प्रवक्ता

अध्याय 35

1संहिता के अनुसार आचरण बहुत-सी बलियों के बराबर है। 2(2-3) जो आज्ञाओें का पालन करता है, वह शांति का बलिदान चढ़ाता है। 4परोपकार अन्न-बलि लगाने के बराबर है। जो भिक्षादान करता है, वह धन्यवाद का बलिदान चढ़ाता है। 5बुराई का त्याग प्रभु को प्रिय होता है और अधर्म से दूर रहना प्रायश्चित के बलिदान के बराबर है। 6फिर भी खाली हाथ प्रभु के सामने मत जाओ, 7क्योंकि ये सब बलिदान आदेश के अनुकूल हैं। 8धर्मी का चढ़ावा वेदी की शोभा बढ़ाता है और उसकी सुगन्ध सर्वोच्च ईश्वर तक पहुँचती है। 9धर्मी का बलिदान सुग्राहय होता है, उसकी स्मृति सदा बनी रहेगी। 10उदारतापूर्वक प्रभु की स्तुति करते रहो। प्रथम फलों के चढ़ावे में कमी मत करो। 11प्रसन्नमुख हो कर दान चढ़ाया करो और खुशी से दशमांश देा। 12जिस प्रकार सर्वोच्च ईश्वर ने तुम्हें दिया है, उसकी प्रकार तुम भी उसे सामर्थ्य के अनुसार उदारतापूर्वक दो; 13क्योंकि प्रभु प्रतिदान करता है, वह तुम्हें सात गुना लौटायेगा। 14उसे घूस मत दो, वह उसे स्वीकार नहीं करता। 15पाप की कमाई के चढ़ावे पर भरोसा मत रखो; क्योंकि प्रभु वह न्यायाधीश है, जो पक्षपात नहीं करता। 16वह दरिद्र के साथ अन्याय नहीं करता और पद्दलित की पुकार सुनता है। 17वह विनय करने वाले अनाथ अथवा अपना दुःखड़ा रोने वाली विधवा का तिरस्कार नहीं करता। 18उसके आँसू उसके चेहरे पर झरते हैं और उसकी आह उत्याचारी पर अभियोग लगाती है। 19उसके आँसू उसके चेहरे से स्वर्ग तक चढ़ते हैं और प्रभु उसकी आह सुनता है। 20जो सारे हृदय से प्रभु की सेवा करता है, उसकी सुनवाई होती है और उसकी पुकार मेघों को चीर कर ईश्वर तक पहुँचती हैं। 21वह तब तक आग्रह करता रहता, जब तक सर्वोच्च ईश्वर उस पर दयादृष्टि न करे और धर्मियों को न्याय न दिलाये। 22प्रभु देर नहीं करेगा। वह उन पर दया नहीं करेगा और क्रूर लोगों की कमर तोड़ देगा। 23वह राष्ट्रों को बदला चुकायेगा, घमण्डियों का झुण्ड मिटायेगा और दुष्टों का राजदण्ड तोड़ेगा। 24वह मनुष्यों को उनके कर्मों का फल और उनके उद्देश्य के अनुसार उनके कार्यो का पुरस्कार प्रदान करेगा। 25वह अपनी प्रजा का पक्ष लेगा और अपनी दया से उसे आनन्दित करेगा। 26सूखे के समय वर्षा के बादलों की तरह विपत्ति के दिनों में प्रभु की दया का स्वागत होता है।