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विवरण: 14 फरवरी

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फरवरी 14

संत सिरिल और मेथोडियुस

सिरिल और मेथोडियुस भाई थे। इनके माता पिता का नाम मरिया एवं लियो था। दोनों का जन्म थेसेलनिकीया में हुआ था। सिरिल का जन्म सन् 827-828 में और मेथोडियुस का सन् 815-820 में। उनके पिता एक यूनानी संभागीय अधिकारी थे।

अपनी पढ़ाई समाप्त करने के बाद सिरिल ने शासन करने से इंकार कर दिया। मेथोडियुस उनके जेष्ठ ने कुछ समय तक शासन करने के बाद सबकुछ छोड़ कर एक मठवासी बन गये थे। सिरिल भी उसी मठ के सदस्य बन गये।

सिरिल कुछ शिक्षा प्राप्त करने के बाद पुरोहित बन गये। लेकिन सन् 867-868 तक उपयाजक ही बने रहे। सिरिल को ईशशास्त्र का अच्छा ज्ञान था। वे अरबी और इब्रानी भाषाओं में प्रवीण थे। सन् 862 में महान मोराविया के राजकुमार रास्टीस्लाव ने सम्राट मिखाएल तृतीय तथा प्राधि-धर्माध्यक्ष फोसियुस से निवेदन किया कि वे स्लेविक जनता को सुसमाचार सुनाने के लिये मिशनरियों को भेजे। सम्राट ने सिरिल और मेथोडियुस को इस कार्य के लिये तुरन्त भेजा। उन्होंने सबसे पहले अपने सहयोगियों को प्रशिक्षण दिया। सन् 863 में उन्होंने पुराने गिर्जा स्लावोनिक नाम से जाने जानी वाली भाषा में बाईबिल को अनुवाद करने का कार्य शुरू किया और इसी सिलसिले में उन्होने महान मोराविया की यात्रा की। इस कार्य के लिये उन्होंने ग्लागोलितिक अक्षरमाला का अविष्कार किया। उन्होंने महान मोराविया के लिये सबसे प्रथम नागरिक सहिंता लिखी। दोनो भाईयों ने मिलकर सुसमाचार, स्त्रोत, संत पौलुस के पत्र तथा धर्मविधि की पुस्तकों का स्लोवानिक भाषा में अनुवाद किया। जर्मन भाषा बोलने वाले पुराहितों ने सिरिल और मेथोडियुस के स्थानीय भाषा के पूजन विधि में उपयोग का विरोध किया। जब धर्माध्यक्ष ने स्लाविक धर्माध्यक्षों तथा पुराहितो का अभिषेक करने से इंकार कर दिया तो सिरिल को रोम से अपील करनी पड़ी। सिरिल और मेथोडियुस ने रोम जाकर संत पापा अद्रियन द्वितीय से मुलाकात की जिन्होंने उनकी नई धर्मविधि को मान्यता प्रदान की। रोम में ही सिरिल की मृत्यु हुई। मेथोडियुस ने अपने काम को अगले 16 साल तक जारी लगा। वे स्लाविक जनता के लिये संत पापा के प्रतिनिधि बने और उनका धर्माध्यक्ष के रूप में अभिषेक हुआ।

बवेरिया धर्माध्यक्षों ने मेथोडियुस के विरूद्ध सम्राट लुईस जर्मन से शिकायत की। फलस्वरूप मेथोडियुस को तीन साल के लिये निष्कासित किया गया। संत पापा योहन आठवें ने उन्हें स्वतंत्र करवाया। शिकायतों को सिलसिला जारी रहा मेथोडियुस को फिर रोम जाकर स्लावोनिक पूजनविधि की सार्थकता को समझाना पड़ा। बाईबिल के अनुवाद को आठ महीने में पूरा करने के पश्चात पुण्य सप्ताह के मंगललवार के दिन उनकी मृत्यु हुई।


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