1प्रभु ने मूसा से कहा, 2''इस्राएलियों से कहो कि यदि कोई व्यक्ति अनजाने प्रभु के आदेशों का उल्लंघन करे या प्रभु द्वारा मना किया हुआ कोई काम करें, 3यदि पापी व्यक्ति अभ्यंजित याजक हो और वह इस प्रकार प्रजा को पाप का भागी बनाये, तो उसे अपने पाप के कारण प्रायश्चित-बलि के रूप में प्रभु को एक अदोष बछड़ा अर्पित करना चाहिए। 4वह उस बछड़े को दर्शन-कक्ष के द्वार के पास प्रभु के सामने लाये, बछड़े के सिर पर अपना हाथ रखे और प्रभु के सामने उसका वध कर दे। 5तब अभ्यंजित याजक बछड़े का रक्त दर्शन कक्ष के अन्दर ले जाये। 6वह अपनी उँगली रक्त में डुबो कर उस रक्त को सात बार प्रभु के सामने, पवित्र स्थान के अन्तरपट पर छिड़के। 7इसके बाद याजक धूप-वेदी के सींगों पर, जो प्रभु के सामने दर्शन-कक्ष में है, रक्त लगाये। वह बछड़े का शेष रक्त दर्शन-कक्ष के द्वार के सामने की होम-बलि की वेदी के निचले भाग पर डाले। 8इसके बाद वह शान्ति बलि के बछड़े की तरह प्रायश्चित बलि के बछड़े की सारी चरबी निकाले, अर्थात अँतड़ियों के आसपास की चरबी, 9दोनों गुरदे तथा उन पर और कमर के पास की चरबी तथा जिगर की झिल्ली, जिसे वह गुरदों के साथ निकालता है। 10याजक यह सब बलि वेदी पर भस्म कर दे। 11बछड़े की खाल, उसका सारा मांस, उसका सिर और उसकी टाँगें, उसकी अँतड़ियाँ और उसका गोबर, 12अर्थात बछड़े का शेष अंश, वह शिविर के बाहर एक शुद्ध स्थान पर ले जाये और उसे राख के ऊपर लकड़ी की आग में जलाये। 13''यदि पूरा समुदाय अनजाने प्रभु के आदेशों का उल्लंघन करे या प्रभु द्वारा मना किया हुआ कोई और काम करे और इस प्रकार दोषी बने, 14तो पाप का पता लगते ही पूरे समुदाय को प्रायश्चित-बलि के रूप में एक साँड़ चढ़ाना चाहिए। वे उसे दर्शन-कक्ष के सामने लायें 15और समुदाय के नेता प्रभु के सामने पशु के सिर पर अपना हाथ रखें और प्रभु के सामने पशु का वध किया जाये 16इसके बाद अभ्यंजित याजक साँड का रक्त दर्शन-कक्ष के अन्दर ले जाये, 17उस में अपनी उँगली डुबो कर उस रक्त को सात बार प्रभु के सामने अन्तरपट पर छिड़के। 18तब याजक धूप-वेदी के सींगों पर, जो प्रभु के सामने दर्शन-कक्ष में हैं, रक्त लगाये। शेष रक्त वह दर्शन कक्ष के द्वार पर की होम-बलि की वेदी के निचले भाग पर डाले। 19वह सारी चरबी निकाल कर उसे वेदी पर भस्म करे। 20फिर वह उस साँड के साथ वही करे, जो प्रायश्चित के बलि-पशु के साथ किया जाता है। इस प्रकार याजक लोगों के लिए प्रायश्चित की विधि सम्पन्न करता है और उन्हें क्षमा दी जाती है। 21वह पहले पशु की तरह साँड़ को शिविर के बाहर ले जा कर उसे जलाये। यह समुदाय के पाप के लिए प्रायश्चित-बलि है। 22यदि कोई नेता अनजाने पाप करता है, क्योंकि वह प्रभु द्वारा मना किया हुआ काम करता है और इस प्रकार दोषी बनता है, 23तो पाप का पता लगते ही उसे एक अदोष बकरा चढ़ाना चाहिए। 24वह पशु के सिर पर हाथ रखे और होम-बलि के स्थान पर प्रभु के सामने पशु का वध करे। यह पाप के लिए प्रायश्चित-बलि है। 25याजक अपनी उँगली से प्रायश्चित-बलि के रक्त में से कुछ ले कर उसे धूप-वेदी के सींगों पर लगाये। शेष रक्त वह वेदी के निचले भाग पर डाले। 26वह शान्ति-बलि की चरबी की तरह पशु की सारी चरबी वेदी पर जलाये। इस प्रकार याजक उसके पापों के लिए प्रायश्चित की विधि सम्पन्न करता है और उसे क्षमा दी जाती है। 27यदि समुदाय का कोई सामान्य सदस्य अनजाने में पाप करता है, क्योंकि वह प्रभु द्वारा मना किया हुआ काम करता है और इस प्रकार दोषी बनता है, 28तो पाप का पता लगते ही उसे पाप के प्रायश्चित के लिए एक अदोष बकरा चढ़ाना चाहिए। 29वह पशु के सिर पर हाथ रखे और होम-बलि के स्थान पर उसका वध करे। 30याजक अपनी उँगली से उसका कुछ रक्त ले कर उसे धूप-वेदी के सींगों पर लगाये और शेष रक्त वेदी के निचले भाग पर डाले। 31वह शान्ति-बलि की चरबी की तरह पशु की सारी चरबी निकाले और उसे वेदी पर जलाये। यह प्रभु के लिए सुगन्धयुक्त चढ़ावा है। इस प्रकार याजक उसके लिए प्रायश्चित की विधि सम्पन्न करता है और उसे क्षमा दी जाती है। 32यदि कोई प्रायश्चित-बलि के रूप में एक मेमना चढ़ाना चाहे, तो वह एक अदोष मादा हो। 33वह पशु के सिर पर हाथ रखे और होम-बलि के स्थान पर प्रायश्चित-बलि के रूप में उसका वध करे। 34याजक अपनी उँगली से प्रायश्चित-बलि के रक्त में से कुछ ले कर उसे धूप-वेदी के सींगों पर लगााये। शेष रक्त वह वेदी के निचले भाग पर डाले। 35वह शान्ति-बलि की चरबी की तरह पशु की सारी चरबी निकाले और याजक उसे वेदी पर प्रभु को अर्पित अन्य होम-बलियों के ऊपर रख कर जलाये। इस प्रकार याजक उसके पाप के लिए प्रायश्चित की विधि सम्पन्न करता है और उसे क्षमा दी जाती है।