प्रभात वन्दना

वर्ष का सामान्य रविवार - 20


अगुआ : प्रभु! हमारे अधरों को खोल दे।

समूह : और हम तेरे नाम का गुणगान करेंगे।


आमंत्रक स्तोत्र

आमन्त्रक अग्र. : हम प्रभु की प्रजा, उसके चरागाह की भेड़ें हैं। आइये, हम उसकी आराधना करें। अल्लेलूया।

मंगलगान :

त्रिएक ईश्वर तू मेरे दिल में सदा बसता है,
तेरे बिना एक पल भर मेरा, जीवन भी मुश्किल है

यह मैं जानता हूँ, हाँ मैं मानता हूँ;
धरती पर घट जाता धरम
मिटता गुण बढ़ता अवगुण।
फिर भी तेरी कृपा क्या इनसे कम
आया हूँ तेरी शरण

मन में है पाप का मैल भरा,
तन में है रोग का बोझ भरा।
फिर भी आस न क्यों मैं तुझसे करूँ,
तू है दया सागर

अग्र. 1 : प्रभु को धन्य कहो, क्योंकि उसका प्रेम अपार है; अल्लेलूया।

स्तोत्र 117 : उल्लास एवं मुक्ति का गीत।

प्रभु का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है।
उसकी सत्यप्रतिज्ञता अनन्त काल तक बनी रहती है।
इस्राएल का घराना यह कहता जाये
उसकी सत्यप्रतिज्ञता अनन्त काल तक बनी रहती है।

हारून का घराना यह कहता जाये-
उसकी सत्यप्रतिज्ञता अनन्त काल तक बनी रहती है।
प्रभु के श्रद्धालु भक्त यह कहते जायें-
उसकी सत्यप्रतिज्ञता अनन्त काल तक बनी रहती है।

संकट में मैंने प्रभु को पुकारा।
प्रभु ने मेरी सुनी और मेरा उद्धार किया।
प्रभु मेरे साथ है, मुझे कोई भय नहीं।
मनुष्य मेरा क्या कर सकते हैं?

प्रभु मेरे साथ है, वह मेरी सहायता करता है।
मैं अपने शत्रुओं का डट कर सामना करता हूँ।
मनुष्यों पर भरोसा रखने की अपेक्षा
प्रभु की शरण जाना अच्छा है।

शासकों पर भरोसा रखने की अपेक्षा
प्रभु की शरण जाना अच्छा है।
सब राष्ट्रों ने मुझे घेर लिया था-
मैंने प्रभु के नाम पर उन्हें तलवार के घाट उतारा।

उन्होंने मुझे चारों ओर से घेर लिया था-
मैंने प्रभु के नाम पर उन्हें तलवार के घाट उतारा।
उन्होंने मुझे मधुमक्खियों की तरह घेर लिया था।
वे काँटों की आग की तरह शीघ्र ही बुझ गये-

मैंने प्रभु के नाम पर उन्हें तलवार के घाट उतारा।
वे मुझे धक्का दे कर गिराना चाहते थे, किन्तु प्रभु ने मेरी सहायता की।
प्रभु ही मेरा बल है और मेरे गीत का विषय, उसने मेरा उद्धार किया।
धर्मियों के शिविरों में आनन्द और विजय के गीत गाये जाते हैं।

प्रभु का दाहिना हाथ महान् कार्य करता है;
प्रभु का दाहिना हाथ विजयी है,
प्रभु का दाहिना हाथ महान् कार्य करता है।
मैं नहीं मरूँगा, मैं जीवित रहूँगा,

और प्रभु के कार्यों का बखान करूँगा।
प्रभु ने मुझे कडा दण्ड दिया, किन्तु उसने मुझे मरने नहीं दिया।
मेरे लिए मन्दिर के द्वार खोल दो,
मैं उस में प्रवेश कर प्रभु को धन्यवाद दूँगा।

यह प्रभु का द्वार है, इस में धर्मी प्रवेश करते हैं।
मैं तुझे धन्यवाद देता हूँ;
क्योंकि तूने मेरी सुनी
और मेरा उद्धार किया है।

कारीगरों ने जिस पत्थर को निकाल दिया था,
वह कोने का पत्थर बन गया है।
यह प्रभु का कार्य है,
यह हमारी दृष्टि में अपूर्व है।

यह प्रभु का ठहराया हुआ दिन है,
हम आज प्रफुल्लित हो कर आनन्द मनायें।
प्रभु! हमारा उद्धार कर।
प्रभु! हमें सुख-शान्ति प्रदान कर।

