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विवरण: 7 अप्रैल

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अप्रैल 07

संत योहन बपतिस्ता डी ला साल

योहन बपतिस्ता डी ला साल का जन्म 30 अप्रैल, 1651 में फ्रांस के रिम्स में एक धनी परिवार में हुआ था। वह लुई डी ला साल और निकोल मोएट डी ब्रोइलेट के सबसे बड़े बेटे थे। निकोल का परिवार एक कुलीन वर्ग था और एक सफल अंगुरी शराब व्यवसाय चलाता था। ला साल ने ग्यारह साल की उम्र में एक आधिकारिक समारोह में ‘‘मुंडन प्राप्त किया‘‘, जो एक बालक के इरादे को चिह्नित करता है, और उनके माता-पिता का भी जो ईश्वर की सेवा के लिए अपने युवा बेटों की समर्पित करते हैं। जब वे सोलह वर्ष के थे, तब उन्हें रिम्स कैथेड्रल का कैनन नामित किया गया। उन्हें कॉलेज भेजा गया और उन्होंने कला विशारद की डिग्री प्राप्त की। जब डी ला साल ने अपने शास्त्रीय, साहित्यिक और दार्शनिक पाठ्यक्रम पूरे कर लिए थे, तो उन्हें संत-सल्पिस के सेमिनरी में प्रवेश के लिए पेरिस भेजा गया था। लेकिन 2 साल के भीतर उनके माता-पिता की मृत्यु ने उन्हें सेमिनरी छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया। इक्कीस साल की उम्र में, परिवार के मुखिया होने के नाते उनपर अपने चार भाइयों और दो बहनों को शिक्षित करने की जिम्मेदारी थी। उन्होंने अपना धर्मशास्त्रीय अध्ययन पूरा किया और 26 वर्ष की आयु में 9 अप्रैल 1678 को पुरोहित दीक्षित किए गए। दो साल बाद उन्होंने धर्मशास्त्र में डॉक्टर की उपाधि प्राप्त कर ली।

उस समय बालक येसु की धर्मबहनें एक नई धार्मिक मण्डली थीं जिनका काम बीमारों की देखभाल और गरीब लड़कियों की शिक्षा प्रदान करना था। युवा पुरोहित ने उन्हें स्थापित होने में मदद की, और फिर उनके पादरी और पाप स्वीकारक अनुष्ठाता के रूप में सेवा की। धर्मबहनों के साथ अपने काम के माध्यम से ही 1679 में उनकी मुलाकात एड्रियन नायल से हुई। एड्रियन नायल को ला साल के गृह नगर में गरीबों के लिए एक स्कूल स्थापित करने में मदद करने के प्रयास के रूप में जो कार्य उन्होंने शुरू किया वह धीरे-धीरे उनके जीवन का काम बन गया। गरीबों की दुर्दशा से प्रेरित होकर, जो इस दुनिया या अगले में ‘‘मुक्ति से बहुत दूर‘‘ लग रहे थे, उन्होंने अपनी प्रतिभा और उन्नत शिक्षा को बच्चों की सेवा में लगाने का फैसला किया जो ‘‘अक्सर खुद के भरोसे छोड़ दिए और बुरी तरह से पाले गए‘‘ थे।

ला साल जानते थे कि रिम्स में शिक्षक संघर्ष कर रहे थे, नेतृत्व, उद्देश्य और प्रशिक्षण की कमी थी, और उन्होंने खुद को पुरुषों के इस छोटे समूह को उनके काम में मदद करने के लिए तेजी से जानबूझकर कदम उठाते हुए पाया। इनमें उन्हें अपने घर पर भोजन के लिए आमंत्रित करना, फिर एक अगले कदम के रूप में उनके साथ किराए के घर में रहना शामिल था। ला साल ने स्कूलों की स्थापना और शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए अपना पूरा ध्यान समर्पित करने के लिए अपनी कैननरी से इस्तीफा देने का फैसला किया। ला साल ने इस तरह एक नया धार्मिक संस्थान शुरू किया, जिसमें कोई भी पुरोहित नहीं था, इसके सदस्यों में सेः ख्रीस्तीय स्कूलों के भाइयों का संस्थान, या केवल ख्रीस्तीय ब्रदर्स। डी ला साल ब्रदर्स पहला ऐसा रोमन काथलिक शिक्षण धार्मिक संस्थान था जिसमें कोई पुरोहित शामिल नहीं था।

ला साल के उद्यम को कलीसिया के अधिकारियों के विरोध का सामना करना पड़ा, जिन्होंने धार्मिक जीवन के एक नए रूप के निर्माण का विरोध किया, ‘‘एक साथ और संघ द्वारा‘‘ स्वतंत्र स्कूलों का संचालन करने के लिए पवित्र लोगों का एक समुदाय। शैक्षिक प्रतिष्ठान ने उनके नवीन तरीकों का विरोध किया। 1685 में, ला साल ने रिम्स, फ्रांस में उस शाला को स्थापित किया जिन्हें आम तौर पर पहला सामान्य स्कूल माना जाता है - यानी, एक स्कूल जिसका उद्देश्य शिक्षकों को प्रशिक्षित करना है। तपस्या और थकाऊ मजदूरी से पस्थ हुए, ला साल की मृत्यु रूएन के पास संत योन में हुई, 1719 की शुरुआत में पुण्य शुक्रवार पर, उनके 68 वें जन्मदिन से केवल तीन सप्ताह पहले। संत पिता लियो तेरहवें ने 24 मई, 1900 को ला साल को संत घोषित किया। और संत पिता पियुस दसवें ने 1904 में 15 मई को उत्सव के लिए सामान्य रोमन कैलेंडर में उनका पर्वदाखिल किया। उनके जीवन और प्रेरणादायक लेखन के कारण, संत पिता पियुस बारहवें ने उन्हें 15 मई, 1950 को युवाओं के सभी शिक्षकों का संरक्षक संत घोषित किया। कलीसियाई कैलेंडर के 1969 के संशोधन में, संत पिता पौलुस छठें ने उनके पर्व के दिन को 7 अप्रैल को स्थानांतरित कर दिया जो उनके मृत्यु या ‘‘स्वर्ग में जन्म‘‘ है।


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