प्रवक्ता

अध्याय 8

1शक्तिशाली मनुष्य का विरोध मत करो- कहीं ऐसा न हो कि तुम उसके हाथों पड़ जाओ। 2धनी व्यक्ति से झगड़ा मत करो- कहीं ऐसा न हो कि वह तुम पर हावी हो जाये। 3सोने ने बहुत लोगों का विनाश किया है और चाँदी ने राजाओें का हृदय भटकाया है।व 5अशिक्षित व्यक्ति के साथ मजाक मत करो, जिससे तुम्हारे पूर्वजों पर कलंक न लगे। 6पश्चाताप करने वाले पापी की निन्दा मत करो; याद रखो कि हम सब दण्ड के योग्य हैं। 7बृद्ध मनुष्य का तिरस्कार मत करो, क्येांकि हम भी बूढ़े बन रहे हैं। 8किसी की मृत्यु पर आनन्द मत मनाओ। याद रखो कि हम सब को मरना है। 9ज्ञानियों की बातों का तिरस्कार मत करो और उनकी सूक्तियों पर विचार करो; 10क्योंकि तुम उन से ज्ञान प्राप्त करोगे और बड़ों की सेवा की शिक्षा भी। 11वृद्धों की बातों का तिरस्कार मत करो; क्योंकि उन्हें भी अपने पूर्वजों से शिक्षा मिली। 12तुम उन से ज्ञान प्राप्त करोगे और उपयुक्त उत्तर देने की शिक्षा भी। 13पापी की क्रोधाग्नि मत भड़काओे, नहीं तो उसकी ज्वाला में भस्म हो जाओगे। 14उपहासक का सामना मत करो, नहीं तो वह तुम को तुम्हारी बात के फन्दे में फॅसायेगा। 15अपने से शक्तिशाली व्यक्ति को रुपया उधार मत दो। यदि उधार दोगे, तो अपना रुपया खोया समझो। 16अपनी शक्ति से परे जमानत मत दो। यदि ऐसा करते हो, तो समझो कि उसे तुम्हें चुकाना पड़ेगा। 17न्यायाधीश पर मुकदमा मत चलाओे; क्योंकि उसकी प्रतिष्ठा निर्णय को प्रभावित करेगी। 18दुःसाहसी व्यक्ति के साथ कहीं मत जाओ: उसके कारण तुम पर घोर विपत्ति पड़ सकती है; क्योंकि वह किसी की बात नहीं सुनेगा और उसकी मूर्खता के कारण तुम्हारा भी विनाश हो जायेगा। 19क्रोधी व्यक्ति से झगड़ा मत करो और उसके साथ मरुभूमि मत पार करो; क्योंकि रक्तपात उसके लिए साधारण सी बात है। जहाँ तुम्हें सहायता नहीं मिल सकेगी, वहाँ वह तुम पर टूट पड़ेगा। 20मूर्ख से परामर्श मत करो; क्येांकि वह तुम्हारी बात छिपाये नहीं रख सकता। 21अपरिचित के सामने कोई ऐसा काम मत करो, जिसे तुम गुप्त रखना चाहते हो; क्योंकि तुम नहीं जानते कि इसका परिणाम क्या होगा। 22हर किसी के सामने अपना हृदय मत खोलो और इस प्रकार लोकप्रिय बनने का प्रयत्न मत करो।