धन्य है वह, जो प्रभु के नाम पर आता है!
हम प्रभु के मन्दिर से तुम्हें आशीर्वाद देते हैं।
प्रभु ही ईश्वर है।
उसने हमें ज्योति प्रदान की है।

हाथ में डालियाँ लिये, जुलूस बना कर,
वेदी के कोनों तक आगे बढ़ो।
तू ही मेरा ईश्वर है!
मैं तुझे धन्यवाद देता हूँ।

मेरे ईश्वर! मैं तेरी स्तुति करता हूँ।
प्रभु का धन्यवाद करो,
क्योंकि वह भला है।
उसकी सत्यप्रतिज्ञता अनन्त काल तक बनी रहती है।

अग्र. : प्रभु को धन्य कहो, क्योंकि उसका प्रेम अपार है; अल्लेलूया।

अग्र. 2 : अल्लेलूया, प्रभु की समस्त कृतियो, प्रभु को धन्य कहो; अल्लेलूया।


भजन स्तुति : दानिएल 3:52-57

हमारे पूर्वजों के प्रभु-ईश्वर! तू धन्य है,
सदा-सर्वदा प्रशंसनीय, महिमामय और सर्वोच्च।

तेरी महिमान्वित पवित्र नाम धन्य है,
सदा-सर्वदा प्रशंसनीय, महिमामय और सर्वोच्च।

तू अपने महिमान्वित पवित्र मंन्दिर में धन्य हैं
सदा-सर्वदा प्रशंसनीय, महिमामय और सर्वोच्च।

तू अपने राज्य के सिंहासन पर धन्य है,
सदा-सर्वदा प्रशंसनीय, महिमामय और सर्वोच्च।

तू महागर्त्त की थाह लेता और केरूबों पर विराजमान है, तू धन्य है,
सदा-सर्वदा प्रशंसनीय, महिमामय और सर्वोच्च।

स्वर्ग में विराजमान प्रभु! तू धन्य है,
सदा-सर्वदा प्रशंसनीय महिमामय और सर्वोच्च।

प्रभु की समस्त कृतियों! प्रभु को धन्य कहो,
उसकी स्तुति करो और सदा-सर्वदा उसकी महिमा गाओ।

अग्र. : अल्लेलूया, प्रभु की समस्त कृतियो, प्रभु को धन्य कहो; अल्लेलूया।

अग्र. 3 : सांस लेने वाले सभी प्राणी प्रभु की स्तुति करें, अल्लेलूया।

स्तोत्र 150 प्रभु की स्तुति करो।

प्रभु के मन्दिर में उसकी स्तुति करो।
उसके महिमामय आकाश में उसकी स्तुति करो।
उसके महान् कार्यों के कारण उसकी स्तुति करो।
उसके परम प्रताप के कारण उसकी स्तुति करो।

तुरही फूँकते हुए, उसकी स्तुति करो।
वीणा और सितार बजाते हुए उसकी स्तुति करो।
ढोल बजाते और नृत्य करते हुए उसकी स्तुति करो।

तानपूरा और बाँसुरी बजाते हुए उसकी स्तुति करो।
झाँझों की ध्वनि पर उसकी स्तुति करो।
विजय की झाँझों को बजाते हुए उसकी स्तुति करो।
सभी प्राणी प्रभु की स्तुति करें।

अग्र. : सांस लेने वाले सभी प्राणी प्रभु की स्तुति करें, अल्लेलूया।

धर्मग्रन्थ-पाठ : 2 तिमथी 2:8,11-13

दाऊद के वंश में उत्पन्न, मृतकों में से पुनर्जीवित ईसा मसीह को बराबर याद रखो- यह मेरे सुसमाचार का विषय है। यह कथन सुनिश्चित है- यदि हम उनके साथ मर गये, तो हम उनके साथ जीवन भी प्राप्त करेंगे। यदि हम दृढ़ रहे, तो उनके साथ राज्य करेंगे। यदि हम उन्हें अस्वीकार करेंगे, तो वह भी हमें अस्वीकार करेंगे। यदि हम मुकर जाते हैं, तो भी वह सत्य प्रतिज्ञ बने रहेंगे; क्योंकि वह अपने स्वभाव के विरुद्ध नहीं जा सकते।

लघु अनुवाक्य : हे ईश्वर, हम तुझे धन्य कहते हैं और तेरे नाम की दुहाई देते हैं।
• हम तेरे आश्चर्यजनक कार्यों का बखान करते हैं।
• पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा की महिमा हो।

