1पीने वाला मज़दूर धनी नहीं बनेगा। जो छोटी बातों की उपेक्षा करता, उसका पतन होगा। 2अंगूरी और स्त्रियाँ समझदार लोगों को भटकाती हैं। वेश्यागामी का विनाश होगा। वह सड़ाँध और कीड़ों का शिकार होगा। 3उसका दुःसाहस उसके विनाश का कारण बनेगा। उसकी आत्मा का सत्यानाश होगा और उसका उदाहरण प्रस्तुत किया जायेगा। 4जो जल्दी विश्वास करता, वह छिछोरा है। जो पाप करता, वह अपने को हानि पहुँचाता है। 5जो बुराई में रूचि लेता, उसे कलंक लगेगा। 6जो सुधार से घृणा करता, वह दीर्घायु नहीं होगा और जो बकवाद से घ्रूणा करता, वह बुराई से बचता है। 7चुगली मत दोहराओे और तुम को हानि नहीं उठानी पड़ेगी। 8जब तक चुप रहने में तुम्हारा कोई दोष न हो, तो न मित्र और न शत्रु का कोई भेद प्रकट करो; 9क्योंकि वह इसके विषय में सुनेगा, तुम से सावधान रहेगा और अवसर पा कर तुम पर बैर प्रकट करेगा। 10तुमने कोई बात सुनी है? तो उसे अपने में बन्द रखो। मत डरो, ऐसा करने पर तुम फट नहीं जाओगे। 11मूर्ख कोई बात सुनने पर परेशान है, उस स्त्री की तरह, जिसका प्रसव निकट है। 12मूर्ख के पेट में रहस्य की बात जाँघ में लगे वाण की तरह होती है। 13अपने मित्र से पूछो- सम्भव है, उसने वह अपराध नहीं किया हो; यदि उसने किया है, तो उसे फिर ऐसा करने से रोकोगे। 14अपने पड़ोसी से पूछो- सम्भव है, उसने वह बात नहीं कही हो। यदि उसने वह कही, तो उसे यह बात दोहराने से रोको। 15अपने मित्र से पूछो, क्योंकि लोग बहुत चुगली खाते हैं। 16हर बात पर विश्वास मत करो। कोई अनजान में बातचीत में गलती कर सकता है। 17किसने कभी बातचीत में गलती नहीं की? डाँटने से पहले पड़ोसी से पूछो 18और सर्वोच्च प्रभु की संहिता का पालन करो। प्रभु पर श्रद्धा प्रज्ञा की परिपूर्णता है और प्रज्ञा संहिता का पालन करती है। 19बुराई का अनुभव प्रज्ञा नहीं है और पापियों की योजनाएँ समझदारी का परिचय नहीं देती। 20एक प्रकार की चतुराई घृणास्पद है। जिस व्यक्ति में प्रज्ञा का अभाव है, वह मूर्ख है। 21संहिता का उल्लंघन करने वाले चतुर व्यक्ति की अपेक्षा वह कम समझदार व्यक्ति अच्छा है, जो प्रभु पर श्रद्धा रखता है। 22एक चतुराई ऐसी भी होती है, जो दुष्ट है। 23कोई अपना पक्ष उचित सिद्ध करने के लिए छल-कपट का सहारा लेता है। कोई शोक के वस्त्र पहन दुःखी होने का स्वाँग रचता है, किन्तु उसका अन्तरतम कपट से भरा है। 24कोई सिर झुका क नम्रता प्रदर्शित करता और बहरा होने का स्वाँग रचता है; किन्तु जब कोई ध्यान नहीं देता, तो वह तुम को धोखा देगा। 25कोई सामर्थ्य के अभाव में पाप से परहेज करता, किन्तु अवसर मिलते ही वह अपराध करेगा। 26मनुष्य चेहरे से पहचाना जाता है और बुद्धिमान् अपने चेहरे के भाव से। 27मनुष्य कैसा है- इसका पता चलता है उसके पहनावे, उसकी मुस्कराहट और उसकी चाल से।