प्रज्ञा

अध्याय 5

1उस समय धर्मी आत्मविश्वास के साथ उन लोगों के सामने खड़े हो जायेंगे, जो उन पर अत्याचार करते और उनके परिश्रम को तुच्छ समझते थे। 2दुष्ट उसे देख आतंकित होकर काँपने लगेंगे और वे उसके अप्रत्याशित कल्याण पर आश्चर्यचकित होंगे। 3वे मन-ही-मन पश्चात्ताप करेंगे और दुःखी होकर कराहते हुए कहेंगेः 4"यह वही है, जिसकी हम हँसी उड़ाते थे, जिस पर हम ताना मारते थे। हम मूर्खतावष उसके जीवन को पागलपन और उसकी मृत्यु को अपमानजनक समझते थे। 5वह ईश्वर के पुत्रों में कैसे सम्मिलित किया गया? वह कैसे सन्तों का सहभागी बना? 6इसलिए हम सत्य के मार्ग से भटक गये, न्याय के प्रकाश ने हमें आलोकित नहीं किया और सूर्य हम पर उदित नहीं हुआ। 7हम अन्याय और विनाश के पथ पर भटकते रहे, हमने मार्गहीन मरुभूमियों को पार किया, किन्तु हमें प्रभु के मार्ग का पता नहीं था। 8घमण्ड से हमें क्या लाभ हुआ? जिस सम्पत्ति पर हमें गर्व था, उसने हमें क्या दिया? 9यह सब छाया की तरह, उड़ती अफवाह की तरह बीत गया, 10समुद्र की लहरों पर चलने वाले जहाज की तरह, जिसके पारगमन का कहीं निषान नहीं, जिसके पेंदे के मार्ग की कहीं खोज नहीं ; 11या पक्षी की तरह, जो हवा में उड़ते हैं, जिसके मार्ग की कोई खोज नहीं। वह हवा में पंख फड़फड़ाता और उसे अपने पंखों की पूरी शक्ति से चीरता, किन्तु बाद में वहाँ उसकी उड़ान का कोई निषान नहीं, 12या बाण की तरह, जो निषाने पर चलाया जाता है। हवा उस से चिर जाती, किन्तु वह तुरन्त जुड़ जाती है। जिससे उसके मार्ग का कोई पता नहीं चलता। 13इसी तरह हम जन्म के बाद तुरन्त लुप्त हो गये और अपने सद्गुणांें को कोई चिह्न नहीं दिखा सके। हम अपने दुर्गुणों द्वारा समाप्त हो गये।" 14सच! दुष्ट की आशा भूसी-जैसी है, जो पवन द्वारा उड़ायी जाती है ; हलके फेन-जैसी है, जो आँधी द्वारा छितराया जाता है; धुएँ-जैसी है, जिसे पवन उड़ा ले जाता है; एक दिन के मेहमान-जैसी है, जिसे कोई याद नहीं करता। 15किन्तु धर्मी सदा के लिए जीवित रहेंगे। उनका पुरस्कार प्रभु के हाथ में है और सर्वोच्च ईश्वर उनकी देखरेख करता है। 16वे प्रभु के हाथ से महिमामय राजत्व और भव्य मुकुट ग्रहण करेंगे; क्योंकि वह अपने दाहिने हाथ से और अपने भुजबल से उनकी रक्षा करेगा। 17वह अपने धर्मोत्साह के शस्त्र पहनेगा और अपनी सृष्टि द्वारा अपने शत्रुओें को दण्डित करेगा। 18वह न्याय का कवच धारण करेगा और अपरिवर्तनीय निर्णय का टोप पहनेगा। 19वह अजेय पवित्रता की ढाल 20और अनम्य क्रोध की तलवार धारण करेगा। समस्त सृष्टि उसके साथ मूर्खों के विरुद्ध युद्ध करेगी। 21चढ़े हुए धनुष से जैसे बाण सीधे लक्ष्य पर लग जाते हैं, वैसे ही बादलों से बिजली निकलेगी। 22उसका क्रोध गोफन की तरह भारी ओले बरसायेगा। समुद्र की लहरें उन पर आक्रमण करेंगी और नदियों की बाढ़ उन को ढ़क देगी। 23घोर आँधी उन पर टूट पड़ेगी और बवण्डर उन्हें छितरा देगा। अराजकता पृथ्वी को उजाड़ कर देगी और कुकर्म शासकों के सिंहासन गिरायेंगे।