चंगाई पाने के लिए ज़रूरी बातें

Francis Scaria 1. विनम्रता

main imageराजाओं के दूसरे ग्रन्थ के अध्याय 5 में हम देखते हैं कि चंगाई प्राप्त करने के लिए हमें विनम्र बनना पडता है। आराम के राजा के सेनाध्यक्ष नामान कोढ़ से पीड़ित था। वह कोढ़ से चंगाई पाने के लिए अपने घोड़ों और रथों के साथ आ कर एलीशा के घर के द्वार पर खड़ा हो गया। नबी बाहर नहीं आए बल्कि उन्होंने उसे यह सन्देश कहला भेजा, “आप जा कर यर्दन नदी में सात बार स्नान कीजिए। आपका शरीर स्वच्छ हो जायेगा और आप शुद्ध हो जायेंगे।” नामान क्रुद्ध हो उठा और यह कहते हुए चला गया, “मैं समझ रहा था कि वह स्वयं बाहर आ कर मुझ से मिलेंगे, अपने प्रभु-ईश्वर का नाम ले कर प्रार्थना करेंगे और कोढ़ के स्थान पर हाथ फेर कर उसे दूर कर देंगे। क्या दमिश्क की अबाना और फ़रफर नामक नदियों का जल इस्राएल के सब जलाशयों से बढ़कर नहीं है? क्या मैं उन में स्नान कर शु़द्ध नहीं हो सकता था?” इस पर वह मुड़ कर क्रोध के आवेश में चला गया। उसके सेवक उसके पास आये और यह कह कर उसे समझाने लगे, “पिता! यदि नबी ने आप को कोई कठिन कार्य करने को कहा होता, तो आप उसे अवश्य करते। जब उन्होंने इतना ही कहा- स्नान कीजिए और आप शुद्ध हो जायेंगे, तो आप को ऐसा अवश्य करना चाहिए।” इसलिए जैसा कि एलीशा ने उस से कहा था, उसने जा कर यर्दन नदी में सात बार डुबकी लगायी और उसका शरीर फिर छोटे बालक के शरीर-जैसा स्वच्छ हो गया। अगर नामान विनम्र नहीं बनता, तो उसे चंगाई प्राप्त नहीं होती।

2. चंगाई पाने की इच्छा

योहन 5:6 में हम देखते हैं कि अड़तीस वर्षों से बीमार व्यक्ति से प्रभु येसु पूछते हैं, “क्या तुम अच्छा हो जाना चाहते हो”। हमें यह सवाल अजीब-सा लगता है क्योंकि हमें लगता है कि कोई भी बीमार रहना नहीं चाहता है। लेकिन यह संभव है कि कोई बीमार व्यक्ति ठीक होना नहीं चाहता हो।

3. विश्वास

मारकुस 9:14-23 में एक घटना का विवरण है। रूपान्तरण के बाद जब येसु पहाड पर से उतर कर शिष्यों के पास आये, तब उन्हें पता चला कि एक व्यक्ति अपने बेटे को, जो एक गूँगे अपदूत के वश में था, येसु के शिष्यों के पास ले आया था। लेकिन वे उस अपदूत को निकाल नहीं सके। येसु ने अपने शिष्यों को डाँटते हुए कहा, “अविश्वासी पीढ़ी! मैं कब तक तुम्हारे साथ रहूँ? कब तक तुम्हें सहता रहूँ?” उस लडके के पिता में भी विश्वास की कमी थी। उसने येसु ने कहा, “यदि आप कुछ कर सकें, तो हम पर तरस खा कर हमारी सहायता कीजिए।” तब येसु ने उस से कहा, “यदि आप कुछ कर सकें! विश्वास करने वाले के लिए सब कुछ सम्भव है” तब लड़के के पिता ने पुकार कर कहा, “मैं विश्वास करता हूँ, मेरे अल्प विश्वास की कमी पूरी कीजिए”। इस प्रकार हम देखते हैं कि शिष्यों में और उस लडके के पिता में विश्वास की कमी थी। कई चंगाइयों के समय प्रभु कहते हैं, “तुम्हारे विश्वास ने तुम्हारा उध्दार किया है” (देखिए मारकुस 5:34; 10:52; लूकस 7:50; 17:19)। मारकुस 2:1-12 में हम पढ़ते हैं कि कुछ लोग एक अर्धांग रोगी को चार आदमियों से उठवा कर येसु के पास ले आये। उन लोगों का विश्वास देख कर येसु ने उस रोगी को चंगा किया। इस प्रकार हम देखते हैं कि विश्वास चंगाई के लिए ज़रूरी है।

4. ईश्वर की इच्छा को स्वीकारना

मारकुस 1:40-41 में एक कोढ़ी ईसा के पास आ कर और घुटने टेक कर उन से अनुनय-विनय करते हुए कहता है, “आप चाहें तो मुझे शुद्ध कर सकते हैं”। येसु को तरस हो आता है और वे हाथ बढ़ाकर यह कहते हुए उसका स्पर्श करते हैं, “मैं यही चाहता हूँ- शुद्ध हो जाओ”। वह कोढ़ी ठीक होना तो चाहता है लिकिन येसु की इच्छा पर छोड़ देता है। यह एक उत्तम प्रार्थना है। माता मरियम ने भी इस प्रकार की प्रार्थना की जब उन्होंने कहा, “मैं प्रभु की दासी हूँ, तेरा कथन मुझमें पूरा हो जाये” (लूकस 1:38)। इसी प्रकार प्रभु येसु भी प्राणपीड़ा के समय कहते हैं, “मेरी इच्छा नहीं, बल्कि तेरी इच्छा पूरी हो” (मारकुस 14:36)।

5. आध्यात्मिक चंगाई की प्राधमिकता

एक दिन जब कुछ लोगों ने घर के छत पर चढ़ कर, खपड़े हटा कर खाट के साथ लोगों के बीच में एक अर्धांग रोगी को ईसा सामने उतार दिया तो येसु ने उन लोगों का विश्वास देख कर उस अर्धांग रोगी से कहा, “भाई! तुम्हारे पाप क्षमा हो गये हैं” (लूकस 5: 20)। इस प्रकार उसे आध्यात्मिक चंगाई प्रदान करने के बाद ही येसु उसे शारीरिक चंगाई देते हैं। मारकुस 8:36 में प्रभु येसु प्रश्न करते हैं, “मनुष्य को इससे क्या लाभ यदि वह सारा संसार तो प्राप्त कर ले, लेकिन अपना जीवन ही गँवा दे?” हमें शरीर की तुलना में आत्मा की प्राधमिकता को पहचानना चाहिए।

-फादर फ्रांसिस स्करिया