Word of God

पास्का त्योहार की आशा

Happy_Easterपास्का त्योहार का सब से बडा सन्देश आशा का सन्देश है। हम दो दिन पहले की बातों पर ध्यान दें यानि पुण्य शुक्रवार का दिन की बातों पर।

करीब 30 साल के गुप्त जीवन के बाद, तीन साल से येसु अपना सार्वजनिक जीवन बिता रहे थे। गाँव-गाँव घूम कर वे सुसमाचार सुना रहे थे। वे रोगियों को चंगा कर रहे थे, कुष्ठरोगियों को शुध्द कर रहे थे और मृतकों को जिला रहे थे। वे बहुत से चमत्कार कर रहे थे। उनके पीछे बडी भीड लग जाती थी। वे उनको सुनना चाहते थे और उनके शिष्य बनना चाहते थे।

परन्तु सब कुछ अचानक बदल गया। पूरा वातावरण बदल गया। जिन्होंने होसाना कह कर उनका जयकार किया, वे ही अब उसे क्रूस दीजिए बोलने लगे।

यहूदी नेताओं ने रोमी शासन से अनुमति लेकर उनको गिरफ़्तार कर लिया। सभी शिष्य उनका साथ छोड कर चले गये। यूदस ने उन्हें तीस सिक्कों के लालच में पकडवाया। मत्ती 26:32 के अनुसार पेत्रुस पहले डींग मारता था – “आपके कारण चाहे सभी विचलित हो जाये, किन्तु मैं कभी विचलित नहीं होऊँगा”।

जब प्रभु उनके आत्मविश्वास पर प्रश्न-चिह्न लगाते हैं तब पेत्रुस यहाँ तक कहते हैं, “मुझे आपके साथ चाहे मरना ही क्यों न पड़े, मैं आप को कभी अस्वीकार नहीं करूँगा’’। लेकिन समय आने पर उन्होंने येसु का एक नहीं, दो नहीं, बल्कि तीन बार अस्वीकार किया। यह न केवल पेत्रुस की बात है। सुसमाचार बताता है, “और सभी शिष्यों ने यही कहा” (मत्ती 26:35)। लेकिन येसु की गिरफ़्तारी के समय वे सब के सब भाग गये।

Happy_Easterमारकुस का सुसमाचार 14:56-57 में हम यहाँ तक पढ़ते हैं कि येसु की गिरफ़्तारी के समय एक युवक, अपने नंगे वदन पर चादर ओढ़े, ईसा के पीछे हो लिया, किन्तु वह चादर छोड कर नंगा ही भाग गया। जब वे येसु को क्रूस पर चढ़ा रहे थे, तो शिष्यों में से सिर्फ़ योहन वहाँ पर उपस्थित थे। येसु के अंतिम संस्कार के लिए कुछ महिलाओं के अलावा यूसुफ़ और निकोदेमुस नामक दो गुफ्त शिष्य ही रह जाते हैं। वे जल्दीबाजी में उनके पार्थिव शरीर को दफनाते हैं और सब शोकाकुल हो चले जाते हैं। राजा ने उन की कब्र पर पहरा देने के लिए सैनिकों को भी नियुक्त किया। कितनी निराशा का वातावरण। इसी निराशा में दो दिन बीत जाते हैं।

लेकिन सदियों पहले नबियों के मुह से भविष्यवाणी की गयी थी कि वे अधोलोक में नहीं छोडे जायेंगे और न उनके शरीर को गलने दिया जायेगा। तीसरे दिन प्रभु येसु कब्र खोल कर बाहर आते हैं, वे पुनर्जीवित होते हैं। पूरी निराशा अब आशा में बदल जाती है।

येसु ने कहा था जब तक गेहूँ का दाना मिट्टी में गिर कर मर नहीं जाता तब तक नया पौधा नहीं बनेगा, वह फल उत्पन्न नहीं करेगा। अब वह पौधा दिखने लगता है। कब्र खाली है। येसु जगह-जगह लोगों को दर्शन दे रहे हैं। यह कितनी बडी आशा का सन्देश है !

पास्का त्योहार हमारे विश्वास का नींव है। सन्त पौलुस कुरिन्थियों को लिखते हुए अपने पहले पत्र में अध्याय 15, वाक्य 14-21 में कहते हैं, “यदि मसीह नहीं जी उठे, तो हमारा धर्मप्रचार व्यर्थ है और आप लोगों का विश्वास भी व्यर्थ है। तब हम ने ईश्वर के विषय में मिथ्या साक्ष्य दिया; क्योंकि हमने ईश्वर के विषय में यह साक्ष्य दिया कि उसने मसीह को पुनर्जीवित किया और यदि मृतकों का पुनरूत्थान नहीं होता, तो उसने ऐसा नहीं किया। कारण, यदि मृतकों का पुनरुत्थान नहीं होता, तो मसीह भी नहीं जी उठे। यदि मसीह नहीं जी उठे, तो आप लोगों का विश्वास व्यर्थ है और आप अब तक अपने पापों में फंसे हैं। इतना ही नहीं, जो लोग मसीह में विश्वास करते हुए मरे हैं, उनका भी विनाश हुआ है। यदि मसीह पर हमारा भरोसा इस जीवन तक ही सीमित है, तो हम सब मनुष्यों में सब से अधिक दयनीय हैं। किन्तु मसीह सचमुच मृतकों में से जी उठे। जो लोग मृत्यु में सो गये हैं, उन में वह सब से पहले जी उठे।” जब ऐसा लग रहा था कि सब कुछ समाप्त हो गया, तब नया जीवन पनपने लगता है।

