1इसकी अपेक्षा सद्गुणी होकर निस्सन्तान रहना कहीं अच्छा है, क्योंकि सद्गुण की स्मृति बनी रहती है। ईश्वर और मनुष्य, दोनों उसका सम्मान करते हैं। 2जब तक सद्गुण विद्यमान है, लोग उसका अनुसरण करते हैं। जब वह चला जाता है, तो लोग उसकी अभिलाषा करते हैं। परलोक में उसकी शोभा-यात्रा मनायी जाती है, जिसमें वह विजय का मुकुट पहन कर चलता है; क्योंकि उसे अविनाशी पुरस्कारों की प्रतियोगिता में सफलता मिली है। 3किन्तु दुष्टों की बहुसंख्यक सन्तति व्यर्थ होगी। उनकी जारज सन्तान जड़ नहीं पकड़ेगी, उसे कोई सुदृढ़ आधार नहीं मिलेगा। 4यदि उसकी शाखाओें में कुछ समय तक टहनियाँ फूटेगी, तो वे सुदृढ़ नहीं होंगी; हवा उन्हें झकझोर देगी और आँधी उन्हें उखाडे़गी। 5उनकी अविकसित टहनियाँ टूट जायेगी, उनका फल बेकार होगा। वह इतना कच्चा होगा कि खाया नहीं जा सकता। वह किसी काम का नहीं होगा। 6जाँच होने पर जारज सन्तान अपने माता-पिता की दुष्टता का साक्ष्य देती है। 7यदि धर्मी मनुष्य असमय मर जाये, तो वह शान्ति पायेगा, 8क्योंकि जो वृद्धावस्था आदरणीय है, वह न तो लम्बी आयु पर निर्भर करती है और न केवल वर्षों की संख्या पर। 9जो मनुष्य बुद्धिमान् है, उसी के बाल सफेद समझो और जिसका जीवन निर्दोष है, उसी को वयोवृद्ध मान लो। 10ईश्वर उस पर प्रसन्न था और उसे प्यार करता था, इसलिए ईश्वर ने उसे पापियों के बीच में से उठा लिया। 11वह इसीलिए उठा लिया गया कि कहीं उसकी बुद्धि का विकार न हो जाये और कपट उसकी आत्मा को नहीं बहकायें; 12क्योंकि बुराई का सम्मोहन भलाई को धुँधलाता है और लालच की तीव्रता सरल हृदय को दूषित करती है। 13वह थोड़े समय में पूर्ण कर लम्बी आयु तक पहुँच गया है। 14उसकी आत्मा प्रभु को प्रिय थी, इसलिए प्रभु ने उसे शीघ्र ही चारों ओर की बुराई में से निकाल लिया है। लोग यह बात देख कर नहीं समझे। 15वे यह नहीं जानते हैं, कि प्रभु अपने भक्तोंे की रक्षा करता है। 16मरने वाला धर्मी जीवित रहने वाले दुष्ट को दोषी ठहराया है और शीघ्र पूर्णता प्राप्त करने वाला नवयुवक दुष्ट की लम्बी आयु पर दोष लगाता है। 17लोग ज्ञानी की मृत्यु देखेंगे, किन्तु वे उसके विषय में ईश्वर का प्रयोजन नहीं समझेंगे और यह भी नहीं कि ईश्वर ने उसे क्यों सुरक्षित रखा। 18वे यह देखेंगे और उसकी उपेक्षा करेंगे, किन्तु प्रभु उनका उपहास करेगा। 19बाद में वे तिरस्कृत शव बनेंगे और मृतकों में सदा के लिए निन्दा के पात्र होंगे। प्रभु उन्हें टुकड़े-टुकड़े कर देगा और वे एक शब्द भी नहीं बोल पायेंगे। वह उन्हें उखाड़ कर फेंक देगा। उनका सर्वनाश किया जायेगा, उन्हें दुःख भोगना पड़ेगा और उनकी स्मृति तक शेष नहीं रहेगी। 20जब उनके पापों का लेखा लगाया जायेगा, तो वे डरते-काँपते आयेंगे। उनके कुकर्म उनके सामने खड़े होकर उन पर दोष लगायेंगे।