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यदि प्रभु ही घर नहीं बनाये ....

Smiley faceउत्पत्ति 20 में हम पढ़ते हैं कि जब इब्राहीम गरार में रहने लगा, तब गरार के राजा अबीमेलेक ने सारा को बुलवा कर अपने पास रख लिया। प्रभु इश्वर ने रात में अबीमेलेक को स्वप्न में दर्शन दिये और सारा का अपहरण करने के लिए दण्ड देने की बात की। अबीमेलेक का अब तक सारा से संसर्ग नहीं हुआ था, इसलिए उसने कहा, ''प्रभु! क्या तू निर्दोष मनुष्यों का विनाश करेगा? … मैंने यह कार्य निर्मल हृदय और निष्पाप हाथों से किया है।'' तब ईश्वर ने उस से कहा, ''हाँ, मैं जानता हूँ कि तुमने यह कार्य निर्मल हृदय और निष्पाप हाथों से किया और मैंने ही तुम्हें अपने विरुद्ध पाप करने से बचाया है। इसीलिए मैंने तुम को उसका स्पर्श तक नहीं करने दिया। अब उस पुरुष की पत्नी को उसे लौटाओ, क्योंकि वह एक नबी है। वह तुम्हारे लिए प्रर्थना करेगा और तुम जीवित रहोगे। यदि तुम उसे नहीं लौटाओगे, तो जान लो कि तुम्हारी और तुम्हारे सगे-सम्बन्धियों की मृत्यु हो जायेगी।'' हमें पापों से दूर रहने के लिए, प्रलोभनों पर विजय पाने के लिए प्रभु की सहायता चाहिए। प्रभु की सहायता से ही यूसुफ़ विभिन्न प्रकार के प्रलोभनों के समय सफल था। यूसुफ़ के बारे में पवित्र ग्रन्थ कहता है, “प्रभु यूसुफ़ का साथ देता था। इसलिए उसके सब काम सफल थे” (उत्पत्ति 39:2)। दाऊद के बारें में भी यह सच है। पवित्र वचन साक्ष्य देता है, “दाऊद अपने सब कामों में सफल होता था, क्योंकि प्रभु उसके साथ था” (1समुएल 18:14)।

स्तोत्र 127:1 में स्तोत्रकार कहते हैं, “यदि प्रभु ही घर नहीं बनाये, तो राजमिस्त्रियों का श्रम व्यर्थ है। यदि प्रभु ही नगर की रक्षा नहीं करे, तो पहरेदार व्यर्थ जागते हैं।” स्तोत्रकार के सन्देश पर ध्यान दीजिए। उनका यह कहना है कि पहरेदार तथा मिस्त्रियों का काम भी सफलता से करने के लिए हमें प्रभु की सहायता की ज़रूरत है। संत पौलुस कहते हैं, “आप विश्वास के बल पर अपने स्थान पर बने हुए हैं। आप घमंड न करें, बल्कि सावधान रहें” (रोमियों 11:20)। कुरिन्थियों को लिखते हुए वे कहते हैं,“जो यह समझता है कि मैं दृढ़ हूँ, वह सावधान रहे। कहीं ऐसा न हो कि वह विचलित हो जाये” (1 कुरिन्थियों 10:12)। उत्पत्ति 11 में हम देखते हैं कि लोगों ने ईश्वर से अलग होकर एक मीनार बनाने की कोशिश की। उन्हें अपना काम अधूरा ही छोडना पड़ा और वे धरती पर बिखेर दिए गए। संत याकूब कहते हैं, “सभी उत्तम दान और सभी पूर्ण वरदान ऊपर के हैं और नक्षत्रों के उस सृष्टिकर्ता के यहाँ से उतरते हैं, जिसमें न तो कोई परिवर्तन है और न परिक्रमा के कारण कोई अन्धकार।” (याकूब 1:17) इसलिए स्तोत्रकार निसंदेह कहते हैं, “तू ही मेरा ईश्वर है। तुझ में ही मेरा कल्याण है" (स्तोत्र 16:2)। प्रभु येसु कहते हैं, “मुझ से अलग रहकर तुम कुछ भी नहीं कर सकते” (योहन 15:5)।

प्रभु कुछ लोगों के साथ रहते हैं। इसका एक कारण 2 इतिहास 17:3-4 में हम पाते हैं – “प्रभु यहोशाफ़ाट के साथ था, क्योंकि वह उस मार्ग पर चलता था, जिस पर उसका पूर्वज दाऊद पहले चला था। वह बाल-देवताओं की नहीं, बल्कि अपने पिता के ईश्वर की उपासना करता था। वह प्रभु की आज्ञाओं का पालन करता और इस्राएल के कार्यों का अनुसरण नहीं करता था।” पवित्र बाइबिल कहती है कि प्रभु इब्राहीम, यूसुफ़, दाऊद, हिज़किया तथा यहोशाफ़ाट के साथ थे। हनोक और नूह के बारे में यह कहा गया है कि वे ईश्वर के मार्ग पर चलते थे। जब हम ईश्वर के मार्ग पर चलते हैं, ईश्वर हमारे साथ रहते हैं। जब हम ईश्वर के मार्ग से भटक जाते हैं, तब हम उनकी संगति छोड़ देते हैं। उड़ाऊ पुत्र के साथ यही हुआ था। हम प्रभु के साथ चल कर अपने जीवन को सफल बनायें। प्रभु ईश्वर हमें आशिष दें।

✍ - फ़ादर फ़्रांसिस स्करिया