स्तोत्र

अध्याय 80

2(1-2) तू, जो इस्राएल का चरवाहा है, हमारी सुन; जो भेड़ों की तरह युसूफ को ले चलता है, जो स्वर्गदूतों पर विराजमान है, 3एफ्ऱईम, बेनयामीन और मनस्से के सामने अपने को प्रकट कर। अपने सामर्थ्य को जगा और आ कर हमारा उद्धार कर। 4ईश्वर! हमारा उद्धार कर। हम पर दयादृष्टि कर और हम सुरक्षित रहेंगे। 5विश्वमण्डल के प्रभु-ईश्वर! तू कब तक अपनी प्रजा की प्रार्थना ठुकराता रहेगा? 6तूने उसे विलाप की रोटी खिलायी और उसे भरपूर आँसू पिलाये। 7हमारे पड़ोसी हमारे लिए आपस में लड़ते हैं; हमारे शत्रु हमारा उपहास करते हैं। 8विश्वमण्डल के प्रभु! हमारा उद्धार कर। हम पर दयादृष्टि कर और हम सुरक्षित रहेंगे। 9तू मिस्र देश से एक दाखलता लाया, तूने राष्ट्रों को भगा कर उसे रोपा। 10तूने उसके लिए भूमि तैयार की, जिससे वह जड़ पकड़े और देश भर में फैल जाये। 11उसकी छाया पर्वतों पर फैलती थी और उसकी डालियाँ ऊँचे देवदारों पर। 12उसकी शाखाएँ समुद्र तक फैली हुई थीं और उसकी टहनियाँ फ़रात नदी तक। 13तूने उसका बाड़ा क्यों गिराया? अब उधर से निकलने वाले उसके फल तोड़ते हैं। 14जंगली सूअर उसे उजाड़ते हैं और मैदान के पशु उस में चरते हैं। 15विश्वमण्डल के ईश्वर! वापस आने की कृपा कर, स्वर्ग से हम पर दयादृष्टि कर। 16आ कर उस दाखबारी की रक्षा कर, जिसे तेरे दाहिने हाथ ने रोपा है। 17तेरी दाखलता काट कर जलायी गयी है। तेरे धमकाने पर तेरी प्रजा नष्ट होती जा रही है। 18अपने कृपापात्र पर अपना हाथ रख, उस मनुष्य पर, जिसे तूने शक्ति प्रदान की थी। 19तब हम फिर कभी तुझे नहीं त्यागेंगे। तू हमें नवजीवन प्रदान करेगा और हम तेरा नाम ले कर तुझ से प्रार्थना करेंगे। 20विश्वमण्डल के प्रभु-ईश्वर! हमार उद्धार कर, हम पर दयादृष्टि कर और हम सुरक्षित रहेंगे।