Smiley face

23. चालीसे का चैथा इतवार

2 इतिहास ग्रंथ 36:14-16, 19-23; एफ़ेसियों 2:4-10; योहन 3:14-21

ब्रदर प्रदीप रोड्रीगस (जबलपुर)


ख्रीस्त में मेरे प्रिय भाईयों एवं बहनेां, आज हम चालिसा के चैथे इतवार में प्रवेश करते हैं।

ईश्वर का प्रेम असीम है और उनकी दयालुता आकाश के तरह विशाल है। उन्होंने अपनी दया को प्रकट करने हर सीमा को तोड़ा और हमें अनन्त जीवन का रास्ता दिखाया है।

आज के पहले पाठ में ईश्वर की असीम दया को दर्शाया गया है। इस्राएली जनता ईश्वर द्वारा चुनी हुई प्रजा थी, ईश्वर ने उन्हें अपना अपार प्रेम अपने मुक्ति-विधान के कार्यों में प्रदर्शित किया। लेकिन जैसे समय गुज़रता गया लोग ईश्वर के महान कार्यों को भूल गए और पापमय जीवन व्यतित करने लगे। ईश्वर के द्वारा भेजे गये नबियों को उन्होने तिरस्कार किया और अपने पापमय स्थिति को जारी रखा। ईश्वर ने इस्राएली प्रजा को दण्डित किया और उन्हें निर्वासन में भेज दिया ।

ईश्वर की दया इस्राएली जनता पर फिर उमड़ पड़ी और उन्होंने अपनी प्रजा को बाबुल के निर्वासन से चुटकारा दिलाया और अपने देश वापस पहुँचाया। इस्राएली जनता को गुलामी से मुक्ति दिलाना यह भी दर्शता है कि ईश्वर अपनी योजनाओं को मूर्तिपूजक राजाओं के द्वारा भी पूरा कर सकते हैं।

ईश्वर का प्रेम मनुष्य के प्रेम से कई गुना अधिक है। उनकी दया असीम और अपरम्पार है - यह हम आज के दूसरे पाठ में पाते हैं। संत पौलुस ऐफेसियों के नाम लिखे हुए पत्र में अध्याय 2 वाक्य 4-5 में कहते हैं ”ईश्वर की दया अपार है। हम अपने पापों के कारण मर गए थे, किन्तु उसने हमें इतना प्यार किया कि उसने हमें मसीह के साथ जीवन प्रदान किया।“ इससे हम जान सकते हैं कि ईश्वर हम से कितना प्यार करते हैं। हमारे अनगिनत पापों के बावजूद वह हम से बेहत व्यार करते हैं और यह सब हमारे किसी पुण्य के द्वारा नहीं बल्कि ईश्वर की असीम दया के द्वारा ही।

पाप सबसे पहले हमारे और ईश्वर के बीच मनमुटाव की भावनाओं को उत्पन्न करता है। जब कभी हम अपने पापों को एहसास करते हैं, तब हमारे मन में एक तरह का डर ईश्वर के समक्ष जाने से होता है। जब आदम और हेवा ने ईश्वर के विरूद्ध पाप किया तब वे ईश्वर की उपस्थिति में अपने आप को पापी समझने लगे। जब इसायस नबी ने ईश्वर का दर्शन कियाः उनकी सबसे पहली प्रतिक्रिया थी ”हाय! मैं नष्ट हो गया कयोकि मैं तो अशुद्ध होठों वाला मनुष्य हूँ” (इसायस 6:5)। जब पेत्रुस ने येसु को पहचाना तब उन्होंने कहा ”प्रभु! मेरे पास से चले जाइए । मैं तो पापी मनुष्य हूँ (लूकस 5:8)।

येसु इस दुनिया में अपनी दया और अनुकम्पा को दिखाने आये और उन्होंने किसी व्यक्ति को उसकी योग्यता के बल पर नहीं तोला। इसका कई उदाहरण हम सुसमाचार में पाते हैं। ईश्वर सारी मानव जाति को पापों से मुक्त करना चाहते थे; इसी कारण से उन्होंने अपने एकलौते पुत्र को अर्पित कर दिया। ईश्वर ने येसु को इसलिए नहीं भेजा कि वह संसार को दोषी ठहराये उन्होंने उन्हें इसलिए भेजा है कि संसार उनके द्वारा मुक्ति प्राप्त करें।

अपने पूर्वजों के प्रति ईश्वरीय प्रेम के अनुभव ने यहूदियों को विश्वासी बनने के लिए प्रेरित किया। इस चालीसा काल के दौरान हम अपने पिछले जीवन को जाँचने तथा ईश्वर ने हम पर कितनी अधिक कृपा बरसाथी है, उनको परखने के लिए आमंत्रित किये गये हैं। आज पवित्र कलीसिया हमें ईश्वर की दयालुता के प्रति आनंद मनाने के लिए आमंत्रित करती है। हाँ, हमने ईश्वर की दयालुता का अनुभव कई अवसरों पर किया है, लेकिन पाप रूपी ज़हरीले साँप के डँसने के कारण हम कई बार ईश्वर की दया का अनुभव करने में अससर्थ भी बन जाते हैं। यहूदी लोग काँसे के बने सर्प को देखकर ठीक हो गये थे। ठीक इसी प्रकार हम क्रूस पर टंगे येसु की ओर अपनी दृष्टि दौड़ायें और पश्चातापी हृदय से ईश्वर की दया एंव प्रेम पर आस्था रखते हुए एक नए जीवन की ओर प्रस्थान करें।


Copyright © www.jayesu.com
Praise the Lord!