अप्रैल 02, 2024, मंगलवार

पास्का का अठवारा

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📒 पहला पाठ : प्रेरित-चरित 2:36-41

36) इस्राएल का सारा घराना यह निश्चित रूप से जान ले कि जिन्हें आप लोगों ने क्रूस पर चढ़ाया ईश्वर ने उन्हीं ईसा को प्रभु भी बना दिया है और मसीह भी।"

37) यह सुन कर वे मर्माहत हो गये और उन्होंने पेत्रुस तथा अन्य प्रेरितों से कहा, "भाइयों! हमें क्या करना चाहिए?"

38) पेत्रुस ने उन्हें यह उत्तर दिया, "आप लोग पश्चाताप करें। आप लोगों में प्रत्येक अपने-अपने पापों की क्षमा के लिए ईसा के नाम पर बपतिस्मा ग्रहण करे। इस प्रकार आप पवित्र आत्मा का वरदान प्राप्त करेंगे;

39) क्योंकि वह प्रतिज्ञा आपके तथा आपकी सन्तान के लिए है, और उन सबों के लिए, जो भी दूर हैं और जिन्हें हमारा प्रभु-ईश्वर बुलाने वाला है।"

40) पेत्रुस ने और बहुत-सी बातों द्वारा साक्ष्य दिया और यह कहते हुए उन से अनुरोध किया कि आप लोग अपने को इस विधर्मी पीढ़ी से बचाये रखें।

41) जिन्होंने पेत्रुस की बातों पर विश्वास किया, उन्होंने बपतिस्मा ग्रहण किया। उस दिन लगभग तीन हजार लोग शिष्यों में सम्मिलित हो गये।

📚 सुसमाचार : योहन 20:11-18

11) मरियम कब्र के पास, बाहर रोती रही। उसने रोते रोते झुककर कब्र के भीतर दृष्टि डाली

12) और जहाँ ईसा का शव रखा हुआ था वहाँ उजले वस्त्र पहने दो स्वर्गदूतों को बैठा हुआ देखा- एक को सिरहाने और दूसरे को पैताने।

13) दूतों ने उस से कहा, "भद्रे! आप क्यों रोती हैं?" उसने उत्तर दिया, "वे मेरे प्रभु को उठा ले गये हैं और मैं नहीं जानती थी कि उन्होंने उन को कहाँ रखा है"।

14) वह यह कहकर मुड़ी और उसने ईसा को वहाँ खडा देखा, किन्तु उन्हें पहचान नहीं सकी।

15) ईसा ने उस से कहा, "भद्रे! आप क्यों रोती हैं। किसे ढूँढ़ती हैं? मरियम ने उन्हें माली समझकर कहा, "महोदय! यदि आप उन्हें उठा ले गये, तो मुझे बता दीजिये कि आपने उन्हें कहाँ रखा है और मैं उन्हें ले जाऊँगी"।

16) इस पर ईसा ने उस से कहा, "मरियम!" उसने मुड कर इब्रानी में उन से कहा, "रब्बोनी" अर्थात गुरुवर।

17) ईसा ने उस से कहा, "चरणों से लिपटकर मुझे मत रोको। मैं अब तक पिता के पास ऊपर नहीं गया हूँ। मेरे भाइयेां के पास जाकर उन से यह कहो कि मैं अपने पिता और तुम्हारे पिता, अपने ईश्वर और तुम्हारे ईश्वर के पास ऊपर जा रहा हूँ।"

18) मरियम मगदलेना ने जाकर शिष्यों से कहा कि मैंने प्रभु को देखा है और उन्होंने मुझे यह सन्देश दिया।

📚 मनन-चिंतन

पेंतेकोस्त का अनुभव सभी शिष्यों के लिए अनोखा था। वे पवित्र आत्मा से परिपूर्ण होकर बड़े उत्साह के साथ प्रभु येसु के बारे में लोगों को बताने लगे।कई लोगों ने उनकी बातों पर विश्वास किया और प्रभु येसु के नाम पर बपतिस्मा भी ग्रहण किया। इसी प्रकर पेत्रुस ने बहुत सी बातों का साक्ष्य दिया।

मरियम के लिए भी पुनर्जीवित प्रभु को देखना एक अदभुत अनुभव था। वह प्रारंभ में प्रभु को पहचान ने में असमर्थ थी। जब प्रभु ने उससे बातें की, तो वह प्रभु को पहचान पायी और उनके चरणों से लिपट गयी। लेकिन प्रभु उसे अपने शिष्यों को भी यह संदेश का देने को भेजते हैं। क्या हम प्रभु के वचनों में विश्वास करते हैं? आइये, हम भी प्रभु के सुसमाचार को दूसरों तक पहुचायें।

- फादर साइमन मोहता (इंदौर धर्मप्रांत)


📚 REFLECTION

The experience of Pentecost was unique for all the disciples. Filled with the Holy Spirit, the started telling people about the Lord Jesus with great enthusiasm. Many people believed and got baptized in the name of Lord Jesus. In this way Peter testified of many things.