ज़ाकरी गान

अग्र. :स्वर्ग से उतरी हुई जीवन्त रोटी मैं हूँ। यदि कोई वह रोटी खायेगा, तो वह सदा जीवित रहेगा; अल्लेलूया।

धन्य है प्रभु, इस्राएल का ईश्वर!
उसने अपनी प्रजा की सुध ली है
और उसका उद्धार किया है।
उसने अपने दास दाऊद के वंश में
हमारे लिए एक शक्तिशाली मुक्तिदाता उत्पन्न किया है।

वह अपने पवित्र नबियों के मुख से
प्राचीन काल से यह कहता आया है
कि वह शत्रुओं और सब बैरियों के हाथ से हमें छुड़ायेगा
और अपने पवित्र विधान को स्मरण कर
हमारे पूर्वजों पर दया करेगा।

उसने शपथ खा कर हमारे पिता इब्राहीम से कहा था
कि वह हम को शत्रुओं के हाथ से मुक्त करेगा,
जिससे हम निर्भयता, पवित्रता और धार्मिकता से
जीवन भर उसके सम्मुख उसकी सेवा कर सकें।

बालक! तू सर्वोच्च ईश्वर का नबी कहलायेगा,
क्योंकि प्रभु का मार्ग तैयार करने
और उसकी प्रजा को उस मुक्ति का ज्ञान कराने के लिए,
जो पापों की क्षमा द्वारा उसे मिलने वाली है,
तू प्रभु का अग्रदूत बनेगा।

हमारे ईश्वर की प्रेमपूर्ण दया से
हमें स्वर्ग से प्रकाश प्राप्त हुआ है,
जिससे वह अन्धकार और मृत्यु की छाया में बैठने वालों को ज्योति प्रदान करे
और हमारे चरणों को शान्ति-पथ पर अग्रसर करे।"

पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा की महिमा हो
जैसे वह आदि में थी, अब है और अनन्त काल तक। आमेन।


अग्र. :स्वर्ग से उतरी हुई जीवन्त रोटी मैं हूँ। यदि कोई वह रोटी खायेगा, तो वह सदा जीवित रहेगा; अल्लेलूया।

सामूहिक निवेदन

अगुआ : एकमात्र, हमारे उध्दारकर्त्ता, ख्रीस्त येसु द्वारा स्तुति, सम्मान, महिमा तथा सामर्थ्य योगों के पहले, अब और युग-युगों तक हो।
समूह : हे ईश्वर, हम तुझे प्रभु मानकर तेरी स्तुति करते हैं।
• समस्त विश्व के सृष्टिकर्त्ता हम तुझे धन्य कहते हैं। हम तेरी कृपा की जरूरत में पड़े पापी थे – किन्तु तूने अब हमको बुलाया है ताकि हम तेरे ज्ञान और तेरी सेवा में जीवन जीयें।
• तेरे पुत्र ने हमें मुक्ति का मार्ग दिखाया है – उनके पदचिह्नों पर चलते हुये हम उस मार्ग से कभी विचलित न होवें, जो जीवन की ओर ले चलता है।
• आज हम तेरे पुत्र का पुनरुत्थान मना रहे हैं – सुख और दुख में यही पुनरुत्थान हमें अपार आनन्द पहुँचाये।
• हे प्रभु, तेरी प्रशंसा करने तथा तुझसे प्रार्थना करने का हमें वरदान दे – हम सदा और सर्वत्र तुझे धन्यवाद देते रहें।


हे हमारे पिता ....


समापन प्रार्थना

अगुआ :हे प्रभु ईश्वर, तुझे प्यार करने वालों के लिए तूने ऐसा पुरस्कार तैयार किया है जिसे न तो आँखें कभी देख पायी हैं और न कान कभी सुन पाये हैं। तू हमारा हृदय अपने प्रेम से भर दे जिससे सबसे अधिक तुझे प्यार करते हुए तुझ से प्रतिज्ञात पुरस्कार प्राप्त करें जो हमारी हर कल्पना के परे हैं। हम यह प्रार्थना करते हैं, उन्हीं हमारे प्रभु येसु ख्रीस्त तेरे पुत्र के द्वारा जो परमेश्वर होकर तेरे तथा पवित्र आत्मा के साथ युगानुयुग जीते और राज्य करते हैं।

समूह : आमेन।

अगुआ : प्रभु हमको आशीर्वाद दे, हर बुराई से हमारी रक्षा करे और हमें अनन्त जीवन तक ले चले।

समूह : आमेन।


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Praise the Lord!