। ‘‘मैं शांति का दूत हूँ,‘‘ उस आकृति ने कहा, जो उस वर्ष दो बार उनके सामने प्रकट हुआ और उन्हें उन कष्टों को स्वीकार करने के लिए प्रोत्साहित किया जो प्रभु ने उन्हें उन लोगों के पापों की प्रतिपूर्ति के रूप में झेलने की अनुमति दी, जो उन्हें नाराज करते हैं, और पापियों के मनपरिवर्तन के लिए लगातार प्रार्थना करने के लिए कहा।

फिर, माता मरियम ने, 1917 के मई महीने के 13 वें दिन, ‘एक महिला जो पूरी तरह से सफेद वस्त्र धारण किए, सूरज से भी ज्यादा शानदार‘ एक दिव्यदर्शन द्वारा खुद को तीन बच्चों के सामने प्रस्तुत किया और कहा, ‘‘कृपया मुझसे डरो मत, मैं तुम्हें नुकसान नहीं पहुँचाऊँगी।” लूसिया ने उनसे पूछा कि आप कहाँ से आई है और उन्होंने जवाब दिया, ‘‘मैं स्वर्ग से आई हूँ।‘‘ महिला ने सोने से धारित सफेद आवरण पहना था और हाथ में माला धारण कर रखी थी। महिला ने उनसे प्रार्थना करने और खुद को पवित्र त्रित्व के लिए समर्पित करने और ‘‘हर दिन दुनिया में शांति लाने और युद्ध को समाप्त होने हेतु माला विनती करने को कहा।

उन्होंने यह भी खुलासा किया कि बच्चे पीड़ित होंगे, विशेष रूप से अपने दोस्तों और परिवारों के अविश्वास से, और दो छोटे बच्चों, फ्रांसिस्को और जसिंता को बहुत जल्द स्वर्ग ले जाया जाएगा, लेकिन लूसिया उनके निष्कलंक हृदय के संदेश और भक्ति को फैलाने के लिए अधिक समय तक जीवित रहेंगी।

आखिरी दिव्यदर्शन में मरियम ने लूसिया के सवाल के जवाब में अपना नाम प्रकट कियाः ‘‘मैं माला की महारानी हूँ।‘‘

मरियम के एक वादे के बाद कि वह लोगों को दिखाएगी कि दिव्यदर्शन सच थे, उस दिन, 70,000 लोग दिव्यदर्शन को देखने के लिए आए थे, जिसे सूर्य का चमत्कार के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने देखा कि सूर्य तीन वृत्त बनाता है और आकाश के चारों ओर एक अविश्वसनीय वक्र गति में घूमता है, जिसने उनके मन में दिव्यदर्शन की सत्यता के बारे में कोई संदेह नहीं छोडा। 1930 तक धर्माध्यक्ष ने दिव्यदर्शन को विश्वसनीय ठहराया और उन्हें कलीसिया द्वारा प्रामाणिक के रूप में अनुमोदित किया गया था।

माता मरियम ने बच्चों को उन हिंसक आज़माइशों से संबंधित संदेश दिया, जो बीसवीं शताब्दी में युद्ध, भुखमरी, और कलीसिया और पवित्र पिता के उत्पीड़न के माध्यम से दुनिया को पीड़ित करेंगे, अगर दुनिया ने पापों के लिए क्षतिपूर्ति नहीं की। उन्होंने कलीसिया को प्रार्थना करने और ईश्वर को बलिदान चढ़ाने का आह्वान दिया ताकि दुनिया में शांति आ सके और परीक्षण टाले जा सकें।

फातिमा की महारानी ने तीन भविष्यवाणी ‘‘रहस्यों‘‘ का खुलासा किया, जिनमें से पहले दो पहले ही प्रकट हुए थे जिसमें नरक और वहां की आत्माओं की दृष्टि का उल्लेख है, मरियम के निश्कलंक हृदय के प्रति एक उत्साही भक्ति के लिए अनुरोध, दूसरे विश्व युद्ध की भविष्यवाणी और अंत में, खीस्तीय धर्म को त्यागकर और साम्यवाद अधिनायकवाद को गले लगाकर रूस द्वारा मानवता को होने वाले भारी नुकसान की भविष्यवाणी। तीसरे ‘‘रहस्य‘‘ को वर्ष 2000 तक प्रकट नहीं किया गया था, और उन सतावटों का उल्लेख किया गया था जिन्हें पिछली शताब्दी में मानवता को झेलना पडा था : ‘‘अच्छे लोग शहीद हो जाएंगे; संत पिता को बहुत कुछ सहना होगा; विभिन्न राष्ट्रों का सर्वनाश हो जाएगा‘‘। 20 वीं सदी के संत पिताओं की पीड़ा की व्याख्या 1981 में संत पिता योहन पौलुस द्वितीय पर हत्या के प्रयास को शामिल करने के लिए की गई है, जो 13 मई को हुई थी, जो दिव्यदर्शन की 64वीं वर्षगांठ थी।

संत पिता ने निश्चित मृत्यु से उनके बचने का श्रेय माता मरियम के हस्तक्षेप को दियाः ‘‘... यह एक माँ का हाथ था जिन्होंने गोली के मार्ग का मार्गदर्शन किया और संत पिता अपना दम तोड़ते समय मृत्यु की दहलीज पर रुक गए।‘‘

फातिमा के संदेश का केंद्रीय अर्थ क्या है? कलीसिया ने हमेशा जो सिखाया है, उनसे अलग कुछ भी नहीं हैः संत पिता बेनेडिक्ट सोलहवें, ने इसे ‘‘प्राणों के लिए मुक्ति‘‘ के मार्ग के रूप में प्रार्थना करने के लिए कहा है और इसी तरह, तपस्या और मनपरिवर्तन के लिए पुकार।” शायद फातिमा में माता मरियम के दिव्यदर्शन का सबसे प्रसिद्ध कथन उनकी आश्वस्त घोषणा थी कि ‘‘मेरा निश्कलंक हृदय विजयी होगा‘‘। “ संसार में तुम्हें क्लेश सहना पडेगा। परन्तु ढारस रखो- मैंने संसार पर विजय पायी है।‘‘ (योहन 16:33)। फातिमा का संदेश हमें इस वादे पर भरोसा करने के लिए आमंत्रित करता है।


Copyright © www.jayesu.com
Praise the Lord!