जनवरी 02

सन्त ग्रिगोरी नाजियंजन

सन्‍ 361 में उनके एथेंस वापस आने पर उनके पिता ने स्थानीय ख्रीस्तीय समुदाय की सेवा में उनकी मदद करने के लिए उनका पुरोहिताभिषेक किया। परन्तु बेटे ग्रिगोरी का मन मठवास में था। कुछ ही दिन बाद वे अन्नसोई (Annesoi) जाकर बासिल के साथ मठवासीय जीवन बिताने लगा। बासिल ने उन्हें अपने पिता के पास नाजियंजन वापस जाने का सलाह दिया। घर पहुँचने पर उन्होंने स्थानीय ख्रीस्तीय समुदाय को दो दलों में विभाजित पाया तथा उनके पिता पर स्थानीय मठवासी अपसिद्धान्त का आरोप भी लगा रहे थे। ग्रिगोरी विभाजन से ऊपर उठने में ख्रीस्तीय विश्वासियों की सहायता की तथा अपसिद्धान्तों के विरुद्ध लोगों को सचेत भी किया।

इस समय सम्राट जूलियन ख्रिस्तीय धर्म के विरुद्ध अत्याचार करना शुरू किया। परन्तु एक युद्ध में जूलियन की अचानक मृत्यु हुई। जूलियन के बाद जोवियन सम्राट बने। वे एक ख्रीस्तीय विश्वासी थे और इस प्रकार अत्याचार पर विराम लग गया। ग्रिगोरी ने अरियस अपसिध्दान्त के विरुद्ध अपने कार्यों को आगे बढाया। बासिल सन्‍ 370 वे कैसरिया के धर्माध्यक्ष नियुक्त किये गये थे। सन्‍ 372 में उन्होंने अपने मित्र ग्रिगोरी का सासिमा के धर्माध्यक्ष के रूप में अभिषेक किया। परन्तु धर्माध्यक्ष के कार्यभार से उन्हें मठवासीय जीवन पसन्द था। कुछ समय बाद अपने मरणासन्न पिता के धर्मप्रान्त में उनकी सहायता करने हेतु वे नाजियंजन पहुँचे। सन्‍ 374 में उनके माता-पिता की मृत्यु के बाद वे वही कलीसिया की सेवा में समय बिताने लगे। सन्‍ 375 में वे सेल्यूकिया के मठ में प्रवेश कर तीन साल तक मठवासीय जीवन बिताया।

उन्हें काफ़ी समय तक अरियस अपसिध्दान्त के समर्थकों का सामना करना पडा। सन्‍ 389, 25 जनवरी को उनकी मृत्यु हुई। वे ’त्रित्वीय ईशशास्त्री’ (Trinitarian Theologian) जाने जाते हैं क्योंकि उन्होंने पावन त्रित्व के तीन व्यक्तियों के बीच के संबन्ध बारे में महत्वपूर्ण शिक्षा प्रदान की।


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