For Mary too it was a wonderful experience to see the risen Lord. She was initially unable to recognize the Lord. When the Lord spoke to her, she recognized the Lord and fell at His feet. But the Lord sends her to convey this message to his disciples as well. Do we believe in the words of the Lord? Come, let us also share the good news of the Lord to others.

-Fr. Simon Mohta (Indore Diocese)

📚 मनन-चिंतन-2

मरियम मग्देलेना अत्यंत दुखी थी। प्रभु येसु का दुखभोग तथा कू्रस पर मरण ने उसको तोड दिया था। उसने अपनी आखों से प्रभु की दुःखदायी मृत्यु तथा दफन की क्रिया को देखा था। वह येसु से बहुत स्नेह रखती थी। इसलिये वह प्रभु के मृत्यु शरीर पर लेपन करना चाहती थी। येसु की कब्र का पत्थर हटा तथा उनके शव को गायब देखकर उसका दुख और भी बढ गया था। वह निरंतर रोती जा रही थी। अपनी वेदना तथा आंसू के कारण वह न तो स्वर्गदूतों को पहचान पाती और न ही येसु को। वह येसु का माली समझ बैठती है और पूछती है, ष्महोदय! यदि आप उन्हें उठा ले गयेए तो मुझे बता दीजिये कि आपने उन्हें कहाँ रखा है और मैं उन्हें ले जाऊँगी।"

हमारे जीवन में भी हम दुख के कारण ईश्वर द्वारा प्रदान वरदानों या रास्तों को देख नहीं पाते हैं। मरियम के दुःख के द्वारा ईश्वर उन्हें पुनरूत्थान का अनुभव करवाना चाहते थे तथा साथ ही उनके इस पुनरूत्थान की घटना को सर्वप्रथम मानवजाति को घोषित करने का विशेषाधिकार भी प्रदान करना चाहते थे। किन्तु जिस प्रकार मरियम दुख और ऑसुओं में डूब गयी थी उसी प्रकार जीवन की असफलतायें हमें दुख पहुंचाती तथा ईश्वर द्वारा प्रदान अवसरों को देखने से रोकती है।

हमें हमेशा याद रखना चाहिये कि ईश्वर हमें कभी नहीं त्यागते है। हमारी तकलीफों के द्वारा वे हमें बडे उपहारों के लिये तैयार करते हैं। हमें हमेशा आशावान तथा जीवन की छोटी-बडी घटनाओं में ईश्वर का हाथ देखना चाहिये। एम्माउस जाते समय शिष्यों में गहरी निराशा थी। वे येसु को पहचान नहीं पाते हैं इसका मुख्य कारण उनकी निराशा थी। उन्होंने यह कहकर अपनी मन-स्थिति प्रकट की, ’’हम उसने बडी आशा थी’’। (लूकस 24:21)

येसु ने मरियम मग्देलेना के दुख के द्वारा उन्हें पुनरूत्थान के दर्शन का उपहार दिया। आइये हम भी निराशा के भाव को त्याग कर, ऑसूओं को पोछकर ईश्वर के अवसरों और कृपाओं महसूस करे।

- फादर रोनाल्ड मेलकम वॉन


📚 REFLECTION

Mary Magdalen was deeply disappointed. The gruesome passion and the death on the cross had left her shattered. She had witnessed the death and the burial of Jesus. She loved Jesus. Even when it was all over, she wanted to embalm the body of Jesus. Seeing stone removed and the empty tomb she became all the more sad. She was weeping incessantly. Her deep sorrows and tears prevented her from recognising angels and the risen Jesus. She didn’t understand the big picture, which included Jesus’ resurrection. She even mistook Jesus to be the gardener asking, “Sir, if you have carried him away tell me where you have laid him and I will take him away.”

So often, we’re just like Mary. We’re disappointed because we don’t understand the big picture of what God is doing. We’re disappointed because God is not working as we think He needs to work. It seems that His promises are not true! But from God’s perspective, we’re asking the wrong questions and trying to accomplish the wrong tasks! We need to process our disappointments in light of the risen Saviour’s love and care for us. We often don’t understand His sovereign perspective.

