📖 - प्रकाशना ग्रन्थ

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अध्याय 02

1) "एफेसुस की कलीसिया के स्वर्गदूत को यह लिखो-"जो अपने दाहिने हाथ में सातों तारों को धारण किये है और सोने के सात दीपाधारों के बीच घूम रहा है, उसका सन्देश इस प्रकार है:

2) मैं तुम्हारे आचरण, तुम्हारे परिश्रम और धैर्य से परिचित हूँ। मैं जानता हूँ कि तुम दुष्टों को सह नहीं सकते। जो अपने को प्रेरित कहते हैं, किन्तु हैं नहीं, तुमने उनकी परीक्षा ली है और उन्हें झूठा पाया है।

3) तुम्हारे पास धैर्य है। तुमने मेरे नाम के कारण कष्ट सहा है और हार नहीं मानी।

4) किन्तु मुझे तुम से शिकायत यह है कि तुमने अपना पहला धर्मोत्साह छोड़ दिया है।

5) इस पर विचार करो कि तुम कितने ऊँचे स्थान से गिरे हो। पश्चाताप करो और पहले जैसा आचरण करो। नहीं तो मैं तुम्हारे पास आ कर तुम्हारा दीपाधार उसके स्थान पर से हटा दूँगा।

6) फिर भी तुम में यह अच्छाई है कि तुम मेरी तरह निकोलाईयों के कर्मों से घृणा करते हो।

7) जिसके कान हो, वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है। मैं विजयी को उस जीवन-वृक्ष का फल खिलाऊँगा, जो ईश्वर की स्वर्ग-वाटिका के बीच है।

8) "स्मुरना की कलीसिया के स्वर्गदूत को यह लिखो- "जो प्रथम और अन्तिम है, जो मर गया था और पुनर्जीवित हो गया है, उसका सन्देश इस प्रकार है:

9) मैं तुम्हारे संकट और दरिद्रता से परिचित हूँ - फिर भी तुम धनी हो- और मैं यह भी जानता हूँ कि वे लोग तुम्हारी कितनी बदनामी करते हैं, जो अपने को यहूदी कहते है। किन्तु जो यहूदी नहीं, बल्कि शैतान के अनुयायी हैं।

10) तुम्हें जो कष्ट भोगना होगा, उस से मत डरो। शैतान तुम्हारी परीक्षा लेने के लिए तुम लोगों में कुछ को कैद में डाल देगा और तुम लोग दस दिनों तक संकट में पड़े रहोगे। तुम मृत्यु तक ईमानदार बने रहो और मैं तुम्हें जीवन का मुकुट प्रदान करूँगा।

11) "जिसके कान हों, वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है। विजयी को द्वितीय मृत्यु से केाई हानि नहीं होगी।

12) "पेरगामोन की कलीसिया के स्वर्गदूत को यह लिखो-"जिसके पास तेज दुधारी तलवार है, उसका सन्देश इस प्रकार हैः

13) मैं जानता हूँ कि तुम्हारा निवास कहाँ है- वह वहाँ है, जहाँ शैतान की गद्दी है। फिर भी तुम मेरा नाम दृढ़ बनाये रखते हो और तुमने उन दिनों भी मुझ में अपना विश्वास नहीं त्यागा, जब मेरा ईमानदार साक्षी अन्तिपस, तुम्हारे शहर में - जो शैतान का निवास स्थान है-

14) किन्तु मुझे तुम से कुछ शिकायतें हैं। तुम्हारे बीच कुछ ऐसे लोग रहते हैं, जो बलआम की शिक्षा को मानते हैं। बलआम ने बालाक को इस्राएलियों के मार्ग पर ठोकर डालने का परामर्श दिया, जिससे वे देवताओं को अर्पित मांस खायें और व्यभिचार करें।

15) तुम्हारे बीच कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो निकोलाइयों की शिक्षा मानते हैं।

16) इसलिए पश्चात्तप करो; नहीं तो मैं शीघ्र ही तुम्हारे पास आऊँगा और अपने मुख की तलवार से उन लोगों से युद्ध करूँगा।

17) जिसके कान हों, वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है। मैं विजयी को छिपा हुआ मन्ना और एक सफेद पत्थर प्रदान करूँगा। उस पत्थर पर नया नाम अंकित होगा, जिस को पाने वाले के अतिरिक्त और कोई नहीं जानता।

18) "थुआतिरा की कलीसिया के स्वर्गदूत को यह लिखो- "जिसकी आँखें अग्नि की तरह धधकती हैं और जिसके पैर भट्टी में तपाये हुए कासे की तरह चमकते हैं, उस ईश्वर के पुत्र का सन्देश इस प्रकार है:

19) मैं तुम्हारे आचरण, तुम्हारे भ्रातृप्रेम, तुम्हारे विश्वास, तुम्हारी धर्म-सेवा, तुम्हारे धैर्य से परिचित हूँ। मैं जानता हूँ कि तुमने इधर पहले से भी अधिक परिश्रम किया है।

20) किन्तु मुझे तुम से यह शिकायत है कि उस स्त्री ईज़बेल को अपने बीच रहने दे रही हो। वह अपने को नबिया कहती है और अपनी शिक्षा द्वारा मेरे सेवकों को व्यभिचार करने और देवताओं को अर्पित मांस खाने के लिए बहकाती है।

21) मैंने उसे पश्चात्ताप करने का समय दिया, किन्तु वह अपने व्यभिचार के लिए पश्चात्ताप करना नहीं चाहती।

22) देखो, मैं उसे रोग-शय्या पर पटक दूँगा और यदि उसके साथ व्यभिचार करने वाले उसके कर्मों से विमुख नहीं होंगे, तो मैं उन पर घोर विपत्ति ढाऊँगा।

23) मैं उसकी सन्तति को मार डालूँगा और सब कलीसियाएँ यह जान जायेंगी कि मैं वह हूँ, जो हृदयों की थाह लेता है और मैं हर एक को उसके कर्मों का फल दूँगा।

24) थुआतिरा के जो लोग इस शिक्षा को नहीं मानते और शैतान के तथाकथित गहरे भेद नहीं जानते, उन सबों से मैं यह कहता हूँ- मैं तुम लोगों पर कोई नया बोझ नहीं डालूँगा।

25) जो शिक्षा तुम्हारे पास है, मेरे आने तक उस पर दृढ़ बने रहो।

26) जो विजयी होगा, जो अन्त तक मेरी इच्छा पूरी करता रहेगा, मैं उसे राष्ट्रों पर वह अधिकार प्रदान करूँगा, जिसे मेरे पिता ने मुझे प्रदान किया।

27) वह लौह-दण्ड से राष्टों पर शासन करेगा और उन्हें मिट्टी के पात्रों की तरह चुकनाचूर कर देगा

28) और मैं उसे प्रभात का तारा प्रदान करूँगा।

29) जिसके कान हों, वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है।



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