रविसोममंगलबुधगुरुशुक्रशनि
123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031

विवरण: 2 अक्टूबर

 Jayesu Hindi Catholic Website

संरक्षक स्वर्गदूत -अनिवार्य स्मृति

अक्टूबर 2

निर्गमन 23:20-21 में प्रभु का वचन कहता है, “मैं एक दूत को तुम्हारे आगे-आगे भेजता हूँ। वह रास्तें में तुम्हारी रक्षा करेगा और तुम्हें उस स्थान ले जायेगा, जिसे मैंने निश्चित किया है। उसका सम्मान करो और उसकी बातें सुनो।” 2 अक्टूबर 2014 को संत पापा फ्रांसिस ने सुबह के मनन-चिंतन में कहा, “हम सभी के पास एक स्वर्गदूत होता है जो हमेशा हमारे साथ रहता है, जो हमें कभी नहीं छोड़ता है और हमें अपना रास्ता नहीं खोने में मदद करता है। … जीवन एक यात्रा है, हमारा जीवन एक यात्रा है जो हमें उस स्थान तक ले जाती है जिसे प्रभु ने तैयार किया है। ... कोई भी अकेला नहीं चलता: कोई भी नहीं!" काथलिक परम्परा के अनुसार हरेक व्यक्ति की देखरख के लिए प्रभु ने एक स्वर्गदूत को नियुक्त किया है। हरेक विश्वासी के बगल में एक चरवाहे या रक्षक के रूप में वह संरक्षक दूत रहता है। हमारे संरक्षक दूत हमें संरक्षण प्रदान करते हैं, हमारे लिए और हमारी ओर से प्रार्थना करते हैं तथा हमें राह दिखाते हैं। हमारे जन्म से लेकर मृत्यु तक वे हमारी देखभाल करते तथा हमारे लिए ईश्वर के समक्ष मध्यस्थता करते हैं। इस धरती पर ही हमें वे हमारे साथ रह कर स्वर्ग की अनुभूति प्रदान करते हैं। (देखें काथलिक कलीसिया की धर्मशिक्षा 336) प्रभु येसु कहते हैं, “सावधान रहो, उन नन्हों में एक को भी तुच्छ न समझो। मैं तुम से कहता हूँ - उनके दूत स्वर्ग में निरन्तर मेरे स्वर्गिक पिता के दर्शन करते हैं।“ (मत्ति 18:10) हमारे संरक्षक दूत हमेशा हमारे साथ रहते हैं, लेकिन वे उसी समय निरन्तर प्रभु ईश्वर के दर्शन करते हैं।


Copyright © www.jayesu.com
Praise the Lord!