God perhaps prepares us through our suffering and difficulties. We need to be optimistic and see God’s hand even in small events of life. The disciples while on the way to Emmaus were deeply sad. They too failed to recognise Jesus in their disappointment. They expressed their state of mind, “But we had hoped that he was the one to redeem Israel.” (Luke 24:21)

Jesus prepared Mary through the sorrows to experience and witness his resurrection. Let us also discard the sadness and wipe away the tears from our eyes so that we may see God and his goodness.

-Fr. Ronald Melcom Vaughan

📚 मनन-चिंतन - 3

‘‘मैने प्रभु को देखा है’’, ये वो शब्द होंगे जो मरियम मगदलेना ने येसु को देखने के बाद पूरे रास्ते भर में कहते हुए जा रही होगी जब वह षिष्यों को इस बात बताने के लिए जा रही थी। हम मरियम मगदलेना की उमंग, आनंद, जोष और उत्साह की परिकल्पना कर सकते हैं जब वे इन शब्दों के साथ साथ येसु द्वारा कहे गये शब्दों को षिष्यों को बताने के लिए गई होगी। लेकिन इस पर षिष्यों की क्या प्रतिक्रिया हुई होगी? उन्होने पहले यह सोचा होगा कि वि वह पागल हो गई है या वह येसु के मृत्यु के गम में बेसुद हो गई है। लेकिन पुनर्जीवित येसु को देखने पर एक व्यक्ति आनंद और शांति से भर जाता है। और यही वह शांति और आनंद है जिसने षिष्यों को येसु को घोषित करने में प्रेरित किया।

आज के प्रथम पाठ में पेत्रुस द्वारा प्रचार को सुनने वालों का हृदय मर्माहत हो गया और उन्होनं पेत्रुस और अन्य षिष्यों से पूंछा कि उन्हे क्या करना चाहिए। पेत्रुस ने उन्हे पष्चाताप और येसु के नाम पर बपतिस्मा ग्रहण करने के लिए कहा। पास्का के सच्चे आनंद का अनुभव सच्चा पश्चाताप के बाद ही होता है। उन सभी गुनाहों के प्रति पश्चाताप जिसके चलते येसु को कू्रस का दुख उठाना पड़ा। जब येसु कू्रस पर टोके गये थे, तब उनके साथ दो डाकुओं को भी कू्रस पर टोका गया था, एक को येसु के दायें और एक को येसु के बायें; और उन दोनों में से एक डाकू ने पष्चाताप किया और उसके द्वारा उसने पुनर्जीवित येसु के साथ रहने का आषीष प्राप्त किया।

येसु हम सभी से प्रेम करते है और इस प्रेम को उन्होने हम सभी के लिए कू्रस पर मर कर दर्षाया। वह हम प्रत्येक को आनंद और शांति का अनुभव करने के लिए बुलाते है। संत मत्ती के सुसमाचार 11ः28 में वे कहते है,‘‘थके-मॉंदे और बोझ से दबे हुए लोगो! तुम सभी मेरे पास आओ। मैं तमहें विश्राम दूॅंगा।’’ संत योहन के सुसमाचार 14ः27 में येसु कहते है, ‘‘मैं तुम्हारे लिए शांति छोड़ जाता हूॅं। अपनी शांति तुम्हें प्रदान करता हूॅं।’’ आईये हम प्रभु येसु के पास पश्चातापी हृदय के साथ जायें और उस आनंद और शांति का अनुभव करें जो येसु के हृदय से हम सभी के लिए बहता है। आमेन

- फादर डेन्नीस तिग्गा


📚 REFLECTION

“I have seen the Lord”, these were the very words of Mary Magdalene which she may be saying all through the way to tell the disciples after she had seen the risen Lord. We can imagine the joy, enthusiasm and excitement of Mary to tell these words and the words which the risen Lord told her. What would have been the reaction of the disciples? They might have at first thought that she went crazy or she has become mad in the loss of Jesus. Seeing the risen lord fills the person with joy and peace. This joy and peace led the disciples to proclaim Jesus.

In today’s first reading on hearing Peter’s proclamation those who were listening to Peter their hearts were cut and they asked what they had to do. Peter told them repent and be baptized in the name of Jesus. The joy of Easter can be experienced only after the true repentance. The repentance of all the evil due to which we caused Jesus to bear the pain of the cross. When Jesus was on the cross, along with Jesus two other thieves were crucified and among them only one thief repented and got the blessing to be with the Risen Lord.

Jesus loves us and he showed his love by dying on the cross for each one of us. He calls each one of us to experience the joy and peace. In Mt 11:28 he says, “Come to me, all who are weary and burdened and I will give you rest.” In Jn 14:27 he says, “Peace I leave with you; my peace I give you.” Let us always go to him with repentant heart and experience the joy and peace that flows from his heart for each one of us. Amen

-Fr. Dennis Tigga