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विवरण: 8 नवंबर

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नवंबर 08

संत योहन डंस स्कोतुस

संत योहन डंस स्कोतुस का जन्म लगभग 1266 को लिटिलडीन, स्कॉटलेंड में एक आयरिश परिवार में हुआ। उनमें बचपन से ही मेधावी बुद्धि के गुण दिखते थे। चूंकि वे एक सम्पन्न परिवार से थे इसलिये उनको उच्च शिक्षा प्रदान की गयी। उनके अंकल फादर इलियास डंस से उनको प्रारंभिक शिक्षा मिली। अपनी पुरोहिताई की शिक्षा के दौरान उन्होंने ईशशास्त्र एवं दर्शनशास्त्र में महारत हासिल की। वे पुरोहित बनने के पूर्व ही अपने साथियों को ईशशास्त्र पढाने लगे थे। 1291, 17 मार्च को उनका पुरोहिताभिषेक हुआ। चूंकि उनकी अध्ययन करने में गहरी रूची थी इस कारण उन्होंने पेरिस तथा ऑक्सफोर्ड विश्वविघालयों में अगले 8 वर्ष तक अध्ययन जारी रखा। इसके उपरांत वे केमब्रिज तथा सोरबोन, पेरिस विश्वविघालयों में पढाने लगे।

इसी दौरान फिलिप फेर का संत पापा बोनिफेस आठवें के साथ कुछ मुददों को लेकर गहरा तथा सार्वजनिक विवाद हो गया। फादर योहन डंस ने संत पापा जो ख्राीस्त के विकार, उत्तराधिकारी माने जाते हैं कि समप्रभुता का बचाव किया। इस कारण योहन फ़्रान्स के राजा के क्रोध के पात्र बने। फ़्रान्स के राजा ने उन्हें तथा उनके साथियों को तुरंत फ़्रान्स छोडने के आदेश दिये। इंग्लैंड वापस लौटने पर वे ऑक्सफोर्ड में पढाने लगे। शीघ्र ही उनकी बुद्धि तथा शिक्षण कला की ख्याति विदेशों में भी फैल गयी तथा अनेक स्थानों से विद्यार्थी उनसे शिक्षा पाने आने लगे।

1306 में वे पुनः पेरिस लौटे। अब उनकी ख्याति माता मरियम के विशेषज्ञ के रूप में होने लगी। उन्होंने मरियम के निष्कलंक गर्भागमन विषय पर उठने वाली सभी आपत्तियों तथा भ्रामक धारणाओं का बुद्धिमता तथा ख्राीस्तीय विश्वास के साथ खन्ड्न किया तथा साबित किया कि मरियम का गर्भागमन एक निष्कलंक गर्भागमन था। 1307 में वे कोलोन गये जहॉ 08 नवम्बर 1308 में उनकी मृत्यु हो गयी। योहन डंस की कब्र पर हजारों श्रद्धालु आकर प्रार्थना करते है।

संत योहन ने ईश्वर द्वारा प्रदान बुद्धि तथा ज्ञान के वरदान को उनकी कलीसिया के बचाव तथा ख्रीस्त की शिक्षा को तर्कसंगत तरीके से अधिक प्रभावी रूप से फैलाने में मदद की। उनकी बातों तथा व्याखानों से लोग प्रभावित होते, उनके संशय दूर होते तथा वे ख्राीस्त की ओर मुडते थे।

संत योहन एक साहसी पुरोहित थे। कलीसिया तथा सच्चे मूल्यों का बचाव करने में कभी पीछे नहीं रहे। उनके साहस के कारण कईयों को बुरा लगा जिससे उन्होंने योहन का विरोध किया। किन्तु योहन निडर होकर सच्चाई की शिक्षा देते रहें।


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