इसायाह 40:29-31 में प्रभु का वचन कहता है, “वह थके-माँदे को बल देता और अशक्त को सँभालता है। जवान भले ही थक कर चूर हो जायें और फिसल कर गिर पड़ें, किन्तु प्रभु पर भरोसा रखने वालों को नयी स्फूर्ति मिलती रहती है। वे गरुड़ की तरह अपने पंख फैलाते हैं; वे दौड़ते रहते हैं, किन्तु थकते नहीं, वे आगे बढ़ते हैं, पर शिथिल नहीं होते।”

क्या सूरज को कोई छिपा सकता है या समुद्र को कोई ढ़क सकता है? फ़िर उन सब के सृष्टिकर्ता तथा जीवन के स्रोत को कौन एक कब्र में कैद कर सकता है? पास्का त्योहार का सब से बडा सन्देश है – हमें कभी निराश नहीं होना चाहिए, बल्कि आशावान बने रहना चाहिए। येसु में विश्वास करने वाले यह जानते हैं कि मृत्यु जीवन का विनाश नहीं बल्कि विकास है।

येसु हमारे लिए भी आशा का स्रोत बनते हैं। इब्रानियों 12:2-3 में कहा गया है – “ईसा हमारे विश्वास के प्रवर्तक हैं और उसे पूर्णता तक पहुँचाते हैं। उन्होंने भविष्य में प्राप्त होने वाले आनन्द के लिए क्रूस पर कष्ट स्वीकार किया और उसके कलंक की कोई परवाह नहीं की। अब वह ईश्वर के सिंहासन के दाहिने विराजमान हैं। कहीं ऐसा न हो कि आप लोग निरूत्साह हो कर हिम्मत हार जायें, इसलिए आप उनका स्मरण करते रहें, जिन्होंने पापियों का इतना अत्याचार सहा।” पास्का का सन्देश यह है कि हम क्रूस के उस पार देखें। प्रभु ने ऐसा ही किया था। हमें क्रूस के उस पार की महिमा को देख कर अपनी हिम्मत बनाये रखना चाहिए।

प्रेरित चरित 7:55 में जब सन्त स्तेफ़नुस के ऊपर किये गये अत्याचार उसकी चरमसीमा तक पहुँचता है, तो उन्हें ईश्वर अपनी महिमा का एक झलक दिखा कर उन्हें धीरज बना देते हैं। यह दृश्य देख कर कहने लगते हैं, “मैं स्वर्ग को खुला और ईश्वर के दाहिने विराजमान मानव पुत्र को देख रहा हूँ”। उसी अनुभव से उस अत्याचार में अपनी आशा को बनाये रखने की शक्ति उन्हें प्राप्त होती है। फलस्वरूप वे धीरज के साथ अपने जीवन की कुर्बानी देते हैं।

निर्गमन 33:18-23 में हम देखते हैं कि जब मूसा को बहुत-सी परेशानियों का सामना करना पडता है तो ईश्वर ने उनको अपनी महिमा का एक दर्शन उन्हें प्रदान किया। 1 राजाओं 19 में हम देखते हैं कि नबी एलियाह दुख-तकलीफ़ों के बीच ईश्वर ने मन्द समीर में अपनी महिमा प्रकट कर उन्हें धीरज बँधवाया।

येसु ने कई बार शिष्यों को अपने दुख-भोग तथा मृत्यु की भविष्यवाणी सुनायी। इस कारण शिष्य विचलित हो रहे थे। मत्ती 17:1-8 में हम देखते हैं कि उनके विश्वास और आशा को बनाये रखने के लिए येसु उनमें से तीन शिष्यों को जो बाद कलीसिया के स्तम्ब कहलायेंगे, एक पहाडी पर ले जाते हैं और उनके सामने येसु का रूपान्तरण होता है। येसु की इस वास्तविक महिमा को देख कर उनकी आशा बढ़ जाती है। रोमियों 8:18 संत पौलुस कहते हैं, “मैं समझता हूँ कि हम में जो महिमा प्रकट होने को है, उसकी तुलना में इस समय का दुःख नगण्य है”।

जैसे प्रवक्ता ग्रन्थ 40:1-6 बताता है, हमारा पथ्वी पर का जीवन संघर्षपूर्ण होता है। परेशानी, दुख-तकलीफ़ तथा संकट के समय हमें भी क्रूस के उस पार, हमें भविष्य में प्राप्त होने वाली महिमा, देखना चाहिए ताकि हम आशावान बने रहें। पुनरुत्थान पर मनन्‍ करते ही हमें पुण्य शुक्रवार के दुख को झेलने की हिम्मत मिलती है। आइए हम पास्का की आशा को स्वीकारें और दूसरों को भी दें। आप सभी लोगों को पास्का त्योहार की शुभकामनाएँ।

-फादर फ़्रांसिस स्करिया