1यदि कोई शान्ति-बलि के रूप में ढोरों से एक पशु चढ़ाता है, तो वह नर या मादा चढ़ा सकता है, किन्तु वह अदोष हो। 2वह अपना हाथ बलि पशु के सिर पर रखे और दर्शन-कक्ष के द्वार पर उसका वध करे। याजक, हारून के पुत्र उसका रक्त वेदी के चारों ओर छिड़कें। 3फिर वह शान्ति-बलि का एक अंश प्रभु को चढ़ाये, अर्थात् अँतड़ियों के आसपास की सारी चरबी, 4दोनों गुरदे तथा उन पर और कमर के पास की चरबी तथा जिगर की झिल्ली, जिसे वह गुरदों के साथ निकालेगा। 5याजक, हारून के पुत्र शान्ति-बलि के साथ यह सब वेदी पर जलती लकड़ी में भस्म करें। यह सुगन्धयुक्त चढ़ावा है, जो प्रभु को प्रिय है। 6यदि कोई शान्ति-बलि के रूप में भेड़ बकरियों में से प्रभु को एक पशु चढ़ाना चाहे, तो वह नर या मादा चढ़ा सकता है, किन्तु वह अदोष हो। 7यदि वह बलि के रूप में एक मेमना चढ़ाये, तो वह उसे प्रभु के सामने लाये 8और उस बलि-पशु के सिर पर अपना हाथ रख कर दर्शन-कक्ष के सामने उसका वध करे। हारून के पुत्र उसका रक्त वेदी के चारों ओर छिड़के। 9फिर वह शान्ति-बलि की चरबी प्रभु को अर्पित करे - चरबी-श्री मोटी पूँछ, अँतड़ियों के आसपास की चरबी, 10दोनों गुरदे तथा उन पर और कमर के पास की चरबी तथा जिगर की झिल्ली, जिसे वह गुरदों के साथ निकालता है। 11याजक यह सब भस्म करे। यह प्रभु को अर्पित आहार है। 12यदि कोई बलि के रूप में एक बकरी चढ़ाये, तो वह उसे प्रभु के सामने लाये 13और अपना हाथ उसके सिर पर रख कर दर्शन-कक्ष के पास उसका वध करे। हारून के पुत्र उसका रक्त वेदी के चारों ओर छिड़कें। 14वह बलि-पशु का एक अंश प्रभु को अर्पित करे - अँतड़ियों के आसपास की चरबी, 15दोनों गुरदे तथा उन पर और कमर के पास की चरबी तथा जिगर की झिल्ली, जिसे वह गुरदों के साथ निकालता है। 16याजक यह सब वेदी पर भस्म करे। यह प्रभु को अर्पित आहार और सुगन्धयुक्त चढ़ावा है। सारी चरबी प्रभु की है। 17तुम जहाँ कहीं भी निवास करोगे, यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी तुम्हारे लिए एक चिरस्थायी आदेश है। तुम न तो चरबी खाओगे और न रक्त ही।